Betul Bhrashtachar News : धर्मशाला की भूमि का पट्टा भाजपा नेता को कर दिया आवंटित
अपनी ही पार्टी के नेताओं ने ग्रामीणों के साथ खोला मोर्चा, कटघरे में प्रशासनिक तंत्र

Betul Bhrashtachar News : बैतूल। घोड़ाडोंगरी तहसील के पाढर में इंदुबाला धर्मशाला की जमीन का पट्टा एक व्यक्ति विशेष के नाम किए जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि सार्वजनिक उपयोग की धर्मशाला से जुड़ी भूमि का पट्टा भाजपा नेता गैलेन्द्र राठौर के नाम कर दिया गया।
मामले में भाजपा के पाढर मंडल अध्यक्ष नंदन यादव और ओबीसी मोर्चा मंडल अध्यक्ष सुनील राय के नेतृत्व में ग्रामीणों ने प्रशासन से शिकायत कर पूरे मामले की जांच कराने और पट्टा निरस्त करने की मांग की है। शिकायत के बाद पटवारी, आरआई और संबंधित राजस्व अधिकारियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आ गई है।
ग्रामीणों द्वारा तहसीलदार को दिए गए शिकायत पत्र में बताया गया कि ग्राम पंचायत पाढर में इंदुबाला धर्मशाला वर्षों से संचालित है। धर्मशाला के पीछे स्थित भूमि का उपयोग भी सार्वजनिक गतिविधियों और सामाजिक कार्यक्रमों के लिए किया जाता रहा है। धर्मशाला के संचालन एवं व्यवस्था के लिए पूर्व में एक समिति भी गठित की गई थी, जिसमें गांव के अन्य लोग शामिल थे।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि हाल में सर्वे के दौरान धर्मशाला और उससे संबंधित भूमि का पट्टा एक व्यक्ति विशेष के नाम किए जाने की जानकारी सामने आई।
नियमों की अनदेखी का लगाया आरोप
शिकायत में ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि पट्टा प्रक्रिया के दौरान पंचायत सचिव, सरपंच, पटवारी अथवा अन्य संबंधित अधिकारियों-कर्मचारियों द्वारा नियमों की अनदेखी की गई हो सकती है। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच की मांग की गई है।
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन के समक्ष पांच प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें धर्मशाला एवं संबंधित भूमि के स्वामित्व और राजस्व अभिलेखों की जांच, भूमि का पट्टा किस आधार और किस नियम के तहत किया गया इसकी पड़ताल, पट्टा प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों-कर्मचारियों की भूमिका की जांच तथा नियम विरुद्ध पाए जाने पर पट्टा तत्काल निरस्त करने की मांग शामिल है। साथ ही धर्मशाला और उसकी भूमि को ग्रामीणों के सार्वजनिक उपयोग एवं हित के लिए सुरक्षित रखने की मांग की गई है।
भाजपा नेता बोले- नियम के तहत कराया आवंटन
विवाद को लेकर भाजपा नेता गैलेन्द्र राठौर ने आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने नियमों के तहत पट्टे के लिए आवेदन किया था और उसी प्रक्रिया के आधार पर उन्हें भूमि का आवंटन किया गया है। शासन के नियम के अनुसार वर्ष 2018 के पहले जिस जिस भी व्यक्ति का कब्जा है, उसे स्वामित्व योजना के तहत पट्टा प्रदान किया जाता है। मैन भी उसी नियम के तहत आवेदन दिया था और 30 वर्षों से कब्जा है।
वहीं शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यदि आवंटन नियमों के तहत हुआ है तो राजस्व रिकॉर्ड और पूरी पट्टा प्रक्रिया सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
पाढर में गरमाई राजनीति
फिलहाल धर्मशाला की जमीन के पट्टे को लेकर पाढर में राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर चर्चा तेज हो गई है। अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि भूमि का पट्टा किन नियमों और दस्तावेजों के आधार पर किया गया तथा शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है।




