Amla Sarni Election : सारणी के 36 और आमला के 18 वार्ड निर्णायक साबित होंगे

Amla Sarni elections: Elections will be held for the last time in 36 wards of Sarni and 18 wards of Amla.

भाजपा- कांग्रेस ने नगरीय क्षेत्रों में तगड़ी घेराबंदी की, नतीजे के बाद साफ होगी स्थिति

Amla Sarni Election : (बैतूल)। आमला-सारणी विधानसभा में जीत हार का फैसला इस बार कम वोटों से हो सकता है। भले ही कांग्रेस ने अंतिम समय में मनोज मालवे को अपना उम्मीदवार घोषित किया हो, लेकिन उनकी तैयारी बीते कई वर्षों से चल रही थी। दूसरी तरफ भाजपा प्रत्याशी डॉ योगेश पंडाग्रे विधायक होने के कारण पूरे समय सक्रिय रहे। इसकी वजह दोनों उम्मीदवारों को प्रचार में किसी तरह की परेशानी नहीं आई। अलबत्ता दो क्षेत्रों में फैले विधानसभा क्षेत्र के वोटों में सेंधमारी करने में कौन सफल रहा, यह आसानी नहीं कहा जा सकता है। इतना जरूर है जिले की सबसे बड़ी सारणी नगरपालिका के 36 और आमला नगरपालिका के 18 वार्ड दोनों ही पार्टी के लिए काफी मायने रखते हैं, इसलिए सबसे अधिक ध्यान रखते हुए कांग्रेस-भाजपा ने यहां वार्ड प्रभारियों की नियुक्ति की थी।

नए परिसीमन के बाद सारणी, घोड़ाडोंगरी विधानसभा से हटकर आमला में जुड़ गया। इसके बाद से लगातार यहां भाजपा परचम फहराते आ रही है। कांग्रेस के मुंह से हमेशा जीत का निवाला निकलते जा रहा है, लेकिन इस बार कांग्रेस भी आश्वास्त है कि जिस तरह ताबड़तोड़ प्रचार किया है, इससे आशातीत सफलता मिल सकती है, जबकि भाजपा भी पूरी तरह आश्वस्त है कि यहां से पार्टी जीत की चौकड़ी लगाएगी। जीत के दांवों के बीच दोनों ही पार्टी 3 दिसंबर को आने वाले चुनाव परिणाम पर नजर रखे हुए है, लेकिन जो स्थिति सामने आ रही है उसे देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि आमला और सारणी नगरीय क्षेत्र इस बार दोनों ही पार्टी के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं।

54 वार्ड निर्णायक साबित होंगे (Amla Sarni Election)

राजनैतिक जानकार बताते हैं कि दो निकायों में फैले आमला-सारणी विधानसभा क्षेत्र में भी शहरी मतदाता निर्णायक साबित होंगे। दरअसल दोनों ही निकायों के वार्डों की गिनती की जाए तो यह आंकड़ा 54 पर पहुंच जाता है। सारणी में सर्वाधिक 36 वार्डों में 35446 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। हालांकि मतदान का प्रतिशत काफी कम कहा जा सकता है। इसके विपरित आमला नगरपालिका में बंपर मतदान हुआ है। एक ही विधानसभा के निकायों में कम और अधिक मतदान होने से भाजपा-कांग्रेस के पदाधिकारियों का गणित गड़बड़ा गया है।

शहरी क्षेत्र में भाजपा ग्रामीण क्षेत्र की अपेक्षा लाड़ली बहना योजना से आशांवित है, इसलिए मतदान अपने फेवर में होने की बात कही जा रही है। जबकि कांग्रेस शहरी क्षेत्रों में नारी सम्मान योजना की वजह से अच्छा मतदान होने की बात कही रही है। कुल मिलाकर शहरी क्षेत्र के 54 वार्डों में जिसे भी बढ़त हासिल होती है, उसकी जीत की संभावना अधिक बढ़ जाएगी। यानी दोनों निकायों के 54 में से जिस पार्टी ने अधिक पर जीत हासिल की, उस पार्टी की फतह तय मानी जा सकती है।

सारणी में भाजपा, आमला में कांग्रेस का दबदबा

वैसे तो आमला विधानसभा में शहरी मतदाता भाजपा के पक्ष में मतदान करते आए हैं, लेकिन सारणी क्षेत्र मेंं कई मुद्दें उछालकर खूब सुर्खियां बटोरी गई। यह मुद्दें चुनाव में कितने असर करेंगे यह तो मतगणना के बाद ही स्पष्ट होगा, लेकिन जो अब तक की तस्वीर सामने आ रही है, उसको देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि 36 वार्ड वाले सारणी में भाजपा तो 18 वार्ड वाले आमला निकाय में कांग्रेस का दबदबा रह सकता है। कांग्रेस को आमला से प्रत्याशी मनोज मालवे के स्थानीय होने का लाभ मिलने की संभावना अधिक दिख रही है, जबकि सारणी शहरी क्षेत्र में भाजपा की स्थिति बेहतर कही जा सकती है, क्योंकि बीते नगरपािलका चुनाव में 36 वार्डों में भाजपा ने 25 पर जीत हासिल की थी। लिहाजा भाजपा का पड़ला विधानसभा चुनाव में भी भारी होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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