Politics: राजनीतिक हलचल: जनहित में नेटवर्क डाउन, बदमाशों के लिए फूल सिग्नल क्यों?? चाय की चुस्की में कैसे खुली बात के धनी नेता की पोल??? शराब कांड की सियासत में ज़खीरे से ज्यादा राजनीति क्यों हो रही गर्म???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…..

जनहित में ‘नेटवर्क डाउन, बदमाशों के लिए फुल सिग्नल!

सियासत में सक्रियता के किस्से अक्सर सुनाई देते हैं, लेकिन एक माननीय की सक्रियता इन दिनों अलग ही वजह से चर्चा में है। बताया जा रहा है कि एक थाना प्रभारी ने एक कथित बदमाश को पकड़ा तो उसे छुड़ाने के लिए माननीय के फोन दौड़ने लगे। चर्चा यह भी है कि फोन का असर हुआ और मामला जल्द ही ठंडा पड़ गया।

अब लोग भी सवाल पूछने लगे हैं कि जनता के काम की बारी आए तो फाइल घूमती रहती है, फोन व्यस्त रहता है और मामला विधानसभा क्षेत्र का नहीं बताकर जिम्मेदारी आगे सरका दी जाती है, लेकिन बदमाश की बारी आई तो न विधानसभा की सीमा आड़े आई, न अधिकार क्षेत्र!

लोगों की चुटकी है कि जनहित में माननीय का नेटवर्क कुछ कमजोर है, लेकिन ‘विशेष हित में सिग्नल फुल रहता है। आखिर यह कैसी जनसेवा है, जिसमें जनता इंतजार करे और बदमाशों के लिए ‘तत्काल सेवा उपलब्ध हो जाए?

चाय की चुस्की में खुली ‘बात के धनी की पोल

राजनीति में कुर्सी छोटी हो या बड़ी, उसके जाने के बाद जुबान अक्सर लंबी हो जाती है। इन दिनों विपक्षी पार्टी के एक हटाए गए छात्रनेता की चाय की दुकान पर हुई बातचीत इसी का ताजा उदाहरण है। साहब ने चाय की चुस्की के साथ अपनी ही पार्टी के जिला प्रमुख की ऐसी ‘खूबियांÓ गिनाईं कि सुनने वाले भी मुस्कुराए बिना नहीं रह सके।

छात्रनेता का कहना था कि जिला प्रमुख बात के धनी जरूर हैं, लेकिन बात निभाने के मामले में हिसाब कुछ अलग है। उनका आरोप है कि पहले उन्हें पद से हटवाया गया और अब वही उन्हें समझा रहे हैं कि उनकी जगह किसी दूसरे को उन्होंने बनवाया ही नहीं। बस फिर क्या था, चाय की प्याली के साथ तंज भी छलक पड़ा कि ‘हमें हटवाया किसने, यह भी पता है और किसे बैठाया गया, यह भी।

आखिर हम भी अनाज ही खाते हैं। अब पार्टी के भीतर सवाल यही घूम रहा है कि मामला पद का है या फिर ‘बात और ‘बात रखने का? चाय की दुकान पर हुई यह बातचीत फिलहाल संगठन की अंदरूनी सियासत में खूब चटखारे ले रही है।

शराब कांड की सियासत में जखीरे से ज्यादा गरम हुई राजनीति

इन दिनों एक नगर परिषद शराब की चर्चाओं को लेकर सोशल मीडिया से लेकर सियासी गलियारों तक खूब सुर्खियां बटोर रही है। मामला आरोप-प्रत्यारोप से आगे बढ़कर अब राजनीति के उस मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है, जहां हर चुस्की के साथ एक नया सवाल सामने आ रहा है। पिछले दिनों पुराने शासकीय कार्यालय से शराब का जखीरा पकड़े जाने के बाद चर्चाओं ने और जोर पकड़ लिया।

कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह के दावे और आरोप तैरने लगे। इसी बीच क्षेत्र के एक दबंग नेता का नाम कथित शराब कारोबार से जोड़कर चर्चा में आने से सियासी तापमान भी बढ़ गया है। दिलचस्प बात यह है कि मामला अब सिर्फ शराब की बोतलों तक सीमित नहीं रह गया। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि संगठन स्तर पर इस प्रकरण को गंभीरता से लिया गया तो कार्रवाई की गाज भी गिर सकती है।

हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में है।फिलहाल स्थिति कुछ ऐसी है कि शराब का जखीरा तो पकड़ा गया, लेकिन उससे उठी राजनीतिक ‘भभक को संभालना संगठन के लिए चुनौती बनता जा रहा है। अब देखना यह है कि बोतलें जब्त होने के बाद क्या सियासत में भी कोई ‘ढक्कन खुलता है या मामला वक्त के साथ ठंडा पड़ जाता है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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