Betul Today News- कोतवाली पुलिस की झूठी कहानी बेनकाब: गौवंश जब्ती का बनाया फर्जी प्रपंच

प्रेस नोट में गढ़ी गई नाटकीय पटकथा, मीडिया को किया जा रहा गुमराह

Betul Today News : बैतूल। जिले में एक ओर पुलिस अधीक्षक जनसंपर्क और पारदर्शिता की नीति पर जोर दे रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर उनके मातहत अधिकारी इन निर्देशों को ठेंगा दिखाते नजर आ रहे हैं। गौठाना क्षेत्र में गुरुवार सुबह की एक घटना ने कोतवाली पुलिस की कागजी बहादुरी की पोल खोल दी। घटना के अनुसार गुरुवार सुबह स्थानीय लोगों ने गौठाना के जंगल क्षेत्र में गौवंश से भरी एक पिकअप को लावारिस हालत में देखा।

इस पर उन्होंने पुलिस और मीडिया को सूचना दी। लगभग सुबह 8.30 बजे कोतवाली पुलिस के एक आरक्षक व सिपाही मौके पर पहुंचे, लेकिन हैरानी तब हुई, जब शाम को पुलिस द्वारा जारी प्रेस नोट में पूरी कहानी ही बदल दी गई। प्रेस नोट में दावा किया गया कि पुलिस को रात में ही मुखबिर से सूचना मिली थी, पुलिस ने नाकाबंदी भी की, पर आरोपी अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। आखिर में पुलिस ने गौवंश तस्करी रोकने की बड़ी सफलता का दावा कर डाला। हकीकत यह है कि सुबह 6 बजे तक कोतवाली पुलिस को इस मामले की जानकारी तक नहीं थी। स्थानीय नागरिकों की तत्परता के बाद ही पुलिस हरकत में आई, लेकिन बाद में मीडिया को गुमराह करने के लिए झूठे दावे कर दिए गए।

रात में ही नाकाबन्दी की तो, सुबह मवेशियों को मरता क्यों छोड़ा?

इस मामले के सामने आने के बाद यह साफ हो गया है कि पुलिस प्रेस नोट के जरिए मीडिया को परोसी जाने वाली खबरें भरोसे के लायक नहीं है, क्योंकि एक खबर ने पूरे महकमे की उपलब्धियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अपनी उपलब्धियों का झूठा बखान करने वाली कोतवाली पुलिस कैसे खुद अपने झूठ में फंस गई लोगो को यह जानना भी जरूरी है। पुलिस ने अपने प्रेस नोट में लिखा कि, उन्हें रात में ही गौवंश तस्करी किये जाने की सूचना मुखबिर से मिल चुकी थी। इसके बाद यहां नाका बंदी भी की गई। गौवंश तस्कर जब यहाँ पहुंचे और पुलिस टीम को देखकर वाहन तेजी से भगा लिया, पुलिस ने पीछा कर वाहन को पकड़ भी लिया लेकिन वाहन में बैठे आरोपी फरार हो गए। सवाल यह उठ रहा है कि, जब रात्रि में वाहन कब्जे में ले लिया गया था तो कार्यवाही रात्रि में ही क्यों नहीं कि गई। वाहन में बेरहमी से भरे मवेशियों को रात में ही वाहन से मुक्त क्यों नहीं कराया गया।

सुबह होने तक एक गौवंशो की मौत हो गई , क्या इस मौत की जिम्मेदार कोतवाली पुलिस नहीं है। गौवंशो को सुबह होने तक मरने के लिए क्यों छोड़ दिया गया। ये ऐसे सवाल हैं जिससे कोतवाली पुलिस खुद कटघरे में खड़ी हो रही है। कहा तो यह भी जा रहा है कि अधिकांश मामलों में इसी तरह लीपा पोती कर मीडिया सहित आम नागरिकों को गुमराह किया जाना आम हो चुका है। झूठी कहानी गढ़ने के इस मामले से पुलिस पीआरओ ने बताया कि जिले के थानों से जो जानकारी उन्हें दी जाती है उसी आधार पर प्रेस नोट बनाकर प्रेस को रिलीज किये जाते हैं। मतलब साफ है कि पीआरओ को भी झूठी जानकारी देकर गुमराह किया जा रहा है। एसपी का कहना है कि, उनकी जानकारी में पहली बार यह मामला आया है। अधिकारीयों को कार्यप्रणाली सुधारने के लिए निर्देशित किया जाएगा।

इनका कहना….
मेरे संज्ञान में यह मामला आया है, अधिकारीयों से चर्चा कर कार्य प्रणाली सुधारने के लिए निर्देशित करेंगे।

निश्चल एन झारिया, एसपी बैतूल

थाना क्षेत्रों से जो जानकारी मिलती है उसी के आधार पर प्रेस नोट बनाकर प्रेस को रिलीज किया जाता है।

आबिद अंसारी , पीआरओ, बैतूल पुलिस

गुरुवार पेशी पर न्यायालय में व्यस्त थे, प्रेस नोट की जानकार किसने दी कैसे दी इसकी जानकारी लेंगे, कार्यप्रणालि में सुधार करेंगे।

रविकांत डेहरिया, टीआई कोतवाली बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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