Betul Hospital News : ईएनटी डॉक्टर का तबादला, नए डॉक्टर की आमद नहीं
जिला अस्पताल में एक बार फिर मरीज परेशान, नई व्यवस्था होने तक निजी अस्पतालों का लेंगे सहारा

Betul Hospital News: बैतूल। जिला अस्पताल के डॉक्टर दिन-प्रतिदिन कम होते जा रहे है नए डॉक्टरों की आमद नहीं हो रही। स्टॉफ की कमी से जिला अस्पताल जुझते जा रहा है। कम स्टॉफ में व्यवस्था बनाना मुश्किल होते जा रहा है। डॉक्टरों की कमी के कारण जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को परेशान होना पड़ता है।
हाल ही में जिला अस्पताल की ईएनटी डॉ हर्षिता शर्मा का भोपाल तबादला हो गया। इनके स्थान पर नए डॉक्टर की अभी तक कोई आमद नहीं हुई है। ओपीडी में मरीज नाक, कान, गले का ईलाज कराने पहुंचते है, लेकिन उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। डॉक्टरों और अन्य स्टॉप की कमी जिला अस्पताल में खलने लगी है। डॉक्टरों की कमी के कारण अस्पताल की व्यवस्था पटरी पर लाने के लिए अधिकारियों को भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक जिला अस्पताल बैतूल में डॉ.हर्षिता ईएनटी डॉक्टर थी, जिसका हाल ही में भोपाल तबादला हो गया। डॉक्टर के तबादले के बाद नए ईएनटी डॉक्टर की पदस्थापना नहीं हुई है। ओपीडी में ईएनटी कक्ष डॉक्टर नहीं होने के कारण बंद है। प्रतिदिन नाक, कान, गले का उपचार कराने के लिए जिला अस्पताल में मरीज पहुंच रहे है, लेकिन उन्हें खाली हाथ वापस लौटना पड़ रहा है।
अस्पताल से डॉक्टर कम हो रहे है नए डॉक्टरों के आने का कोई ठिकाना नहीं है। यहीं हाल रहे तो अस्पताल की व्यवस्था संभालना बहुत मुश्किल हो जाएगा।
डॉ. स्वीटी सेन मातृत्व अवकाश पर
जिला अस्पताल में एक और ईएनटी डॉ. स्वीटी सेन है। यह डॉक्टर 6 महीने के मातृत्व अवकाश पर है। इनके अवकाश पर जाने के कारण अब जिला अस्पताल में दूसरा कोई भी ईएनटी डॉक्टर नहीं है। जानकारी के मुताबिक डॉ. सेन अनुबंध पर है।
उनका अनुबंध छुट्टी के बाद खत्म भी होने वाला है। ऐसे में जिला अस्पताल में कोई भी स्थाई डॉक्टर नहीं है। नए डॉक्टर नहीं आने की स्थिति में उपचार करवाने वाले लोगों की मुश्किले और बड़ सकती है। उल्लेखनीय है कि निजी अस्पतालों में भी कोई ईएनटी स्पेशलिस्ट डॉक्टर नहीं है। उपचार के लिए मरीजों को नागपुर-भोपाल तक जाना पड़ रहा है।
इनका कहना…
ईएनटी डॉक्टर का हाल ही में तबादला हो गया है एक डॉक्टर मातृत्व अवकाश पर है, अब जिला अस्पताल में कोई ईएनटी डॉक्टर नहीं है। डॉक्टरों के नहीं होने को लेकर स्वास्थ्य विभाग को पत्राचार करेंगे।
डॉ. जगदीश घोरे, सिविल सर्जन, जिला अस्पताल बैतूल




