Scanty Rainfall in Betul: अल्प बारिश का अलार्म बजा, प्रशासन की नहीं टूटी नींद

सामान्य से 401.7 मिमी पीछे बैतूल, 682.2 मिमी बारिश के बाद भी भविष्य के जल संकट पर मंथन नहीं
Scanty Rainfall in Betul: बैतूल। यह बात बैतूल के लिए सौ टका सही साबित होती दिख रही है कि यहां प्रशासन अक्सर प्यास लगने पर कुआं खोदता है। अल्प बारिश की आहट कई सप्ताह से दिखाई दे रही है, लेकिन भविष्य के जल संकट और सिंचाई की संभावित चुनौती को लेकर अब तक जिला स्तर पर कोई ठोस रणनीतिक मंथन नजर नहीं आ रहा है।
जिले में मानसून सीजन के दौरान अब तक महज 682.2 मिमी बारिश दर्ज हुई है, जबकि सामान्य औसत 1083.9 मिमी है। यानी बैतूल सामान्य बारिश से 401.7 मिमी पीछे चल रहा है। पिछले साल इसी अवधि में 861.8 मिमी बारिश हो चुकी थी। इस लिहाज से भी जिला इस बार 179.6 मिमी कम बारिश झेल रहा है।
14 सितंबर की सुबह 8 बजे तक की तहसीलवार बारिश के आंकड़े हालात की गंभीरता को और स्पष्ट करते हैं। जिले में बीते 24 घंटे में औसत 11 मिमी बारिश हुई, लेकिन इससे सीजन का घाटा पूरा होने की उम्मीद नजर नहीं आ रही है।
खासकर आमला में अब तक सिर्फ 537 मिमी, आठनेर में 396.2 मिमी और बैतूल में 594 मिमी बारिश दर्ज हुई है। इसके उलट चिचोली में 887 मिमी और घोड़ाडोंगरी में 841.9 मिमी बारिश हुई है। यानी जिले के भीतर भी बारिश का वितरण बेहद असमान रहा है।
सामान्य बारिश से 400 मिमी से ज्यादा पीछे
बैतूल की सामान्य औसत बारिश 1083.9 मिमी मानी जाती है। मानसून का बड़ा हिस्सा बीतने के बाद भी आंकड़ा 682.2 मिमी पर अटका हुआ है। अब सितंबर में शेष अवधि में करीब 401.7 मिमी बारिश होना जरूरी है, तभी सामान्य औसत का आंकड़ा छू सकेगा।
मौसम का मिजाज देखते हुए इतनी बारिश होना निश्चित नहीं माना जा सकता। यही वजह है कि अभी से जलस्रोतों, पेयजल व्यवस्था और सिंचाई की उपलब्धता को लेकर तैयारी शुरू करने की जरूरत है।
10 में से कई केंद्रों पर बारिश का आंकड़ा चिंताजनक
वर्षामापी केंद्र
अब तक बारिश
बैतूल
594.0 मिमी
घोड़ाडोंगरी
841.9 मिमी
चिचोली
887.0 मिमी
शाहपुर
692.7 मिमी
मुलताई
716.8 मिमी
प्रभातपट्टन
644.3 मिमी
आमला
537.0 मिमी
भैंसदेही
679.0 मिमी
आठनेर
396.2 मिमी
भीमपुर
834.2 मिमी
जिले का औसत
682.2 मिमी
डैम भी पूरी क्षमता से नहीं भर पाए
अल्प बारिश का सीधा असर जिले के जलाशयों पर भी दिखाई दे रहा है। जिले के प्रमुख डैम अभी पूरी क्षमता से नहीं भर पाए हैं। करीब 60 प्रतिशत के आसपास जलभराव की स्थिति बनी रहने से आने वाले समय में पेयजल के साथ सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता चुनौती बन सकती है। यदि बारिश का दौर कमजोर रहा तो इसका असर रबी सीजन की सिंचाई पर भी पड़ने की आशंका है।
पड़ोसी जिले रणनीति बनाने में जुटे, बैतूल में इंतजार
अल्प बारिश की स्थिति को देखते हुए पड़ोसी नर्मदापुरम और छिंदवाड़ा जिलों में भविष्य की जल जरूरतों को लेकर मंथन शुरू होने की जानकारी सामने आ रही है। जल संरक्षण, पेयजल व्यवस्था और आगामी सीजन की तैयारियों को लेकर पीएचई, जल निगम सहित सामाजिक संगठनों और एनजीओ के साथ बैठकें किए जाने की बात कही जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि बैतूल में प्रशासन कब जागेगा?
कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे इन दिनों गांव और शहर में पहुंचकर स्थानीय समस्याओं के निराकरण के निर्देश दे रहे हैं, लेकिन बारिश के आंकड़ों की यह तस्वीर भविष्य की बड़ी चुनौती का संकेत दे रही है। जरूरत इस बात की है कि बारिश पूरी तरह समाप्त होने का इंतजार करने के बजाय अभी से जलस्रोतों की स्थिति, पेयजल योजनाओं, डैम में उपलब्ध पानी और रबी फसलों के लिए सिंचाई की संभावनाओं का आकलन किया जाए। वरना बारिश खत्म होने के बाद बैठकें और कागजी तैयारियां शुरू होंगी और तब तक हालात हाथ से निकल चुके होंगे।
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