Betul Liquor prices : एक दिन में शराब के दाम 100 से 400 रुपए तक बढ़े, फिर लौटे पुराने भाव!

बड़ा सवाल-क्या एमएसपी और एमआरपी के बीच कीमतों का भी खेल?

Betul Liquor prices बैतूल। त्योहार के मौके पर शराब की कीमतों में अचानक हुई भारी बढ़ोतरी ने अब कई सवाल खड़े कर दिए हैं। पोला और कर पर्व के अवसर पर कुछ शराब ब्रांडों की कीमतों में एक ही दिन में 100 से लेकर 400 रुपए तक की बढ़ोतरी की शिकायतें सामने आई।

हैरानी की बात यह है कि दो दिन बाद कई ब्रांड फिर पुराने दामों पर बिकने लगे। आखिर त्योहार के दिन अचानक कीमतें क्यों बढ़ीं और फिर कम कैसे हो गईं? यही सवाल अब सुराप्रेमियों के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था पर भी उठ रहे हैं।

चर्चा यह भी है कि एमआरपी और एमएसपी की कीमतों के अंतर समझाकर अपना उल्लू सीधा किया जा रहा है। वहीं आबकारी अमला अवैध शराब की धरपकड़ में जुटा रहा तो ठेकेदारो ने भी मौके का फायदा उठाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी।

आबकारी अधिकारियों का कहना है कि शराब ठेकेदार निर्धारित एमएसपी और एमआरपी के बीच कीमत तय कर शराब बेच सकता है। यानी एमएसपी से कम और एमआरपी से अधिक कीमत वसूलना नियमों के विरुद्ध है। लेकिन इसी नियम की आड़ में मनमानी की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

मसलन, एक ब्रांड की एमआरपी 718 रुपए और एमएसपी 625 रुपए बताई जा रही है। नियम के अनुसार यह ब्रांड 625 से 718 रुपए के बीच बेचा जा सकता है, लेकिन दुकानों में इसे 700 रुपए में बेचा गया। सवाल यह है कि ठेकेदार ने पूरे 718 रुपए लेने के बजाय 18 रुपए क्यों छोड़े? क्या यह महज व्यापारिक रणनीति है या कीमतों के निर्धारण के पीछे कोई ऐसा खेल है, जिसकी जांच जरूरी है?

त्योहार आया तो बढ़े दाम, फिर कैसे हुए कम?

सबसे बड़ा सवाल त्योहार के दौरान अचानक बढ़े दामों को लेकर है। यदि एमएसपी और एमआरपी के बीच कीमत तय करने की छूट है तो एक ही दिन में 100 से 400 रुपए तक का अंतर कैसे आ गया? और त्योहार गुजरते ही कीमतें फिर पुराने स्वरूप में क्यों लौट आईं? इससे मौके की नजाकत देखकर मनमाना लाभ कमाने की आशंका गहरा रही है।

सेल्समैनों की दादागिरी से भी परेशान सुराप्रेमी

इन दो दिनों में शराब दुकानों पर विवाद और सेल्समैनों की अभद्रता की शिकायतें भी सामने आईं। मजबूरी और परंपरा के चलते लोगों ने मांगी गई कीमत चुकाई, लेकिन सवाल यह है कि क्या शराब खरीदने वाला व्यक्ति सम्मानजनक व्यवहार का हकदार नहीं है? अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई में जुटे आबकारी विभाग को अब वैध दुकानों पर कीमतों की जांच और सेल्समैनों की मनमानी पर भी नजर डालनी होगी। त्योहार के दिन बढ़े दाम और बाद में कम हुई कीमतों की निष्पक्ष जांच ही इस पूरे खेल से पर्दा उठा सकती है।

इनका कहना…
ठेकेदार शराब एमआरपी और एमएसपी के बीच किसी भी कीमत पर बेचने के लिए स्वतंत्र है। वह घाटे में व्यापार कर रहा या मुनाफे में यह उन पर निर्भर करता है।
अंशुमान सिंह चढ़ार, जिला आबकारी अधिकारी, बैतूल

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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