PM Awas List Controversy: पीएम आवास सूची विवाद में मचा हड़कंप, अब जांच टीम पर टिकी नजर

60 के बाद 14 हितग्राहियों की दूसरी सूची भी सवालों के घेरे में, फर्जी पट्टों के आरोपों ने बढ़ाई हलचल
PM Awas List Controversy: शाहपुर । गरीब, बेघर और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना संचालित की जा रही है। योजना से जरूरतमंद परिवारों को छत मिली है, लेकिन अपात्र लोगों द्वारा गलत जानकारी या कथित फर्जी दस्तावेजों के जरिए लाभ लेने के आरोप समय-समय पर सामने आते रहे हैं।
शाहपुर नगर परिषद में वर्ष 2026 की प्रधानमंत्री आवास योजना की सूची को लेकर उठे सवालों के बाद अब मामला जांच की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। नगर परिषद शाहपुर में वर्ष 2026 के लिए पहले करीब 60 हितग्राहियों की सूची जारी की गई थी।
इसके बाद 14 हितग्राहियों की दूसरी सूची भी सामने आई। दोनों सूचियों में कुछ नामों को लेकर नगर परिषद के पार्षदों के साथ ही स्थानीय नागरिकों ने भी आपत्तियां जताई हैं। आरोप लगाए जा रहे हैं कि कुछ ऐसे परिवारों के नाम भी सूची में शामिल हैं, जिनके पास पहले से पक्के मकान मौजूद हैं।
मामले में तत्कालीन ग्राम पंचायत के उपसरपंच एवं भाजपा नेता अमित महतो ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत के कथित फर्जी पट्टों का इस्तेमाल अब किया जा रहा है और कुछ स्थानों पर ऐसे पट्टों को कथित रूप से बेचने के आरोप हैं। उन्होंने स्टाफ क्वार्टर और पतौवापुरा क्षेत्र में फर्जी पट्टे बनाए जाने और बेचे जाने के आरोप लगाए हैं।
गौरतलब है कि स्टाफ क्वार्टर नगर परिषद अध्यक्ष रोहित विक्की नायक का वार्ड है, जबकि पतौवापुरा नगर परिषद उपाध्यक्ष पम्मी राठौर का वार्ड है। इन दोनों क्षेत्रों का नाम आरोपों में आने के बाद स्थानीय राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र जांच और पुष्टि होना अभी बाकी है।
सोशल मीडिया पर भी उठ रहे सवाल
मामले को लेकर स्थानीय व्यवसायी दीपक सराठे ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि जरूरत पड़ने पर वे संबंधित मामलों के सबूत उपलब्ध करा सकते हैं। उन्होंने पक्के मकानों के बावजूद आवास योजना में नाम होने का दावा भी किया है। सोशल मीडिया पर सामने आ रही ऐसी प्रतिक्रियाओं से मामला और चर्चा में आ गया है।
बताया गया है कि मामले की शिकायत बैतूल कलेक्टर से भी की गई थी। शिकायत के बाद कलेक्टर ने शाहपुर एसडीएम प्रपंच आर. को टीम गठित कर मामले की जांच करने के निर्देश दिए हैं।
अब निगाहें जांच टीम की कार्रवाई पर टिकी हैं। जांच में यह स्पष्ट होगा कि सूची में शामिल हितग्राही वास्तव में योजना की पात्रता पूरी करते हैं या नहीं, संबंधित पट्टे वैध हैं या नहीं और यदि दस्तावेजों में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो उसके लिए जिम्मेदार कौन है। फिलहाल मामला आरोपों और जांच के बीच है। प्रशासनिक जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर साफ हो सकेगी।
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