Betul News: 13 करोड़ 21 लाख के गबन का आडिट में उल्लेख तक नहीं, घोटाले के पीछे कितने किरदार?
Betul News: There is no mention of embezzlement of 13 crore 21 lakh in the audit, how many characters are behind the scam?

जनपद सीईओ और ऑडिटरों की भूमिका भी जांच के दायरे में, बढ़ सकती है घोटालेबाजों की संख्या
Betul News: बैतूल। भीमपुर और चिचोली जनपद में स्वच्छ भारत मिशन में कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी और जिला पंचायत अक्षत जैन की सक्रियता का ही नतीजा है कि समय से पहले करोड़ों की रकम के हेरफेर का मामला सामने आ गया। पूरा स्कैम सुनियोजित तरीके से जिस तरह अंजाम दिया जा रहा था उससे यह तय है कि 13 करोड़ 21 लाख रुपए के गबन के मामले में शामिल लोगों की चेन काफी लंबी है, क्योंकि अभी तक सामने आई जानकारी में मुख्य सूत्रधार के रूप में ब्लाक कोऑर्डिनेटर राजेन्द्र परिहार, चिचोली कम्प्यूटर ऑपरेटर सुकेश कहार, और भीमपुर आपरेटर सुमित सोनी की भूमिका ही सामने आई है।
सवाल यह खड़ा हो रहा है कि बिना अधिकारियों की मिली भगत से यह कर्मचारी आखिर कैसे इतनी बड़ी रकम का हेरफेर कर सकते हैं? पिछले तीन साल से करोड़ों का हेरफेर होता रहा और अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लग पाई। जनपद के आडिट रिपोर्ट तक में इस घोटाले का कोई उल्लेख न होना यह साबित कर रहा है कि घोटाले में कहीं न कहीं बड़ी मछलियां भी शामिल है, जिन्होंने करोड़ो रुपये निगल लिए। अब जिम्मेदारी कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी और जिपं सीईओ अक्षत जैन पर है कि उनकी जांच में कितने किरदार और सामने आते हैं। वैसे दावा किया जा रहा है कि इतने बड़े मामले में जनपद सीईओ और आडिटर के हस्ताक्षर के बिना मामला आगे बढ़ने का सवाल ही नहीं उठता। दोनों ही अधिकारियों की भूमिका इस मामले में संदिग्ध मानी जा रही है।
आडिट रिपोर्ट में घोटाले को लेकर आपत्ति तक दर्ज नहीं
इस पूरे मामले में इन जनपदों के आडिट करने वाले ऑडिटरों की भूमिका भी संदेह के घेरे में देखी जा रही है, क्योंकि पिछले तीन वर्षों के अन्तराल में जनपद सदस्य सहित 26 फर्मों के खातों में करोड़ों रुपयों का ट्रांजेक्शन किया गया है। ऑडिटरों ने आडिट भी किया, लेकिन आडिट रिपोर्ट में उल्लेख या आपत्ति का न होना , ऑडिटरों की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर रहा है। इस सम्बंध में जिप सीईओ अक्षत जैन ने चर्चा में बताया है कि मामले में आडिट रिपोर्ट्स के भी परीक्षण किए गए , लेकिन घोटाले को लेकर कोई बात सामने नहीं आई, जबकि तकनीकी रूप से इसका उल्लेख होना चाहिए था। हालांकि अभी मामले की जांच की जा रही है। प्रत्येक तथ्य की सूक्ष्मता से जांच कर रहे है। जांच में जो भी तथ्य साबित होंगे नियमानुसार कार्यवाही की जाएगी।
जनपद सीईओ की भूमिका संदेह के दायरे में
भीमपुर और चिचोली जनपदों में अभी तक केंद्र सरकार की महत्वपूर्ण स्वच्छ भारत मिशन योजना में करोड़ों का हेरफेर सामने आ चुका है। जांच में विभिन्न फर्मों को किये गए भुगतान को लेकर बड़े अधिकारियों की भूमिका भी सामने आ सकती है, क्योंकि भुगतान के लिए डीएससी सीईओ जनपद की ही लगती है । ओटीपी जब तक सीईओ ओके नहीं करता भुगतान नहीं हो सकता ।
बताया जा रहा है कि चिचोली और भीमपुर जनपद में सीओ अभिषेक वर्मा के कार्य काल में ही सबसे ज्यादा भुगतान हुआ है। वहीं जनपद भीमपुर में पूर्व में पदस्थ महिला सीईओ कंचन वास्केल के कार्यकाल की भी जांच आवश्यक है, क्योंकि विवादों से इनका भी पुराना नाता रहा है। जानकारी मिली है कि पूर्व में वह छिंदवाड़ा में पदस्थ थी तब वहां भी संबल योजना में जीवित व्यक्ति को मृत बताकर लाखों का भुगतान कर दिया गया था। इस मामले में कंचन वास्केल पर एफआईआर भी दर्ज हुई हुई थी। अभी वो हाईकोर्ट जबलपुर से जमानत पर हैं।
पूर्व के अधिकारी भी कटघरे में आए
सूत्र बताते हैं कि जब से घोटाला शुरू किया गया इस बीच भीमपुर और चिचोली जनपद में जितने भी सीईओ पदस्थ रहे सभी दोषी हो सकते है। इसके लिए साफ सुथरी जांच जरूरी है। सूत्र बताते हैं कि जांच में यदि इन सीओ की भूमिका सामने आती है तो सभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज होना चाहिए क्योंकि यह जांच को प्रभावित कर सकते हैं। फिलहाल मामला पूरी तरह गर्म है, देखना है कि घोटाले में और कितने किरदारों के नामों का पर्दाफाश होता है।
इनका कहना……
यह मामला काफी गंभीर है। घोटाले की विधिवत जांच होना चाहिए। जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्यवाही की जानी चाहिए।
सुधाकर पवार, जिला अध्यक्ष, भाजपा बैतूल
आडिट रिपोर्ट्स के परीक्षण किया गया। रिपोर्ट्स में इस मामले का उल्लेख नहीं है, अभी जांच चल रही है। जो भी तथ्य सामने आएंगे वैसी कार्यवाही की जाएगी।
अक्षत जैन, जिला पंचायत सीईओ बैतूल




