Betul News: किस्तों से प्लाट की स्कीम के झांसे में पड़े लोग

Betul News: People fall prey to installment plot scheme

अब शिकायतों के बाद प्रशासन को कालोनियों में विकास कार्य कराने के लिए चलाना पड़ा चाबूक तो कालोनाइजरों में हड़कंप

Betul News: बैतूल। यदि आप प्लाट लेना चाह रहे हैं तो हमारी साइट पर एक बार आकर अवलोकन जरूर कर लें, कहीं ऐसा न हो आप दूसरी जगह प्लाट लेकर अपने आप को ठगा न महसूस करें। हमारे यहां किस्तों में आसानी से प्लाट दिए जा रहे हैं। यह जुमला एक नहीं बल्कि लेकर कालोनाइजर की ठगी का शिकार हुए कई लोगों को पर सटीक बैठता है। ऐसे लोग अब अपने आप को ठगने के बाद अधिकारियों का सहारा ले रहे हैं। कलेक्टर ने सख्ती दिखाते हुए अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि अवैध कालोनियों के प्रकरणों की जांच कर उन तक पहुंचाए। कालोनाइजर की ठगी का शिकार हुए लोगों को उम्मीद है कि अधिकारी और कलेक्टर की कार्रवाई से प्लाट के नाम किए गए छलावे से उन लोगों को राहत मिलेगी।

जिले में पिछले दस वर्षों से जिस तरह शहर से लेकर तहसील मुख्यालय के आसपास जिस तरह खेतों की जमीन पर प्लाट कट गए हैं, यह किसी आश्चर्य से कम नहीं है। किसानों ने भी मोटी रकम के लालच में उपयोगी कृषि जमीन को कालोनाइजरों के हवाले कर दिया है। यह सिलसिला दस वर्ष पहले शुरू हुआ तो अब हालात यह है कि मुख्यालय से आगे तक कई किमी कॉलोनियों की भरमार दिख रही है, अलबत्ता इनमें सुविधाएं न के बराबर है। सब्जबाग दिखाकर लोगों को जिला मुख्यालय से सटे पहुंच मार्गों पर कालोनी काटकर बेच दिए गए।

वर्षों हो गए, लेकिन दर्जनों कालोनीवासियों को बिजली, सड़क के अलावा पार्क, मंदिर की तक की सुविधाएं नहीं मिली। रही बात डायवर्सन की तो इसे भी ठेंगा दिखाते हुए कालोनाइजरों ने नियमों की अनदेखी कर प्लाटों को बेच डाला है। इन कालोनाइजरों में अधिकांश रसूखदार और राजनीति से जुड़े बताए जा रहे हैं। अकेले बैतूल शहर की रिपोर्ट में ऐसे 22 कालोनाइजरों का खुलासा हुआ है। जिले भर से यदि कॉलोनियों का लेखा-जोखा सामने आया तो इनका आंकड़ा सैकड़ों में जा सकता है।

आकर्षक स्कीम से ठगे गए प्लाट खरीदने वाले

सांझवीर टाईम्स की पड़ताल में तथ्य सामने आए हैं कि छोटी नौकरी करने वाले और जिला मुख्यालय पर अदद प्लाट लेकर सपनों का घर बनाने का सोचने वाले मध्यमवर्गीय लोगों ने कालोनाइजरों द्वारा दिखाए गए सब्जबाग के आधार पर प्लाट ले लिए। अब वे अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। दरअसल अखबारों, सोशल मीडिया और फ्लैक्स पर कालोनाइजरों ने अपनी कालोनी में सुख सुविधाओं के लिए बढ़चढ़कर प्रचार किया।

लोग इसी के झांसे में आए और लोगों ने आसान किस्तों में प्लाट तो ले लिया, लेकिन किस्त की रकम तो पूरी हो गई पर आज तक सुविधाएं नहीं मिल पाई है। खेड़ी रोड, आठनेर रोड, बैतूलबाजार रोड, गौठाना, हमलापुर, खंजनपुर, बडोरा रोड, दादावाड़ी मार्ग ऐसी जगह है जहां पर लोगों को पहले किस्तों में भी लोगों को प्लाट दिए गए। अधिकांश कालोनियों की स्थिति यह है कि यहां लोगों को सुविधाएं मुहैया नहीं कराई गई। कालोनाइजरों के सब्जबाग में आकर लोगों ने स्कीम में प्लाट तो ले लिए, लेकिन अब सुविधाएं नहीं मिलने से अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं।

शिकायत पहुंची तो अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी, जांच रफ्तार धीमी

महेनत और पसीने की कमाई कालोनाइजरों के हवाले करने के बाद सुविधाएं नहीं मिलने से ठगे लोग पिछले 8-10 वर्षों में सैकड़ों शिकायतें तहसीलदार से लेकर एसडीएम और कलेक्टर तक की है। बैतूल में पूर्व कलेक्टर अमनबीर सिंह बैंस के कार्यकाल में अवैध कालोनियों पर शिंकजा कसते हुए सुविधा न दिलाने पर 10 कालोनाइजरों पर एफआईआर भी हुई। अब नए कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी की सख्ती के बाद उन्हें समस्या से निजात मिलेगी।

हालांकि कई शिकायतें लंबित होने के कारण अधिकारी भी परेशान है। दअरसल अवैध कालोनी के कई मामले में सीएम हेल्पलाइन पर जाने के कारण उनकी परेशानी भी बढ़ गई है। हालंाकि कलेक्टर भी ऐसी शिकायत हेल्पलाइन पर न जाने की
अधीनस्थों को निर्देश दिए हैं।

इनका कहना…

अवैध कालोनियों को लेकर अभी जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, जितनी शिकायतें आ रही हैं, सभी कालोनाइजरों पर कार्रवाई की जाएगी।

नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी, कलेक्टर बैतूल।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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