Betul Station News : स्टेशन पर खड़ी पैसेंजर, फिर भी नहीं खुले दरवाजे
महिलाओं-बच्चों की बढ़ी परेशानी, आपातकालीन खिड़की से कोच में घुसे यात्री

बैतूल। रक्षाबंधन के ठीक एक दिन पहले बैतूल रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को उस समय भारी परेशानी का सामना करना पड़ा, जब छिंदवाड़ा जाने वाली पैसेंजर ट्रेन प्लेटफार्म नंबर-1 पर आकर खड़ी हो गई, लेकिन उसके कोचों के दरवाजे नहीं खुले। ट्रेन के स्टेशन पर पहुंचने के बावजूद सभी कोच अंदर से बंद होने के कारण प्लेटफार्म पर मौजूद यात्रियों में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। खासकर महिलाओं, बच्चों और बुजुर्ग यात्रियों को काफी देर तक परेशान होना पड़ा। कुछ यात्री आपातकालीन खिड़की खोलकर अंदर घुसे और दरवाजे खोले तब जाकर यात्रियों ने कोच में प्रवेश किया।
शाम करीब 4 बजे हजारों यात्री ट्रेन में सवार होने के लिए प्लेटफार्म पर पहुंचे थे। ट्रेन को प्लेटफार्म पर लगाने से पहले कोचों के दरवाजे खोलने की व्यवस्था नहीं की गई। यात्रियों ने दरवाजे खोलने के लिए रेलवे स्टाफ का इंतजार किया, लेकिन मौके पर तत्काल कोई कर्मचारी नहीं पहुंचा। बढ़ती भीड़ और ट्रेन छूटने की चिंता के बीच यात्रियों में नाराजगी बढ़ने लगी और मौके पर हंगामे जैसी स्थिति निर्मित हो गई।
आपातकालीन खिड़की से ट्रेन में जाकर यात्रियों को खुद खोलने पड़े दरवाजे
काफी इंतजार के बाद कुछ यात्रियों ने आपातकालीन खिड़की खोलकर किसी तरह कोच के अंदर प्रवेश किया और अंदर से दरवाजे खोले। इसके बाद अन्य यात्री ट्रेन में सवार हो सके। यात्रियों का कहना था कि यदि समय रहते दरवाजे नहीं खोले जाते तो ट्रेन छूट सकती थी और बड़ी संख्या में यात्रियों को परेशानी उठानी पड़ती।
दरअसल छिंदवाड़ा से चलकर यह पैसेंजर ट्रेन दोपहर करीब 1 बजे बैतूल पहुंचती है। करीब तीन घंटे तक इसे आउटर लूप लाइन पर खड़ा रखा जाता है और शाम 4 बजे छिंदवाड़ा के लिए रवाना किया जाता है। स्टेशन मैनेजर वीके वाकड़े ने बताया कि पूर्व में आउटर पर खड़ी ट्रेन में आगजनी की घटना के बाद सुरक्षा की दृष्टि से सभी दरवाजे बंद रखने के निर्देश हैं। ट्रेन के स्टेशन पर लगने के बाद ही दरवाजे खोलने के निर्देश दिए हैं। हालांकि इस दौरान यात्रियों को हुई परेशानी ने रेलवे की व्यवस्था पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।




