Betul Water Audit : जलाशयों ने बढ़ाई धड़कन, तालाब भी सूखे, हर सोमवार हो रहा पानी का ऑडिट
कम बारिश ने बढ़ाई चिंता, जल संसाधन विभाग की जलस्त्रोतों पर नजर

Betul Water Audit : बैतूल। मानसून सीजन में उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं होने से बैतूल जिले में जल संकट की आहट अभी से महसूस होने लगी है। कम बारिश ने जहां किसानों की चिंता बढ़ा दी है, वहीं जिले के जलाशयों और तालाबों में भी पर्याप्त जलभराव नहीं हो सका है। प्रदेश में कम बारिश के हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री के निर्देश पर सभी जिलों में जलस्त्रोतों का पानी ऑडिट और आकलन कर डैशबोर्ड तैयार किया जा रहा है। इसके तहत जल संसाधन विभाग हर सप्ताह जलाशयों और तालाबों में पानी के स्तर की निगरानी कर रिपोर्ट मुख्यालय भेज रहा है।
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार 15 जून से जिले के जलस्त्रोतों की स्थिति की साप्ताहिक रिपोर्ट तैयार की जा रही है, यह रिपोर्ट 30 अक्टूबर तक प्रति सप्ताह भेजी जाएगी। हर सोमवार जलाशयों में पानी के स्तर और उपलब्ध जलभराव का आकलन किया जाता है। जिले में बैतूल और मुलताई डिवीजन को मिलाकर करीब 127 छोटे-बड़े जलाशय हैं। इनमें लगभग 75 जलाशय बैतूल और करीब 50 मुलताई डिवीजन में आते हैं। इसके अलावा जिले में सैकड़ों तालाब भी हैं, जिन पर विभाग लगातार नजर रख रहा है। सापना-घोघरी में भी सिर्फ 30 से 35 फीसदी पानी का भराव है। वर्तमान स्थिति की बात करें तो जिले के प्रमुख जलाशयों में भी पानी की स्थिति संतोषजनक नहीं है।
30 से 35 प्रतिशत पानी, नहर चलाना भी होगा मुश्किल
जल संसाधन विभाग के ईई रोशन सिंह के मुताबिक सापना और घोघरी जलाशय में ही अनुमानित 30 से 35 प्रतिशत तक जलभराव हो पाया है। कई जलाशयों में इससे भी कम पानी है। सामान्य परिस्थितियों में जुलाई के अंत तक जलाशयों में पर्याप्त जलभराव हो जाता था, लेकिन इस वर्ष मानसून की बेरुखी के कारण स्थिति अलग है। ऐसे में नहरों से सिंचाई के लिए पानी देना भी मुश्किल हो जाएगा।
सबसे बड़ी चिंता यह है कि जलाशय अभी उस स्तर तक नहीं पहुंच पाए हैं, जहां से किसानों को नहरों के माध्यम से खेतों की सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराया जा सके। यदि आगामी एक से डेढ़ माह में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो जलाशयों और तालाबों की स्थिति और बिगड़ सकती है। हालांकि मानसून का दौर अभी बाकी है और मौसम विभाग ने आगामी दिनों में बारिश की संभावना जताई है। ऐसे में अब जिले की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। अच्छी बारिश ही जलाशयों की प्यास बुझाकर किसानों और प्रशासन की चिंता दूर कर सकती है।
इनका कहना…..
तालाब, जलाशयों की सतत निगरानी की जा रही है। जल स्तर की प्रति सोमवार रिपोर्ट भेजी जा रही है। हालांकि पिछले वर्षों की अपेक्षा अभी जलाशयों और तालाबों में पानी का जल स्तर कम है।
रोशन सिंह, ईई जल संसाधन विभाग बैतूल




