Betul Ki Khabar: 200 से ज्यादा स्कूल जर्जर, मरम्मत के लिए पैसे नहीं

 टपकती छतों के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे

Betul Ki Khabar: बैतूल। जिले में सरकारी स्कूलों की बदहाल स्थिति शिक्षा व्यवस्था की पोल खोल रही है। नया शिक्षा सत्र शुरू हुए एक माह से अधिक का समय बीत चुका है, लेकिन जिले के 200 से ज्यादा प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल भवन आज भी मरम्मत का इंतजार कर रहे हैं। हालात यह हैं कि कई स्कूलों में बारिश के दौरान छतों से पानी टपक रहा है और बच्चे जान जोखिम में डालकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। दूसरी ओर विभाग के पास फिलहाल केवल 24 स्कूलों की मरम्मत के लिए ही राशि पहुंची है।

बारिश के मौसम ने जर्जर स्कूल भवनों की असल तस्वीर सामने ला दी है। कहीं दीवारों का प्लास्टर झड़ रहा है तो कहीं छत का हिस्सा टूटकर गिरने की स्थिति में है। कई स्कूलों में कक्षाओं के भीतर पानी भर रहा है, जिससे बच्चों को एक कमरे से दूसरे कमरे में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। कुछ जगह शिक्षकों ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए छतों पर त्रिपाल और पॉलीथिन बांधकर अस्थायी व्यवस्था की है, लेकिन यह समाधान कब तक चलेगा, यह बड़ा सवाल है।

जानकारी के मुताबिक शिक्षा विभाग ने जिले के 200 से अधिक स्कूल भवनों को मरम्मत योग्य चिन्हित किया है। उम्मीद थी कि नया सत्र शुरू होने से पहले भवनों की मरम्मत पूरी कर ली जाएगी, लेकिन बजट के अभाव में काम शुरू ही नहीं हो पाया। नतीजा यह है कि बच्चे जर्जर कमरों में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।

 एक माह बाद भी नहीं बदले हालात

स्कूल खुलने के बाद भी स्थिति में कोई खास सुधार नहीं आया है। जिला शिक्षा कार्यालय के अनुसार अब तक केवल 24 स्कूलों की मरम्मत के लिए राशि प्राप्त हुई है। जबकि जरूरत इससे कई गुना अधिक है। जिन स्कूलों की हालत सबसे ज्यादा खराब है, वहां भी अभी तक काम शुरू नहीं हो सका है। विभागीय सूत्रों के अनुसार कई स्कूलों की मरम्मत खनिज मद से कराए जाने का प्रस्ताव था, लेकिन वहां से भी अपेक्षित राशि नहीं मिल सकी। अधिकारियों का कहना है कि शासन स्तर से जैसे-जैसे राशि उपलब्ध होगी, वैसे-वैसे मरम्मत कार्य कराया जाएगा।

 अभिभावकों की बढ़ रही चिंता

बारिश के बीच जर्जर भवनों में बच्चों की पढ़ाई को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। यदि समय रहते मरम्मत नहीं हुई तो किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। शिक्षा विभाग के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती बच्चों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने की है। जिले के लोगों का कहना है कि बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा को देखते हुए शासन को तत्काल पर्याप्त बजट जारी करना चाहिए, ताकि टपकती छतों और टूटती दीवारों के बीच पढ़ाई करने की मजबूरी खत्म हो सके।

इनका कहना…

अभी 24 स्कूलों की मरम्मत के लिए राशि उपलब्ध हुई है। जल्द ही मरम्मत का कार्य शुरू किया जाएगा। शेष स्कूलों के लिए राशि आने पर उनकी भी मरम्मत की जाएगी।

हरिशंकर वामनकर, एई, जिला शिक्षा केंद्र बैतूल  

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

Related Articles

Back to top button