Betul Samachar: Video: पुराने ठेकेदार की शराब बेच रहे दुकानदार को आबकारी का अभयदान!

55 लीटर शराब जब्ती पर 32 लीटर का प्रकरण बनाकर 34(2) से बचाने का आरोप
Betul Samachar: बैतूल। जिले में अवैध शराब के खिलाफ आबकारी विभाग की कार्रवाई को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। चिचोली क्षेत्र में हाल ही में हुई कार्रवाई पर आरोप लग रहे हैं कि मौके से 55 लीटर अवैध शराब जब्त की गई थी, विभाग की एडीईओ की मौजूदगी में टीम ने सबूत के तौर वीडियो भी बनाए, लेकिन जब्त शराब शराब बैतूल के आबकारी विभाग आते-आते केवल 32 लीटर हो गई। आरोप है कि शराब बेचने वाले को पुराने ठेकेदार के दबाव में आबकारी विभाग ने अधिनियम की धारा 34(2) के तहत होने वाली सख्त कार्रवाई से बचा लिया।
जानकारी के अनुसार आबकारी विभाग की टीम ने दो दिन पहले एडीईओ लीला सिंह मुकाती के नेतृत्व में सूचना मिलने पर चिचोली में भीमपुर रोड पर स्थित एक दुकान पर दबिश देकर अवैध शराब जब्त की थी। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा है कि मौके से करीब 55 लीटर शराब बरामद हुई थी,विभागीय अधिकारियों की मौजूदगी में इसके वीडियो भी बनाए, लेकिन बाद में दस्तावेजों में जब्ती की मात्रा 32 लीटर दर्शाई गई।
यदि 50 लीटर से अधिक शराब की जब्ती दर्ज होती तो आरोपी के विरुद्ध आबकारी अधिनियम की धारा 34(2) के तहत प्रकरण दर्ज होता और गिरफ्तारी सहित अन्य कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाती। यह शराब पुराने ठेकेदार के करीबी गुंजित की दुकान से पकड़ाए जाने की बात सामने आ रही है।
वीडियो से खुल रही आबकारी की पोल
मामले को लेकर यह भी दावा किया जा रहा है कि कार्रवाई के दौरान बनाए गए वीडियो और मौके पर मौजूद लोगों के पास उपलब्ध ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग से वास्तविक जब्ती की पुष्टि हो सकती है। आरोप है कि प्रकरण दर्ज करते समय शराब की मात्रा कम दर्शाकर आरोपी को गंभीर धाराओं से राहत दी गई। हालांकि आबकारी विभाग ने इन आरोपों को निराधार बताया है।
विभाग का कहना है कि पूरी कार्रवाई नियमानुसार की गई है और जब्ती की वास्तविक मात्रा के आधार पर ही प्रकरण दर्ज किया गया। विभाग का यह भी कहना है कि वर्तमान समय में अधिकांश कार्रवाई की वीडियोग्राफी कराई जाती है, इसलिए किसी भी प्रकार की गड़बड़ी की संभावना नहीं है।
आबकारी अधिकारी का दोहरा रवैया
पूरे मामले में जिला आबकारी अधिकारी डॉ. अंशुमन चढ़ार ने कहा कि विभाग की कार्रवाई पूरी तरह पारदर्शी एवं नियमानुसार की गई है। उन्होंने बताया कि जब्ती और प्रकरण दर्ज करने की प्रक्रिया उपलब्ध साक्ष्यों एवं नियमानुसार पूरी की जाती है।
यदि किसी के पास कोई तथ्यात्मक प्रमाण हैं तो उनकी जांच कराई जा सकती है। फिलहाल इस मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का दौर जारी है। यदि आरोपों में दम पाया जाता है तो विभागीय कार्रवाई की निष्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं। वहीं विभाग अपने स्तर पर कार्रवाई को पूरी तरह विधिसम्मत बता रहा है।




