Politics: राजनीतिक हलचल: ब्लाक को लेकर यहां किन नेताओं में मची खींचतान?? स्वच्छता मिशन के करोड़ों के घोटाले में कौन कर रहा बम फोड़ने की तैयारी??? किस युवा नेता ने नपा अध्यक्ष चुनाव लड़ने के लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं पर आरोप लगाना शुरू किया??? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…..

ब्लाक अध्यक्षों को लेकर दो पूर्व माननीय आमने-सामने
विपक्षी पार्टी में परिवर्तन के बहाने संगठन में बदलाव हुआ है। इस बहाने नए अध्यक्षों को मौका देने की कवायदों पर वरिष्ठ नेताओं में तकरार दिखाई देने लगी है। जिले के एक प्रमुख ब्लाक में रहने वाले पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक के बीच उनके ब्लाक के अध्यक्ष के लिए जमकर खींचतान मची है। हालात यह है कि दोनों पूर्व विधायक का अपनी पार्टी में खासा दबदबा है, इसलिए पार्टी प्रमुख ने यहां के ब्लाक अध्यक्ष की नियुक्ति को होल्ड पर रख दिया है।
चूंकि यह मामला एक पूर्व मंत्री और पूर्व विधायक से जुड़ा है, इसलिए पार्टी प्रमुख भी अध्यक्ष की नियुक्ति में फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। धर्मसंकट में फंसे अध्यक्ष के लिए इसी ब्लाक में ही नहीं बल्कि एक आरक्षित विधानसभा के ब्लाक अध्यक्ष को लेकर खींचतान ने चिंता बढ़ा दी है। यहां पर पूर्व विधायक और पार्टी के आदिवासी विंग के प्रमुख अपने खास सिपाहसलार को अध्यक्ष बनाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाए हैं। ऐसे में यहां पर भी अध्यक्ष की नियुक्ति पार्टी अध्यक्ष के लिए जी का जंजाल बन गई है।
स्वच्छता मिशन को लेकर बम फोड़ने की तैयारी
जिले की राजनीति में करोड़ों का चर्चित स्वच्छता मिशन घोटाले में अब राजनीति का दखल अंदाज भी बढ़ गया है। खबर है कि एक जिला पंचायत प्रतिनिधि ने अजीविका मिशन में चल रहे इस गड़बड़ झाले को लेकर बम फोड़ने की तैयारी कर ली है।
चर्चाओं पर यकीन करें तो पंचायत के एक आदिवासी सदस्य ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए अपनी ही पार्टी के एक माननीय से विधानसभा प्रश्न लगाने का आग्रह भी किया था, लेकिन उनके जागरूक पीए ने इंकार कर दिया। इस पर जिपं सदस्य आग बबूला और अजीविका मिशन के इस घोटाले के तह तक जाने के लिए दूसरे प्रयास में लगे हैं।
चुनाव के भूत ने किया आग में घी डालने का काम
अपने आप को सत्तारूढ़ पार्टी का नेता को इस समय राजनीति का जमकर भूत सवार हो गया है। वैसे तो इनकी राजनीति विपक्षी पार्टी के मित्रों के साथ शुरू होती है, लेकिन एक बैंक के संचालक बनने का सपना आधूरा रहने के बाद अब नपा अध्यक्ष की दावेदारी सावर्जनिक रूप से शुरू कर दी है। यही वजह है कि अच्छे को बुरा और बुरे को अच्छा कहकर अपनी ही पार्टी के नेताओं को घेरने से बाज नहीं आ रहे हैं।
पहले एक बैंक के पूर्व अध्यक्ष पर कटाक्ष कर पार्टी की किरकिरी कराई। इसके बाद अपनी ही पार्टी के वार्ड पार्षद के पति को अतिक्रमण के बहाने घेरकर पार्टी की परेशानी बढ़ा दी है। नपा चुनाव को अभी 17 माह का समय शेष है, लेकिन नेता जी को अध्यक्ष का चुनाव लड़ने के भूत ने अभी से पंगा लेना श्ुारू कर मुसीबत बढ़ा ली है। नेताजी के कृत्य को लेकर उन्हें छुटभैए की संज्ञा दी जा रही है।




