Betul News: Video: पीएम की ऊर्जा बचत अपील पर भारी पड़ा वीआईपी कल्चर!

वन बल प्रमुख के दौरे में 8 गाड़ियों का काफिला, रेड कार्पेट और कड़ी बंदिशें चर्चा में, दीक्षांत समारोह में दिखा तामझाम
Betul News: बैतूल। एक ओर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार ऊर्जा संरक्षण, सरकारी खर्चों में कटौती और सादगीपूर्ण प्रशासनिक व्यवस्था पर जोर देते हुए खुद अपने काफिले को छोटा करने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर पिछले दिनों बैतूल में आयोजित वन विद्यालय के दीक्षांत समारोह के दौरान सामने आए दृश्य इन संदेशों से बिल्कुल उलट नजर आए। प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख शुभ रंजन सेन के दौरे को लेकर किए इंतजाम अब वन महकमे और आम लोगों के बीच चर्चा का विषय हैं।
ऊर्जा संकट को देखते मुख्यमंत्री तक पेट्रोल वाहन की जगह इलेक्ट्रिक वाहन का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन पीएम और सीएम की अपील को नजरअंदाज कर वन बल प्रमुख के काफिले में एक दो नहीं बल्कि 8 वाहन शामिल किए गए थे।
जिले की सीमा से ही शुरू हुआ वीआईपी काफिला
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वन बल प्रमुख को रिसीव करने के लिए जिले की सीमा पर पहले से करीब 8 विभागीय वाहन तैनात कर दिए थे। जैसे ही उनका काफिला जिले में प्रवेश हुआ, लगभग वाहनों का समूह उनके साथ वन विद्यालय तक पहुंचा। इस दौरान अधिकारियों का पूरा अमला वरिष्ठ अधिकारी की अगवानी और आवभगत में जुटा दिखाई दिया। इसके बाद वाहन संख्या और ईंधन खर्च को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
वन विद्यालय पहुंचने पर वन बल प्रमुख का स्वागत विशेष प्रोटोकॉल के तहत किया गया। प्रवेश द्वार पर रेड कार्पेट बिछाया और अधिकारियों ने औपचारिक स्वागत में कोई कमी नहीं छोड़ी। कार्यक्रम में मौजूद लोगों का कहना है कि सामान्य प्रशासनिक कार्यक्रम की तुलना में व्यवस्थाएं कहीं अधिक भव्य दिखाई दीं।
जंगल की आग नजरअंदाज, भीषण गर्मी में कराई परेड
प्राप्त जानकारी के मुताबिक 43 डिग्री तक पहुंच चुके तापमान के बीच दोपहर में वन कर्मियों और नव नियुक्त वनरक्षकों की परेड आयोजित की गई। बताया जा रहा है कि विभिन्न क्षेत्रों में पदस्थ वन कर्मियों को भी फील्ड कार्य से बुलाकर समारोह और सलामी व्यवस्था में लगाया गया। वह भी ऐसे समय में जब जंगलों में आग की घटनाओं को लेकर सतर्कता की बेहद आवश्यकता रहती है, कर्मचारियों की इस प्रकार की तैनाती को लेकर भी अब सवाल उठ रहे हैं।
धार से बैतूल तक जगह-जगह दी गई सलामी
सूत्रों का दावा है कि वरिष्ठ अधिकारी के दौरे के दौरान मार्ग में कई स्थानों पर वन कर्मचारियों को सलामी देने और स्वागत व्यवस्था के लिए लगाया गया था। इससे विभागीय संसाधनों और मानवबल के उपयोग को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। कार्यक्रम की गोपनीयता भंग ना हो इस दौरान वन विद्यालय परिसर में प्रवेश को लेकर भी कड़े प्रतिबंध लगाए गए।
यहां तक कि मीडिया कर्मियों को भी प्रवेश से रोक लिया गया। मुख्य द्वार पर कर्मचारियों की तैनाती कर बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक रखी गई। इतना ही नहीं, वनरक्षकों को प्रशिक्षण देने वाले कुछ विषय विशेषज्ञों और गेस्ट फैकल्टी को भी कार्यक्रम में आमंत्रित नहीं किए जाने की चर्चा रही। दीक्षांत समारोह की व्यवस्थाओं को लेकर विभागीय कर्मचारियों और स्थानीय स्तर पर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
ऊर्जा संरक्षण, खर्चों में कटौती और सादगी के सरकारी संदेशों के बीच हुए इस आयोजन ने वीआईपी संस्कृति और संसाधनों के उपयोग को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालांकि इस संबंध में विभाग की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।




