Betul Samachar: बैतूल में राजनीति पर हावी अफसरशाही! चुनावी वर्ष में अधिकारियों की बेरूखी कही बन न जाए परेशानी का सबब, अधिकारी अपने मनमर्जी से कर रहे हैं काम।

Betul Samachar: Bureaucracy dominates politics in Betul! In the election year, the indifference of the officers should not become a cause of trouble, the officers are working as per their wish.

Betul Samachar: बैतूल में राजनीति पर हावी अफसरशाही! चुनावी वर्ष में अधिकारियों की बेरूखी कही बन न जाए परेशानी का सबब, अधिकारी अपने मनमर्जी से कर रहे हैं काम।
File Photo

Betul Samachar: (बैतूल)। चुनावी वर्ष में मुख्यमंत्री 24 में से 18 घंटे तक काम कर बिसात बिछा रहे हैं। हर जिले में जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों से लगातार से चर्चा कर फीडबैक ले रहे हैं, लेकिन इतना सब होने के बाद बैतूल के अफसर मुख्यमंत्री की बातों को ही नजर अंदाज करने में लगे है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की बातों को नजरअंदाज करना यहां के अफसरों की आदत में शुमार हो गया है। यदि यही हाल चलता रहा तो बैतूल में भाजपा को चुनाव में दिक्कतें होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

सूत्र बताते हैं कि जिले के कुछ शीर्ष अफसर अपनी मनमानी चलाने के कारण सत्तारूढ़ भाजपा नेताओं के निशाने पर है। चुनावी वर्ष में जिस तरह अफसर अपनी मन की कर रहे हैं, इससे भाजपा के आगे का सफर कठिन हो सकता है। यदि ऐसा ही सिलसिला चलते रहा तो चुनाव में मुंह की खानी से इंकार नहीं किया जा सकता। शीर्ष से लेकर कुछ निचले स्तर के जनप्रतिनिधि भी भोपाल की धमक दिखाकर भाजपा के पदाधिकारियों की बातों को अनसुनी करना दिनचर्या में शामिल कर चुके हैं। इससे सीधे तौर पर भाजपा को तगड़ा नुकसान होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

चुनावी वर्ष में बुरे हाल

सूत्र बताते हैं कि चार 3-4 माह बाद प्रदेश में चुनाव की तारीखों का एलान होने वाला है। खुद मुख्यमंत्री हर जिले में भाजपा के संगठन पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से फीडबैक ले रहे हैं। शिकायतें मिलने पर सीधे अफसरों से खुद वार्तालाप कर बीच का रास्ता निकाल रहे हैं, लेकिन सीएम के आदेश की चुनावी वर्ष में बैतूल के अफसर जिस तरह से अवहेलना कर रहे हैं। इसका सीधा असर चुनाव पर पड़ सकता है। जानकार बताते हैं कि चुनावी वर्ष में टॉप टू बॉटम सूची के अनुसार कामों को अंजाम दिया जा रहा है, ताकि विपक्षी पार्टी कोई मुद्दा न बना ले, लेकिन बैतूल के कुछ अफसरों की तो हांडी ही काली दिखाई दे रही है। दरअसल मुख्यमंत्री के फीडबैक के बावजूद अफसर चुनावी वर्ष में अपने मन की करने से सत्तारूढ़ पार्टी को ही सीधे तौर पर नुकसान पहुंचा रहे हैं।

आश्वासन का लालीपॉप

सूत्रों ने बताया कि भोपाल में अपनी अच्छी फिल्डिंग होने के कारण कुछ शीर्ष अफसर अपनी मनोपली चला रहे है। बड़े जनप्रतिनिधियों के पास समस्या लेकर आने वाले लोगों के मामले में अफसरों से चर्चा करने पर या तो उनके भी मोबाईल रिसीव नहीं किए जा रहे है, यदि किए जा रहे है तो केवल उनकी बातों को भी हल्के में लेकर आश्वासन भर दिया जा रहा है। कहा तो यह भी जा रहा है कि अफसर जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों की बात को नजर अंदाज कर रहे है, इसलिए कार्यकर्ताओं की समस्या हल न होने पर जनप्रतिनिधियों के प्रति उनकी नाराजगी बढ़ते जा रही है।

तबादलों में भी सामने आई नाराजगी

इधर सूत्रों ने बताया कि हाल ही में हुए तबादलों में भी अफसरों ने भाजपा नेताओं की मंशा को दरकिनार करते हुए अपनी मनमर्जी चलाई है। कुछ विभागों की सूची पर भाजपा नेताओं ने भी आपत्ति जताई। मामले को लेकर जब अफसरों से चर्चा की गई तो उन्होंने आश्वासन दिया कि फेरबदल हो जाएग, लेकिन अब संभावना कम है कि तबादले के स्थान परिवर्तन किए जाए। दरअसल तबादलों की तिथि खत्म हो चुकी है, ऐसे में अजाक, वन विभाग समेत कुछ अन्य विभागों में तबादलों के बीच टकरार में अफसरों ने मन की कर डाली। जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई शिकायत को नजर अंदाज कर दिया है। खबर है कि भोपाल तक इस मामले की शिकायत हुई है। देखना यह है कि तबादलों पर अफसरशाही हावी होने का असर चुनावी वर्ष में दिखाई देता है या नहीं।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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