Politics: राजनीतिक हलचल: पहले रूठे, फिर आसानी से कैसे मान गए 2 पूर्व माननीय?? समाजसेवी ने 1 झटके में कैसे दी लाखों को सहयोग राशि??? किस नेता का छलका दर्द और क्या है उनकी मांग???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित राजनीतिक कॉलम में…….

आसानी से मान गए रूठे पूर्व माननीय
विपक्षी पार्टी में पिछले दिनों कुछ ब्लाक अध्यक्षों की नियुक्ति हुई। संयोगवश दो पूर्व माननीयों के क्षेत्र से उनके सुझाए गए नामों के बदले दूसरों को मौका मिल गया। इसके बाद दोनों की नाराजगी देखते ही बनती थी। चर्चा है कि दोनों ही नाक और मुंह फुलाकर बैठ गए। इसे देख जिला प्रमुख ने ब्लाक अध्यक्षों की बैठक बुलाकर रूठे हुए पूर्व माननीयों के हाथ पंचायत और वार्ड समिति के फार्मेंट बंटवाकर बहलाने का प्रयास किया। बस इतना होते ही मुंह फुलाकर बैठे दो माननीयों की नाराजगी दूर हो गई। बाद में उक्त जिला प्रमुख ने अपनी सलाहकार मंडली से चर्चा करते देखे गए कि इनको बहलाना बड़ा मुश्किल था, लेकिन इतने में ही मान गए। उनके उतना कहते ही हंसी के फुव्वारे छूट पड़े।
सहयोग राशि देने के मायने
पिछले दिनों एक अनारक्षित विधानसभा की तथाकथित समाजसेवी ने पार्टी को सहयोग निधि के रूप में भारी भरकम राशि का चैक सौंपा। इसके लिए बकायदा तारीखें तय हुई और पार्टी प्रमुख संबंधित मुख्यालय पहुंचे और इसके बाद सहयोग के रूप में दिए गए चैक के लिए फोटो सेशन चर्चा में रहा। इससे कई अधिक चर्चा चैक की राशि रही। इसको लेकर पार्टी के नेता बोलने को तैयार नहीं है, लेकिन अपने आप को युवा नेता कहलाने वाले ने जिस मकसद से पार्टी में भारी भरकम राशि दान की है, इसको लेकर उनकी मंशा का अंदाजा आसानी से लगाया जा रहा है। समाजसेवा के क्षेत्र में सक्रिय रहकर इंदौर में व्यवसाय करने वाले इस युवा नेता की मंशा आने वाले विधानसभा को लेकर अभी से सशक्त होने के कारण शंकाओं को और अधिक बल मिल रहा है।
समाज के लिए टिकट से गरमाई राजनीति
विधानसभा चुनाव को भले ही अभी ढाई वर्ष का समय शेष है, लेकिन अभी से फील्डिंग करना शुरू हो गई है। एक युवा नेता और सरपंच ने तो अपने समाज को जिला मुख्यालय की विधानसभा से आजादी के बाद से टिकट न देने पर खुलकर नाराजगी जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर सत्तारूढ़ पार्टी का अध्यक्ष और ओबीसी अध्यक्ष भी इसी समाज से होने का हवाला देकर अपनी पार्टी के नेताओं तक बात पहुंचाने का प्रयास किया है। उन्होंने जिस मंशा से अपनी बात रखी है, इससे साफ जाहिर है कि अपने समाज के किसी व्यक्ति को विधानसभा टिकट देने की मांग कर रहे हैं। यदि ऐसा होता है तो अभी से टिकट के स्थाई दावेदारों की नींद उड़ना स्वभाविक है।




