Betul Ki Khabar: मधुमक्खी के डंक से असाध्य रोगों का इलाज
Betul Ki Khabar: Treatment of incurable diseases by bee sting

सौ से अधिक मरीजों का मिला लाभ, हनी बी थेरेपी से इलाज की अनोखी पद्धति
Betul Ki Khabar: बैतूल। सदर के छत्रपति शिवाजी सांस्कृतिक भवन में सोमवार को हनी बी थेरेपी शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में पुणे और नागपुर से आई विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने असाध्य बीमारियों के इलाज के लिए मधुमक्खी के डंक का प्रयोग किया। इस तरह का आयोजन बैतूल में पहली बार हुआ है। इसमें दोपहर तक 120 से अधिक मरीज लाभ ले चुके हैं। यह आयोजन लोन्हारी कुनबी समाज संगठन बैतूल और जयश्री खाड़गड़े मुंबई एवं वैशाली बारस्कर भिलाई के सक्रिय सहयोग से किया गया।

शिविर में कैंसर, बीपी, थायरॉइड, डायबिटीज, गठिया, अस्थमा, पथरी, त्वचा रोग, माइग्रेन, मानसिक रोग, थैलेसीमिया, एड्स, वेरिकोज वेन,सायटिका, ऑस्टियोपोरोसिस और रीढ़ व हड्डियों से संबंधित 70 से अधिक जटिल बीमारियों का प्राकृतिक उपचार किया गया। जयश्री खाडगड़े ने बताया कि इस चिकित्सा पद्धति का उद्देश्य बिना इंजेक्शन या ऑपरेशन के केवल मधुमक्खी के डंक और प्राचीन भारतीय चिकित्सा विज्ञान के माध्यम से रोगों का उपचार किया। यह पद्धति पिछले दो दशकों में मुंबई, पुणे, नागपुर, अमरावती,इंदौर, उज्जैन सहित कई शहरों में हज़ारों मरीजों को लाभ पहुंचा चुकी है। अब यह सेवा बैतूल के नागरिकों के लिए उपलब्ध हो रही है।

डॉ. श्रीराम दिगंबर कुलकर्णी पिछले 19 वर्षों से हनी बी थेरेपी के माध्यम से लाखों रोगियों का सफलतापूर्वक इलाज कर चुके हैं। यह चिकित्सा विधि प्राकृतिक चिकित्सा प्रणाली का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाकर रोगों को जड़ से समाप्त करना है। शिविर में दोपहर तक 120 से अधिक मरीज रक्तचाप, शुगर, माइग्रेन, घुटने का दर्द सहित अन्य बीमारियों से पीड़ित पहुंचे थे। डॉ कुलकर्णी ने मधुमक्खी के डंक की अनोखी पद्धति से इलाज किया। इस दौरान कुनबी समाज के दिनेश महस्की समेत नवीन वागद्रे और अन्य लोग भी मौजूद रहे।




