Betul Samachar: फालोअप: ठेकेदार की लापरवाही से ट्रेनें लेट, कार्रवाई पर अब भी सस्पेंस

जानकारी देने से रेलवे के अधिकारियों की लगातार परहेज
Betul Samachar: बैतूल। अमृत भारत योजना के तहत बैतूल रेलवे स्टेशन के कायाकल्प कार्य के दौरान ठेकेदार की लापरवाही से तीन ट्रेनों के विलंब से संचालन का गम्भीर और संवेदनशील मामला अब संदेह के घेरे में आ गया है। घटना के चार दिन बीत जाने के बाद भी रेलवे द्वारा ठेकेदार के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई, इसकी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। इससे पूरे मामले में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ऐसे में सवाल यह खड़ा हो रहा है कि अधिकारी कहीं ठेकेदार को बचाने का प्रयास तो नहीं कर रहे। यदि मामले में पूरी पारदर्शिता बरती गई है तो, इसकी जानकारी सार्वजनिक किया जाना चाहिए।
केबल क्षतिग्रस्त होने से प्रभावित हुआ संचालन
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार स्टेशन परिसर में टंकी सफाई कार्य के दौरान ठेकेदार द्वारा लापरवाही बरती गई, जिससे रेलवे की केबल क्षतिग्रस्त हो गई। इस कारण सिग्नलिंग व्यवस्था प्रभावित हुई और तीन ट्रेनों को विलंब से चलाना पड़ा। हालांकि सूत्र लगभग एक दर्जन ट्रेनों के प्रभावित होने का दावा कर रहे हैं।
एडीईएन और स्टेशन मैनेजर ने भी केबल डैमेज और तीन ट्रेनों के लेट होने की पुष्टि की थी, लेकिन इसके बाद की कार्रवाई पर चुप्पी साध ली गई। नियमों के अनुसार इस तरह की घटनाओं में संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई के साथ-साथ आरपीएफ को मेमो देकर सूचित करना अनिवार्य होता है। हालांकि, आरपीएफ थाना प्रभारी राजेश बनकर ने स्पष्ट किया कि उन्हें इस मामले में कोई मेमो प्राप्त नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि यदि मेमो मिलता, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाती। मेमो नहीं दिए जाने से मामला और संदिग्ध बन गया है।
अधिकारियों की चुप्पी बढ़ा रही संदेह
मामले की जानकारी लेने के लिए एसीएम संजय मुले के मोबाइल 7219612955, एलोडब्ल्यू विनय श्रीवास्तव के मोबाइल 9503012265 और एडीईएन सोनल बेसेकर मोबाइल नम्बर 7219612214 पर बार-बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन किसी भी अधिकारी ने फोन रिसीव नहीं किया। जिम्मेदार अधिकारियों की यह चुप्पी सवालों को और गहरा कर रही है।
सूत्रों के अनुसार यदि ऐसा है तो इस तरह से ठेकेदार को बचाने के प्रयास भी किए जा सकते हैं। नियमों में है सख्त कार्रवाई का प्रावधान, लाखो का जुर्माना भी रेलवे नियमो के जानकारों के मुताबिक रेलवे बोर्ड के निर्देशों के मुताबिक, यदि ठेकेदार की लापरवाही से ट्रेन संचालन प्रभावित होता है, तो नुकसान का आकलन कर लाखों रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
इतना ही नहीं, जुर्माना राशि जमा न करने की स्थिति में ठेकेदार के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का भी प्रावधान है फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि इतनी गंभीर लापरवाही के बावजूद अब तक क्या कार्रवाई की गई। रेलवे अधिकारियों की चुप्पी और आरपीएफ को मेमो न दिए जाने से पूरे मामले में पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि समय रहते स्थिति स्पष्ट नहीं की गई, तो यह मामला और तूल पकड़ सकता है।




