Betul Samachar: प्रशासनिक कोना: कौनसे साहब है, जिनकी सख्ती से माफिया लॉबी पस्त हुई?? आचार संहिता में कैसे हो गया विभागीय फेरबदल??? एक थानेदार सब पर क्यों पड़ रहा भारी???? पूरी खबर पढ़िए हमारी चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में…….
Betul Samachar: Administrative Corner: Which sir is there, due to whose strictness the mafia lobby was defeated??

Betul Samachar: साहब की सख्ती से माफियाओं के अरमानों पर पानी फिर गया
पिछले दिनों एक बड़े साहब की तीसरी नेत्र क्या खुली, पीले सोने से जुड़े माफियाओं की शामत आ गई। एक नहीं बल्कि दो मर्तबा वे पूरी रात को जागकर कार्रवाई करते रहे। पहली बार कार्रवाई के बाद माफियाओं ने साहब पर डोरे डालने के प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिली। अब ऊपर से पीले सोने के माफियाओं पर अभियान चलाने का फरमान जारी हुआ तो माफियाओं को सूचना देने वाले विभीषणों को पूरी कार्रवाई से दूर रखा गया।
उन्हें बाद में इत्तला देकर मौके पर बुलाया गया। दो बार कार्रवाई के बाद माफिया लाबी साहब पर डोरे डालने के प्रयास किए, लेकिन सफल नहीं हो सके। जिस तरह से साहब ने कड़े तेवर दिखाकर करोड़ों रुपए का जुर्माना अधिरोपित किया, यह इतिहास के सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा। माफियाओं के हौसले इस समय ऐसे पस्त है कि वे अपना डेरा डंपर समेटने में लगे हैं।
आचार संहिता में कर दिया फेरबदल
पुलिस विभाग में एक साहब का डंडा सब पर भारी दिखाई दे रहा है। कहा जा रहा है कि उनके नियम-कायदें के आगे न आचार संहिता चल रही है और न ही जनप्रतिनिधियों की सुनी जा रही है। चर्चा है कि आचार संहिता के दौरान साहब ने विभाग के चार कर्मचारियों के तबादले कर दिए, जबकि नियम के अनुसार आचार संहिता में चुनाव आयोग की अनुमति के बिना तबादला नहीं होता है।
कोतवाली से बीजादेही, एसडीओपी कार्यालय बैतूल से मुलताई, एसडीओपी कार्यालय मुलताई से बैतूल, एसडीओपी कार्यालय मुलताई से बैतूल, एसडीओपी कार्यालय के एक एसआई को आमला पदस्थ कर दिया गया। यह चर्चा विभाग में जोर शोर से हो रही है कि ऐसा क्या हुआ कि साहब ने आचार संहिता में तबादले का डंडा चला दिया। साहब के बारे में कहा जा रहा था कि वे नियम के सख्त है, लेकिन खुद ही नियम तोड़कर विभाग के अधीनस्थों का मनोबल गिरा रहे हैं।
एक थानेदार पर इतनी मेहरबानी क्यों?
ताप्ती किनारे से महाराष्ट्र जाने वाले मार्ग पर सबसे अधिक गौतस्करी के लिए चर्चित एक थाने के साहब इन दिनों खासी सुर्खियां बटोर रहे हैं। थानेदार साहब का क्षेत्र जुआरियों के लिए मुफीद बना हुआ है। ग्रामीण अंचलों में फैले थानाक्षेत्र की सीमा में आधा दर्जन से अधिक जुएं की फड़ संचालित होती है, लेकिन मजाल किसी की कि थानेदार साहब का बाल भी बांका कर सके।
पिछले दिनों एक मीडियाकर्मी पर थानेदार साहब ने बिना आईजी के अनुमति के मामला दर्ज किया तो भी नियम कायदे ताक पर रख दिए। बड़े साहब तक बात पहुंची तब उन्होंने भी थानेदार साहब की गलती मानी, लेकिन तब तक झूठा मुकदमा दर्ज होने से मीडियाकर्मी अपने आप को ठगा महसूस कर रहे हैं। खबर है कि थानेदार साहब की कारगुजारियों की शिकायत डीजीपी और आईजी को भी भेजी जा रही है।





