Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: आखिर कौनसी मैडम है, जिन्होंने जिम्मेदारी मिलते ही गिरगिट की तरह रंग बदला?? एक ही थाने में 3 वर्ष से जमे थानेदार का यह कैसा फीलगुड??? बात- बात पर गुस्सा करने वाली किस मोहतरमा की खिलाफत हुई शुरू???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

मैडम ने गिरगिट की तरह बदला रंग
एक बड़े कालेज की प्राचार्य ने पदस्थापना के बाद गिरगिट की तरह अपना रंग बदल दिया है। मैडम पहले उसी कालेज में प्राध्यापक हुआ करती थी। पूर्व प्राचार्य सेवानिवृत्त हुए तो राजनीतिक जुगाड़ से प्राचार्य की कुर्सी तो हतिया ली, लेकिन बाद में गिरगिट की तरह रंग बदल लिया। प्राचार्य के बारे में चर्चा है कि प्राध्यापक रहते हुए उनका स्वभाव काफी शालीन रहता था। कुर्सी मिलते ही उनके तेवर में अचानक बदलाव आ गया। अब तो वे अपने करीबी प्राध्यापकों को भी भाव नहीं दे रही है। छात्र हित के निर्णय और अन्य मामलों में खुद निर्णय लेकर बॉस बनने की चाहत से कही न कहीं कालेज का ही नुकसान हो रहा है। खबर यह भी है कि राजनीतिक दल के लागों को भी यह मैडम उल्टी-सीधी पट्टी पढ़ाकर गलत को सही बताने में माहिर मानी जाती है। उनके छात्र अहित में कुछ तुगलकी फरमान खासे सुर्खियों में है।
तीन वर्ष से जमे थानेदार का फीलगुड
वैसे तो जिले के कई थानों में थानेदार ज्यादा दिन नहीं टिक पा रहे हैं। इसके उलट एक आदिवासी विधान सभा के प्रमुख निकाय क्षेत्र के थानेदार लंबे समय से न सिर्फ जमे हुए है, जबकि जबरदस्त बैटिंग कर रहे हैं। उनकी बैटिंग का ही नतीजा है कि पूरे क्षेत्र में अवैध कारोबार की बाढ़ आ चुकी है। सट्टा तो पूरे क्षेत्र में ऐसे चल रहा है जैसे वहां पुलिस नाम की कोई चीज ही नहीं बची है। एक के बाद एक जुएं के कारोबार का खुलासा होने के बावजूद इन थानेदार पर कार्रवाई नहीं हो रही है। खबर तो यह भी है कि थानेदार पर एक भाजपाई नेता का जबरदस्त वरदहस्त है, इसी वजह वे लंबे समय से बैटिंग कर खुद के साथ नेताजी का भी पूरा ख्याल रख रहे हैं।
मोहतरमा के गुस्से से परेशान कर्मचारी
राजस्व विभाग की एक महिला अधिकारी को कुछ दिन पहले ही एक शहर को संभालने का जिम्मा मिला है। मुख्यालय होने के कारण उनकी जिम्मेदारी भी अधिक है, लेकिन अधिकांश समय मोहतरमा गुस्से में ही नजर आती है। इससे कर्मचारी बेहद खौफ खाते हैं। इतना ही नहीं अधिवक्ताओं का एक तबका भी खासा नाराज बताया जा रहा है। मोहतरमा अधिवक्ताओं से भी ठीक से बात नहीं कर रही है। खबर तो यह भी है कि अधिवक्ता इस मामले को लेकर मोर्चा खोलते हुए ज्ञापन देने की भी तैयारी कर रहे हैं। कहा जा रहा है कि जब से मैडम को जिम्मेदारी दी है वे अपनी कुर्सी पर कम बैठ रही है, इसलिए प्रकरणों में लेटलतीफी हो रही है।




