Betul Trenching Ground: ट्रेचिंग ग्राउंड का विवाद और गहराया, पुराने कचरे को ठेकेदार बता रहा नया
सीमेंट फैक्ट्रियों में भेजी जा रहीं पन्नियां, रोजाना 15-20 ट्रकों से परिवहन

Betul Trenching Ground : बैतूल। लगभग 5 करोड़ रुपए के ट्रेचिंग ग्राउंड ठेके से जुड़ा विवाद खत्म होने के बजाय लगातार और उलझता जा रहा है। नगर पालिका और ईको स्टैंड कंपनी के बीच चल रहे इस विवाद ने अब प्रशासनिक, पर्यावरणीय और जनस्वास्थ्य से जुड़े गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि ठेकेदार द्वारा पुराने कचरे को नया कचरा बताकर उसके निष्पादन से इंकार किया जा रहा है, जबकि उसी कचरे से निकलने वाली पन्नियों को ट्रकों में भरकर सीमेंट फैक्ट्रियों में भेजा जा रहा है। रोजाना ट्रकों में भरकर बिना तिरपाल के पन्नियां परिवहन की जा रही हैं और रोज़ाना शहर भर से निकलने वाले कचरे के पहाड़ ट्रेचिंग ग्राउंड पर बनते जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले समय मे लोगों की तकलीफें बढ़ना भी तय माना जा रहा है।
पुराना कचरा बना विवाद की जड़
सूत्रों के अनुसार ट्रेचिंग ग्राउंड में पहले से मौजूद पुराने कचरे को लेकर ठेकेदार और नगर पालिका के बीच मतभेद और ज्यादा गहरे हो गए हैं। ठेकेदार का दावा है कि यह कचरा उसके ठेके की शर्तों में शामिल नहीं है, इसलिए वह इसके निष्पादन का जिम्मा नहीं लेगा। वहीं नपा का कहना है कि ठेका समग्र कचरा प्रबंधन का है, जिसमें पुराने कचरे का निष्पादन भी शामिल है। आरोप है कि पुराने कचरे से निकली मिट्टी आसपास के खेतों में डाल दी गई, जबकि प्लास्टिक और पन्नियों को अलग कर ठेकेदार द्वारा सीमेंट फैक्ट्रियों में भेजा जा रहा है। बताया जा रहा है कि रोजाना 15 से 20 ट्रकों के माध्यम से यह पन्नियां फैक्ट्रियों तक पहुंचाई जा रही हैं, जिससे पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की आशंका भी जताई जा रही है।
ढाई करोड़ भुगतान के बाद काम पूरा बताकर हाथ खड़े किए
जानकारी के मुताबिक नगर पालिका द्वारा ठेकेदार को 5 करोड़ में से अब तक करीब 2.5 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। इसके बाद अचानक ठेकेदार ने नगर पालिका को काम पूर्ण होने का पत्र सौंप दिया, जिससे विवाद और भड़क गया। नपा का आरोप है कि काम अधूरा छोड़कर भुगतान लेने की कोशिश की जा रही है। विवाद बढ़ने पर कलेक्टर द्वारा जांच के निर्देश दिए गए थे, लेकिन यह जांच फिलहाल ठंडे बस्ते में पड़ी हुई बताई जा रही है। सूत्रों का कहना है कि नपा और ठेकेदार के बीच का यह मामला अब राजधानी भोपाल तक पहुंच चुका है, और बकाया भुगतान को लेकर अंतिम निर्णय भी वहीं से होना है।
रातों-रात डाला गया कचरा, नए का दिया गया रूप
एक और गंभीर आरोप यह है कि सर्वेक्षण के लिए खाली कराए गए मैदान में रातों-रात पुराना कचरा लाकर डाल दिया गया, जिसे बाद में ठेकेदार ने नया कचरा बताकर उठाने से इंकार कर दिया। इस आरोप ने पूरे मामले को और संदेहास्पद बना दिया है। इधर नपा और ठेकेदार के इस टकराव का खामियाजा ट्रेचिंग ग्राउंड के आसपास रहने वाले नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्र में फैली तीखी दुर्गंध, मच्छरों और संक्रमण के खतरे ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है।
स्थानीय निवासियों का कहना है कि बच्चों और बुजुर्गों की तबीयत पर इसका सीधा असर पड़ रहा है। सबसे बड़ी समस्या यह है कि जब तक यह विवाद सुलझ नहीं जाता, तब तक नगर पालिका कचरा निष्पादन का नया ठेका भी नहीं कर पा रही है और शहर भर से रोजाना निकलने वाले कचरे के पहाड़ बनते जा रहे हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में शहर की स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर संकट गहराने की आशंका जताई जा रही है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पूरे मामले में कब तक ठोस कार्रवाई करता है और क्या ट्रेचिंग ग्राउंड से जुड़ा यह विवाद जनता को राहत दिला पाएगा या यूं ही उलझता रहेगा।



