Politics: राजनीतिक हलचल: उपनिरीक्षक की पदस्थापना में किस माननीय का उल्टा पड़ा दांव?? आखिर क्या हुआ कि फिटनेस सेंटर का मामला अधर में लटक गया??? लालबत्ती की आस में किन नेताओं की बढ़ रही चहल कदमी???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…….

माननीय का उल्टा पड़ा दाव
जिले की एक माननीय को अपने क्षेत्र में एक उपनिरीक्षक को पदस्थ करने के लिए विभाग के मुखिया को सिफारिश करने का दाव उल्टा पड़ गया। चल रही चर्चाओं पर यकीन करें तो माननीय ने एक विवादित उपनिरीक्षक को अपने क्षेत्र की हाइवे पर पड़ने वाली चौकी का प्रभारी बनाने के लिए सिफारिश की थी, लेकिन साहब ने उपनिरीक्षक की कार्य प्रणाली के कारण साफ शब्दों में इंकार कर दिया।
इस बीच यही उपनिरीक्षक एक मामले में ऐसे फंसे की उन पर निलंबन की गाज गिर गई है। चर्चा है कि अधिकारी ने सिफारिश को दरकिनार कर राजनीतिक दबाव बनाने की वजह से भी उपनिरीक्षक को यह दंड दिया है। वैसे चर्चा यह भी है कि माननीय ने उपनिरीक्षक के निलंबन के बाद उसे बाहल करने के लिए भी साहब को फोन घनघनाया है, फिलहाल उन्हें सफलता नहीं मिली है।
राजनीति में उलझा मामला
विपक्षी पार्टी के एक पूर्व प्रमुख का एक फिटनेस सेंटर का मामला खटाई में पड़ता दिख रहा है। चर्चा है कि सत्तारूढ़ पार्टी के एक प्रमुख नेता को निशाना बनाने की वजह से यह मामला उलझन में पड़ गया है। पूर्व प्रमुख इस मामले में किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश कर रहे हैं जो अदिवासी होने के साथ अपने बताए अनुसार शिकायत कर सके। इसके लिए सत्तारूढ़ पार्टी के प्रमुख नेता को भी इशारो ही इशारो में बताने का प्रयास किया गया है। हालांकि उनके इस सेंटर के पीछे क्या अड़ंगा आया, इसे लेकर राजनीतिक पारा चढ़ा होने की चर्चा शहर में चल रही है। देखना यह है कि इस मामले में का पटाक्षेप या अंत कैसे होता है?
लाल बत्ती की आस में बढ़ी चहलकदमी
सत्तारूढ़ पार्टी में किसी भी समय निगम मंडल अध्यक्षों-उपाध्यक्षों की सूची जारी हो सकती है। यह सुगबुगाहट एक माह से लगातार सुनने में आ रही है। जिले से भी लाल बत्ती पाने के लिए वरिष्ठता का हवाला देकर पार्टी के नेता अपने ही जिले के प्रदेश मुखिया से राजधानी जाकर मिलने से नहीं चूक रहे हैं। इसमें मुलताई क्षेत्र से विधानसभा टिकट के दावेदार रहे और आरएसएस से जुड़े एक वरिष्ठ नेता का भी नाम सामने आया है।
वे खुद अपने लिए लाबिंग कर रहे हैं। यह अकेले नेता नहीं है जो लाल बत्ती के लिए प्रयास कर रहे हो, उनके अलावा सत्तारूढ़ पार्टी के पूर्व जिला प्रमुख ने भी वजनदारी से अपनी बात हाईकमान तक रखी है। चूंकि संगठन का मुखिया बैतूल से है, इसलिए संभावना कम है कि जिले से किसी की लाटरी लगे, लेकिन एक पूर्व विधायक का नाम खासा चर्चा और अंतिम चरणों में बताया जा रहा है।




