Betul News: जेएच की क्रय समिति में प्राध्यापकों के हाथों में खरीदी की कमान

स्टेशनरी की खरीदी में गुणवत्ता होगी नजरअंदाज

Betul News: बैतूल। पीएम श्री जेएच कॉलेज में सत्र खत्म होने की कगार पर है लेकिन अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों को अभी तक स्टेशनरी वितरण का कोई ठिकाना नहीं है। पड़ताल में खरीदी के लिए गठित की गई क्रय समिति को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। समिति में प्रशासनिक या तकनीकी विशेषज्ञों के बजाय अधिकांश जिम्मेदारी उन प्राध्यापकों के हाथों में सौंप दी गई है जिनका कार्य केवल अध्यापन कार्य कराया जाना है। ऐसे में खरीदी में पारदर्शिता और सामग्री की गुणवत्ता सही हो इसका पता लगाना संशय निर्मित कर रहा है।

विशेषकर स्टेशनरी जैसी दैनिक उपयोग की सामग्री की खरीदी को लेकर ऐसे में कालेज के विद्यार्थियों और छात्र संगठनों में असंतोष देखा जा रहा है। सवाल भी उठाए जा रहे हैं कि, जिस सुविधा का लाभ समय रहते विद्यार्थियों को मिल जाना था, उसमें इतना विलंब आखिर क्यों किया जा रहा है। क्रय समिति में तकनीकी जानकारों को नजर अंदाज कर खरीदी कैसे की जा रही है। छात्र संगठन से जुड़े पदाधिकारी इस खरीदी में बड़े झोल की तरफ भी इशारा कर रहे हैं।

सूत्रों के अनुसार क्रय समिति में शामिल प्राध्यापक शैक्षणिक दायित्वों के साथ-साथ अब खरीदी प्रक्रिया का भी संचालन कर रहे हैं। समिति में प्रोफेसर ओपी खत्री को संयोजक बनाया गया है। इसके अलावा डॉ बी डी नागले, डॉ राजेश शेसकर,प्रोफेसर शंकर सातनकर, प्रोफेसर ऋषिकांत पंथी और प्रोफेसर संजय विश्वकर्मा बतौर सदस्य बनाये गए हैं। जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीदी एक तकनीकी और प्रक्रियात्मक कार्य है, जिसमें गुणवत्ता मानक, दर विश्लेषण और आपूर्तिकर्ताओं की विश्वसनीयता की गहन समझ आवश्यक होती है।

ऐसे में यदि यह जिम्मेदारी बिना अनुभव के दी जाती है तो गुणवत्ता से समझौता होना तय माना जा रहा है। स्टेशनरी सामग्री जैसे कागज, पेन, फाइल, रजिस्टर, प्रिंटर इंक आदि सीधे तौर पर शैक्षणिक और कार्यालयीन कार्यों से जुड़ी होती है। पूर्व में भी कई संस्थानों में घटिया गुणवत्ता की स्टेशनरी खरीदे जाने की शिकायतें सामने आ चुकी हैं, जिससे न केवल सरकारी धन की बर्बादी हुई बल्कि कामकाज भी प्रभावित हुआ। जेएच में भी यही स्थिति दोहराए जाने की आशंका जताई जा रही है।

अब इसके पीछे प्रबन्धन की क्या मंशा है यह भगवान ही जानता है। सूत्रों के मुताबिक यदि खरीदी समिति में लेखा शाखा, स्टोर प्रभारी या तकनीकी जानकारों को शामिल किया जाता तो निर्णय अधिक व्यावहारिक और पारदर्शी हो सकता था। उन पर खरीदी जैसी जिम्मेदारी डालना उनके मूल शैक्षणिक कार्यों से ध्यान भटकाने वाला है।

अब सवाल यह उठता है कि क्या जेएच प्रबंधन गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए कोई ठोस निगरानी तंत्र विकसित करेगा या फिर स्टेशनरी खरीदी में भी औपचारिकता निभाकर काम चला लिया जाएगा। यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया, तो सम्भव है कि, यह व्यवस्था आगे चलकर विवाद और जांच का विषय बन सकती है।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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