Politics: राजनीतिक हलचल: किस माननीय के पीए बन बैठे सुपर बॉस?? अंक बढ़ाने के चक्कर मे कौन भूल बैठे नेताजी और आजाद में अंतर??? पहले हुई नियुक्ति रद्द, अब डींगें हांकने में कौन नहीं छोड़ रहा कसर????? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……

माननीय के पीए सुपर बॉस
जिले के एक वरिष्ठ माननीय के पीए इन दिनों सुपर बॉस हो गए हैं। दरअसल माननीय अपने क्षेत्र में सक्रिय नहीं रहते हैं। वे यदा-कदा ही कार्यक्रमों में नजर आते हैं। इसका फायदा उनके पीए उठा रहे हैं। चर्चा है कि उनके पीए अचानक सर्वेज्ञानी भी हो चुके हैं। इसका भान उन्हें होने पर अपना नजरिया बदल दिया है।
उन्हें करीब से जानने वालों ने बताया कि माननीय के पीए न सिर्फ अधिकारियों बल्कि कार्यकर्ताओं से भी सीधे मुंह बात नहीं कर रहे। इससे उनकी कार्यप्रणाली पर नाराजगी बढ़ती जा रही है। खबर तो यह भी है कि सुपर बॉस बने उनके पीए माननीय के भी कान भरने में कोई कसर पूरी नहीं छोड़ रहे हैं। उन पर आंख बंधकर भरोसा करना माननीय के लिए लगातार नुकसानदेही साबित होते जा रहा है। इसके पहले यह पीए एक शीर्ष महिला जनप्रतिनिधि के पास भी दो मर्तबा काम कर चर्चा में रह चुके हैं।
नेताजी की जगह आजाद की फोटो बनी हंसी का पात्र
अंक बढ़ाने की चाहत में राजनीति में क्या हो जाए, यह कहा नहीं जा सकता। पिछले दिनों आठनेर क्षेत्र में एक पार्टी के नेताओं ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर चंद्रशेखर आजाद की फोटो लगाकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित कर डाले। हैरानी की बात यह है कि श्रद्धांजलि अर्पित करने वालों में क्षेत्र के ब्लाक प्रमुख के अलावा वरिष्ठ नेता भी शामिल थे, लेकिन किसी को आभाष नहीं हुआ कि नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जगह वे जिन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं, फोटो में चंद्रशेखर आजाद।
इतना करने के बाद भी किसी को अपनी गलती का एहसास नहीं हुआ । सोशल मीडिया पर चंद्रशेखर आजाद की चित्र के समक्ष फोटो खींचवाकर सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर शत-शत नमन करने का उल्लेख कर दिया। यह फोटो वायरल होने के बाद सत्ता पक्ष और कई अन्य लोगों ने जयंती मनाने वालों की बुद्धि पर खूब चटकारे लगाए। कहा जा रहा है कि जिला प्रमुख की नजरों में आने के लिए जयंती मनाई थी और हो गया कुछ और उल्टा।
समिति भंग होने पर खूब चर्चा
विपक्षी पार्टी की एक वरिष्ठ नेताओं की समिति भंग होने पर राजनैतिक बहस छिड़ी हुई है। इसे प्रदेश कार्यालय से पार्टी प्रमुख ने अनुमोदित नहीं करवाया, शिकायत हुई तो इसे रद्द करने पर खुद पार्टी प्रमुख घिर गए। चर्चा है कि पार्टी प्रमुख के जबरिया समर्थक पहले उनकी फजीहत का कारण बन चुकी है, अब खुद तरह-तरह की डिंगे हाककर यह किया, वह किया के किस्से चेले-चपाटियों को सुनाई देते हैं, लेकिन अनुशासन जैसी समिति भंग होना उनके लिए किसी हार से कम नहीं है। अब नई समिति कब बनेगी यह तो वक्त बताएगा, लेकिन चर्चा है कि जबरिया समर्थकों को सबसे ऊपर बताने के लिए झूठे-सच्चे दांवे करना पार्टी प्रमुख की परेशानी का कारण बन गया है।




