Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: रेप की शिकायत दबाने पर किस थानेदार की बढ़ी परेशानी?? यह साहब क्यों गुनगुना रहे हमसे का भूल हुई, जो सजा हमका मिली??? कौनसा मामला इन साहब की गले की हड्डी बना???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

रेप की शिकायत पर बढ़ी थानेदार की परेशानी
पुराने थाने में पदस्थापना के दौरान एक थानेदार की रेप की शिकायत के मामले ने परेशानी बढ़ा दी है। बताया जाता है कि किसी दुराचार पीड़िता के मामले में पुरानी पदस्थापना की एक शिकायत बड़े साहब के कार्यालय में पेडिंग है। इस पर कोई कार्रवाई नहीं होने पर हाल ही में शिकायकर्ता की एएसपी से भी मुलाकात होने की खबर है।
कहा जा रहा है कि मामला इतना संगीन है कि इसे देख अधिकारियों को भी समझ आ गया है कि जांच हुई तो थानेदार की परेशानी बढ़ जाएगी। मामला संगीन होने के बाद इस पर कार्रवाई न होने को लेकर थानेदार की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान खड़े हो गए हैं। शिकायकर्ता के अधिकारियों से मिलते ही थानेदार की परेशानी भी बढ़ गई है। यह वही थानेदार है जो अपनी पुरानी पदस्थापना के दौरान चर्चा में रहे और तबादले के बाद काफी करीब के ही थाने का जिम्मा संभाल रहे हैं।
हमसे का भूल हुई जो सजा हमका मिली
राजस्व विभाग में महत्वपूर्ण पद से विदाई होने के बाद एक अधिकारी पर उपरोक्त पंक्तियां सार्थक साबित हो रही है। वैसे तो उन्हें जिस जिम्मेदारी से हटाकर दूसरी जवाबदारी सौंपी गई है, वह भी सम्मानजनक है, लेकिन उन्हें यह रास नहीं आ रहा है। स्टाफ के कर्मचारियों को अक्सर वे कहते हैं कि हमसे का भूल हुई जो सजा हमका मिली? साहब की इस बात को कर्मचारी भी मनोरंजन के तौर पर ही ले रहे हैं।
हाल ही में मीडिया को भी उन्होंने इस बात का एहसास करा दिया कि जब वे पद पर थे तो उन्हें सहयोग नहीं किया गया और अब जिस मैडम को जिम्मेदारी दी गई है, वह फोन न उठाने से लेकर तरह-तरह की बहाने बता रही हैं, इसमें मेरी क्या गलती? मीडिया को नसीहत दे रहे हैं कि स्वंय थे तो पूरा सहयोग मिलता था, लेकिन अब नहीं मिलने पर आप लोगों की जवाबदारी। यह साहब राजस्व में अपनी पदस्थापना के दौरान हनुमान भक्ति के लिए काफी चर्चित थे।
गले की हड्डी बन रहा चर्चित मामला
जमीन से जुड़ा एक चर्चित मामला प्रशासन के अधिकारियों की गले की हड्डी बन गया है। चर्चा है कि बड़े साहब जनहित के चक्कर में परेशान होकर दो बार मिलॉड से मुलाकात कर चुक हैं। उन्होंने इस मामले के सहज निपटारे की गुजारिश का आग्रह कर डाला। चूंकि इस मामले में साहब के बॉस भी लपेटे में आ रहे हैं, इसलिए मिलॉड की शरण में जाकर निपटारे में लगे हुए हैं। बताया तो यह भी जाता है कि मामला सामने आने पर भोपाल के बॉस ने साहब की क्लास ली तो डैमेज कंट्रोल के लिए मिलॉड की शरण में जाने के अलावा खंडन-मंडन और मान-मनोव्वल का दौर जारी है।




