Betul Samachar: स्वच्छता मिशन के घोटाले में पुलिस के साथ प्रशासन भी कटघरे में!

Betul News: Along with the police, the administration is also in the dock in the Swachhta Mission scam!

अब तक क्या हुई जांच, खुलासा नहीं, डीएससी पर भी उठ रहे सवाल

Betul Samachar: बैतूल। पुलिस ने चिचोली-भीमपुर जनपद में हुए स्वच्छता मिशन घोटाले में भले ही दो आरोपियों को गिरफ्तार कर पीट थपथपाने का काम किया, लेकिन मुख्य आरोपियों तक पहुंच न होने के कारण कार्रवाई पर सवाल उठना लाजमी है। पुलिस के बाद अब जिला प्रशासन द्वारा कराई जा रही जांच भी कटघरे में आ खड़ी हुई है। दरअसल जिला पंचायत सीईओ ने पूर्व में ही कहा था कि जनपद सीईओ की भूमिका और अन्य जांच को लेकर कमिश्रर नर्मदापुरम को प्रतिवेदन भेजा जा चुका है।

सवाल उठ रहा है कि ढाई माह में भी प्रशासन की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाएगी। इसी वजह जिम्मेदार लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब डीआईसी चोरी हुई तो जांच कमेटी को मालूम था। इसके बाद भी बेगुनाह को आरोपी बनाकर असली लोगों को बचाने का प्रयास किया गया। इस सवाल के जवाब पर अधिकारी भी कुछ नहीं बोल पा रहे हैं। यही वजह है कि पुलिस के बाद जिला प्रशासन भी 13 करोड़ के घोटाले में अपनी भूमिका स्पष्ट नहीं कर पाया है।

प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन ग्रामीण में चिचोली और भीमपुर जनपद में जिस तरह वर्षों से घोटाला चलते रहा। कलेक्टर और जिला पंचायत की सीईओ की जांच में 13 करोड़ 21 लाख का गड़बड़झाला सामने आने के बाद पुलिस ने जिला पंचायत के एक अधिकारी की रिपोर्ट पर चिचोली में एफआईआर दर्ज करा दी। लंबे समय तक जिला प्रशासन और पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई। यही वजह है कि आरोपी खुला घूमते रहे। लोगों के आरोप है कि इससे जांच भी प्रभावित हुई। इसके बावजूद कान जूं नहीं रेंगी। पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर मुख्य आरोपी बना दिया , लेकिन शेष मुख्य आरोपियों को नहीं पकड़ सकी। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब जिला प्रशासन द्वारा इस मामले में आगे की कार्रवाई पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

भाजपा नेता बार-बार कर रहे दावा-कार्रवाई नहीं होगी

चौकाने वाली बात यह है कि सांझवीर टाईम्स द्वारा इस घोटाले पर लगातार खबरें प्रकाशित की जा रही है। सोशल मीडिया पर तीखी प्रतिक्रिया भी लगातार सामने आ रही है। शाहपुर जनपद के पूर्व उपाध्यक्ष विशाल सिंह ठाकुर और घोड़ाडोंगरी के भाजपा नेता दीपक उइके तो घोटाले में पहले ही गंभीर आरोप लगा चुके हैं। सांझवीर के गतांग में खबर प्रकाशित होने के बाद ठाकुर ने तो दोहराया है कि उन्होंने पहले ही कहा था कि मामले में कोई कार्रवाई नहीं होगी। यदि जांच पुलिस सही कर लेगी तो जांच कमेटी जेल चली जाएगी।

उनका आरोप है कि जांच कमेटी जिले के वरिष्ठ अधिकारियों के करीब है। वरिष्ठ अधिकारियों को अपने खास लोगों को बचाना है। उन्होंने सांझवीर को सलाह भी दी है कि जांच कमेटी से सिर्फ यह पूछ लिया जाए कि डीएससी चोरी हुई है, इसकी जानकारी उनके पास कैसे आई? डीआईसी चोरों को जानते हैं तो आरोपी को भी जांच कमेटी जानती होगी। जांच कमेटी सबसे बड़ी गुनाहगार है जो बेगुनाह को आरोपी बनाकर मुख्य आरोपी को बचाना चाह रही है। उन्होंने तंज कसा है कि जिपं की जांच कमेटी से बेहतर काम इस देश में कोई और नहीं कर सकता। यह घोटाला इसका उदाहरण है।

स्थिति स्पष्ट नहीं कर रहा प्रशासन

यह मामला सुर्खियों में आने के बाद पूरे जिले के प्रशासनिक अमले हड़कंप मचा था। शुरू में तो अधिकारियों ने घोटाले को लेकर काफी गंभीरता दिखाई, लेकिन जैसे-जैसे प्रकरण आगे बढ़ा, मामला कछुआ चाल तरफ बढ़ गया। आरोपियों पर एफआईआर करवाने के बाद प्रशासन ने तीन वर्ष तक पदस्थ रहे सीईओ पर कार्रवाई के लिए कमिश्रर कार्यालय से अभिमत मांगा गया था, लेकिन आज तक स्पष्ट नहीं हो सका कि प्रशासन इस मामले में क्या कार्रवाई कर रहा है।

इसी वजह मामला लंबा खींचने के कारण आरोपियों को जमानत और कानूनी कार्रवाई करने का मौका मिल गया। इसी वजह जनप्रतिनिधि और अन्य लोग भी काफी नाराज बताए जा रहे हैं। इस संबंध में जिपं सीईओ अक्षत जैन को उनके मोबाइल 9706675545 पर काल किया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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