Betul News: डॉक्टरों को पीएम-आकस्मिक ड्यूटी भत्ता देने से परहेज

इसलिए पीजी करने गए डॉक्टर नहीं आ रहे बैतूल, डॉक्टरों की शिकायत पर तुरंत पहुंचे कलेक्टर
Betul News: बैतूल। जिले में वैसे ही डॉक्टरों की कमी है। इसके बावजूद सीएमएचओ कार्यालय की तथाकथित मनमानी के कारण हालात और बिगड़ते जा रहे हैं। राज्य शासन द्वारा डॉक्टरों को आकस्मिक ड्यूटी, पोस्ट मार्टम एवं सुषेण भत्ता दिए जाने का प्रावधान किया है, लेकिन बैतूल में डेढ़ वर्षों से यह भुगतान नहीं किया गया है। इससे डाक्टरों की परेशानी बढ़ गई है। कई बार आवेदन देने के बावजूद सीएमएचओ और संबंधित लिपिक ने भत्ता देने में वर्षों लगा दिए तो नाराज डॉक्टरों ने सोमवार को कलेक्टर से मिलकर इस मामले की शिकायत की। मामले को गंभीरता सुनने के बाद संवेदनशील कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने सीएमएचओ आफिस का आकस्मिक निरीक्षण किया और संबंधित फाइलों को खंगाला। इसके अलावा उन्होंने न सिर्फ कर्मचारी बल्कि सीएमएचओ को जमकर फटकार लगाई है। बताया जाता है कि बजट आने के बावजूद सीएमएचओ आफिस से जानबूझकर डॉक्टरों को भुगतान नहीं किया जा रहा था।
बताया जाता है कि सरकार की महत्वकांक्षी योजना के तहत आदिवासी क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को देखते हुए डॉक्टरों को प्रोत्साहन के तहत पोस्टमार्टम, आकस्मिक ड्यूटी और सुषेण भत्ता दिया जाता है। यह भत्ता नियमित और संविदा डॉक्टटरों को अलग-अलग दिए जाने का प्रावधान है। जानकारी सामने आई है कि डॉक्टरों द्वारा देयक प्रस्तुत करने पर मूल वेतन के साथ प्रतिमाह उक्त भत्तों का भुगतान दिए जाने का नियम है। सबसे बड़ी बात यह है कि प्रदेश के अन्य जिलों में हर माह समय पर इन भत्तों का भुगतान किया जा रहा है, लेकिन बैतूल में पिछले 18 माह से भुगतान नहीं किया गया है। इसी वजह संविदा एवं नियमित डॉक्टरों आक्रोश पनप रहा है।
पीजी के लिए गए डॉक्टर नहीं आ रहे वापस
जानकारी मिली है कि डॉक्टरों द्वारा कई बार सीएमएचओ और कार्यालय में उक्त भत्तों के भुगतान के लिए आवेदन दिए, लेकिन बताया गया गया कि बजट नहीं आने के कारण भुगतान नहीं किया जा रहा है, जबकि अन्य जिलों की तरह बैतूल को नियमित रूप से बजट दिए जाने की जानकारी सामने आई है। इस बात से जाहिर है कि सीएमएचओ कार्यालय में संबंधित शाखा के कर्मचारियों की लापरवाही के कारण डॉक्टरों को भत्ते का भुगतान नहीं किया जा रहा है। हालात यह है कि डॉक्टर भत्ते के लिए चक्कर काटकर परेशान हो गए, लेकिन उन्हें बार-बार वापस लौटाया जा रहा है। इससे आहत होकर डॉक्टर बैतूल से पीजी करने के लिए जाने के बाद वापस लौटकर नहीं आ रहे हैं। इसके कई उदाहरण सामने आ चुके हैं। बताया जाता है कि जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर पीजी करने के बाद अपनी पदस्थापना भोपाल या गृह जिले के आसपास करवा रहे हैं। इतने बड़े मामले में सीएमएचओ ने जरा भी प्रयास नहीं किए। इसी वजह हालात बिगड़ गए।
डॉक्टरों ने खोला मोर्चा तो कलेक्टर का छापा
बताया जाता है कि सोमवार करीब आधा दर्जन डॉक्टरों ने कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी से उनके कार्यालय में मुलाकात की और पूरी वस्तुस्थिति से अवगत कराया। डॉक्टरों ने कलेक्टर को बताया कि पूर्व में भी कई बार शिकायत करने के बाद सीएमएचओ ने शाखा के कर्मचारियों को उक्त भुगतान करने संबंधित कोई निर्देश नहीं दिए और न ही इन पर कोई कार्रवाई की। इसी वजह कलेक्टर के पास शिकायत करने आना पड़ा। डॉक्टरों ने कलेक्टर को बताया कि इन भत्तों के भुगतान के लिए नियमित रूप से पर्याप्त धन राशि शासन द्वारा उपलब्ध कराए जाने के बावजूद आनाकानी की जा रही है। इससे डॉक्टर काफी परेशान हो चुके हैं।
शिकायत पर आयुक्त भी पहुंची थी, फिर भी नजरअंदाज
चौकाने वाली बात यह है कि बैतूल के डॉक्टरों ने भत्त्ते न मिलने के कारण भोपाल में क्षेत्रीय संचालक और स्वास्थ्य आयुक्त को शिकायत की थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयुक्त ने दिसंबर माह में बैतूल पहुंचकर सीएमएचओ और संबंधित लेखाकार संतोष राय को फटकार भी लगाई थी, लेकिन उनके वापसी होने के बाद उनका रवैया पुराने ढर्रे जैसा हो गया। हालात यह है कि एक माह बाद भी आयुक्त के निर्देश पर प्रति पोस्टमार्टम का 400, इमरजेंसी ड्यूटी का 500 और सुषेण का 30 हजार रुपए प्रतिमा दिए जाने वाला भुगतान नहीं दिया गया है। इस संबंध में कलेक्टर नरेंद्र कुमार सूर्यवंशी को उनके मोबाइल 7692970993 पर काल किया, लेकिन उन्होंने रिसीव नहीं किया।
इनका कहना….
कलेक्टर साहब औपचारिक निरीक्षण करने आए थे। इतना जरूर है कि डॉक्टरों के भत्ते को लेकर उन्होंने निर्देश दिए थे। हमने अधिकांश डाक्टरों के खाते में राशि डाल दी। शेष चार डाक्टरों के खाते में भी राशि जल्द डाल दी जाएगी।
डॉ मनोज हुरमाड़े, सीएमएचओ बैतूल




