Betul News: फसाद की जड़: बैतूल में ढाबे बने अघोषित आहते

हर ढाबे में केबिन बनाने पर उठ रहे सवाल, आबकारी विभाग की भूमिका संदिग्ध
Betul News: बैतूल। जिला मुख्यालय और आसपास बड़ी संख्या में ढाबे तो खुल गए हैं, लेकिन इसके लिए कोई गाइडलाइन न बनाना पुलिस प्रशासन और आम लोगों के लिए चुनौती बनता जा रहा है। ढाबों पर केबिन बनाकर अघोषित आहते बना दिए गए हैं। इन केबिन में देर रात तक शराब पीने वालों की महफिल आसानी से देखी जा सकती है। यही महफिल शराब के नशे में विवाद का कारण बन रही है, लेकिन न तो आबकारी विभाग और न ही संबंधित थाना पुलिस ढाबों पर कार्रवाई कर रही है। नतीजा यह हुआ कि बैतूल शहर के आसपास बड़ी संख्या में नए ढाबे खुलते जा रहे हैं।
लजीज व्यंजन के लिए किसी समय ढाबों पर जाने के लिए लोगों की उत्सुकता देखती बनती थी। पारिवारिक माहौल में शाकाहारी भोजन करने का लुफ्त उठाने के लिए मध्यम वर्गीय परिवार से लेकर धनाड्य लोगों के लिए भी ढाबा पहली पसंद थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से तथाकथित ढाबों पर शाकाहरी के साथ मांसाहरी भोजन साथ ही शराब पीने की व्यवस्था होने से ढाबों की गुणवत्ता पर ही सवाल उठने लगे हैं। दरअसल जिला खाद्य एवं औषधि विभाग ने आज तक कभी प्रेसनोट जारी कर यह नहीं बताया कि किसी ढाबे पर गुणवत्ता की जांच की गई है। इन ढाबों के किचन में गंदगी से सरोबार होकर बनने वाले भोजन की गुणवत्ता पर सवाल उठाएं जाते हैं। दूसरी तरफ शराब के प्याले देर रात तक झलकने से ढाबे मयखाना बनते जा रहे हैं।
विवाद की जड़ यही, फिर भी चुप्पी
चौकाने वाली बात यह है कि पिछले कुछ माह में ही इन ढाबों पर शराब के पिलाने की व्यवस्था ने माहौल खराब कर दिया है। हालात यह है कि शराब पीने के बाद आपस में ही दोस्त दुश्मन बन जा रहे हैं। चाकू, छूरी और हथियार चलना आम बात हो गई है, लेकिन न तो आबकारी विभाग ने न तो इन ढाबों की तरफ झांकना उचित समझा और न ही पुलिस विभाग के नुमाइंदें यहां पर पहुंचे। इसी वजह पूरे फसाद की जड़ ढाबे पर शराब पिलाने की पटकथा सामने आने पर भी आज तक कोई कार्रवाई या अभियान आबकारी- पुलिस विभाग ने नहीं चलाया है। इसका फायदा ढाबा संचालक उठा रहे हैं। शहर से सटे बैतूल बाजार रोड, खेड़ी मार्ग, पाढर मार्ग, फोरलेन, आठनेर रोड पर खुले ढाबे पर यदि एक बार आबकारी विभाग और पुलिस विभाग के अधिकारी खुद सिविल ड्रेस में पहुंचकर नजारा देखे तो सांझवीर की इस खबर की शत प्रतिशत पुष्टि हो जाएगी।
ढाबे पर मिल रहा भोजन, फिर केबिन क्यों?
चौकाने वाली बात यह है कि ढाबों के सामने लगे फ्लैक्स और बोर्ड पर शुद्ध शाकाहरी और मांसहारी भोजन उपलब्ध कराने के दावे किए जा रहे हैं, फिर ढाबे के अंदर प्रवेश करते ही बड़ी संख्या में छोटे-छोटे केबिन किस आधार पर बने हैं? इस तर्क पर जिला प्रशासन के अधिकारी नहीं पहुंच पा रहे हैं। ढाबा पहुंचने वाले परिजनों का कहना है कि अधिकांश जगह ऐसे हालात है कि अंदर पहुंचते ही शराब की बू आने से यहां का माहौल पता चल जाता है, इसलिए ढाबे अब केवल शराब पीने का अड्डा बनकर रह गए हैं। पारिवारिक माहौल में भोजन करने के लिए अब केवल शहर और आसपास की होटलें ही परिवार के सदस्यों की पहली पसंद बनी है।
इनका कहना….
हम रूटिन कार्रवाई करते रहते हैं। ढाबों पर विवाद के लिए जिम्मा पुलिस का है, लेकिन केबिन बनाकर शराब पिलाने के मामले में हम अब सतत अभियान चलाकर हम कार्रवाई करेंगे।
अंशुमन चढ़ार, जिला आबकारी अधिकारी बैतूल




