Electricity Bill Scam: 40 लाख का बिजली बिल घोटाला: दो माह बाद भी नतीजा शून्य

पुलिस जांच की रफ्तार सुस्त, जनपद बैतूल पुलिस को जांच के लिए सौंप चुकी दस्तावेज
Electricity Bill Scam: बैतूल। जनजातीय कार्य विभाग के छात्रावासों में बिजली बिल भुगतान को लेकर सामने आए करीब 40 लाख रुपए के कथित फर्जीवाड़े की जांच में अब तक कोई ठोस प्रगति नहीं हो सकी है। चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। कयास लगाए जा रहे हैं कि अन्य घोटालों की तरह यह मामला भी ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा। मामला उजागर होने के बाद विभाग ने संबंधित फाइलें और भुगतान रिकॉर्ड पुलिस को सौंप दिए थे, लेकिन कई महीने बीत जाने के बाद भी जांच उसी जगह अटकी है, जहां से शुरू हुई थी। हालांकि कोतवाली टीआई जांच पूरी होने का भरोसा तो दे रहे हैं। लेकिन जांच कहां तक पहुंची इस सवाल का जवाब देने से साफ बचते भी नजर आ रहे हैं।
एक ही महीने में दो दो बार हुए बिजली बिलों के भुगतान
जानकारी के अनुसार जिले में प्रभात पट्टन, आमला और मुलताई स्तिथ छात्रावासों में बिजली बिलों के भुगतान का मामला जनपद पंचायत सीईओ शिवानी राय ने पकड़ा था। तीन कर्मचारी मिलकर वर्ष 2018 से फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहे थे। संचालित छात्रावासों के बिजली बिलों का भुगतान एक नहीं बल्कि दो बार किया जाना पाया गया था। जब इसका हिसाब किताब किया गया तो 40 लाख के फर्जीवाड़े की कहानी सामने आ गई। फर्जीवाड़े को लेकर कर्मचारियों पर निलंबन की कार्यवाही कर कोतवाली थाने में एफआईआर किये जाने के लिए आवेदन दिया गया। प्रारंभिक जांच में राशि का भुगतान फर्जी खातों में किया जाना सामने तो आया, लेकिन पुलिस की जांच का अभी तक किसी खास नतीजे पर ना पहुंचना विभागीय अधिकारियों की ही किरकिरी करवा रहा है।
टीआई बोले- नहीं मिले दस्तावेज, सीईओ बोली- दे दिए गए
इस पूरे मामले में जनपद पंचायत और पुलिस विभाग द्वारा दी गई जानकारियों में ही विरोधाभास की स्तिथि देखने को मिल रही है। कार्यवाही को लेकर टीआई नीरज पाल ने बताया कि मामले में एफआईआर तो होगी। जांच के लिए कुछ दस्तावेज जनपद से मांगे गए थे, जो अभी प्राप्त नहीं हुए हैं। जैसे ही दस्तावेज मिलेंगे जांच आगे बढ़ाई जाएगी। वहीं दूसरी तरफ जनपद सीईओ शिवानी राय ने बताया की, पुलिस ने खातों से सम्बंधित जो दस्तावेज मांगे थे वो दे दिए गए हैं।
इसके अलावा और कुछ नहीं मांगा गया। दोनो अधिकारियों के बीच ही बयानों में विरोधाभास साफ नजर आ रहा है। क्या सच है और क्या झूठ ये तो अधिकारी ही जाने लेकिन जिस तरह से जांच सुस्त रफ्तार से की जा रही है। यह रवैय्या स्थानीय जनप्रतिनिधियों और उच्च अधिकारियों की छवि भी खराब कर रहा है। आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई न होने से विभागीय कर्मचारियों में भी असंतोष है। छात्रावासों के विद्यार्थियों का कहना है कि बजट घोटालों के कारण कई बार छात्रों को मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रहना पड़ता है। फिलहाल जनता की नजरें जांच परिणाम पर टिकी हैं और इंतजार इस बात का है कि पुलिस आखिर कब इस फर्जीवाड़े की असली परतें खोलेगी।
इनका कहना…..
मामले की जांच की जा रही है, कुछ दस्तावेज जनपद से मांगे हैं जो अभी नहीं मिले हैं इनके मिलते ही जांच आगे बढ़ाएंगे।
नीरज पाल टीआई, कोतवाली बैतूल
पुलिस ने खातों से सम्बंधित जानकारी मांगी थी वह उपलब्ध करवा दी गई है। इसके अलावा कोई दस्तावेज नहीं मांगे गए ।
शिवानी राय, सीईओ जनपद पंचायत बैतूल




