राजनीतिक हलचल : किस परिपक्व नेता की नासमझ राजनीति, पुलिस के एसआई के इशारे पर चल रहे? आखिर एक नेता को क्यों पड़ी भोलेनाथ से ताबीज़ मांगने की जरूरत?? विपक्षी पार्टी के कौनसे नेता की ब्यूरोक्रेसी से बड़ी नजदीकी??? पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में……
Political turmoil: Which mature leader's mindless politics is being followed on the instructions of the police SI? After all, why did a leader need to ask for a talisman from Bholenath?? Which leader of the opposition party is very close to the bureaucracy??? Read our popular columns in political turmoil...

Political Column: राजनीति में छोटा नेता हो तो समझबूझ कम रहती है, लेकिन यदि प्रदेश के शीर्ष सदन तक कोई नेता पहुंच जाए और बचकाने जैसी हरकत करें तो सभी का चौंकना लाजमी है। एक क्षेत्र के शीर्ष सदन तक पहुंचे जनप्रतिनिधि का कान पिछले दिनों एक उपनिरीक्षक ने क्या फूंका उन्होंने शीर्ष अफसर की शिकायत भोपाल कर दी। वरिष्ठ नेताओं से भी चुनावी साल में सलाह तक नहीं ली गई।
भले ही ईमानदार अफसर का जिले से तबादला हो गया हो, लेकिन इन नेताजी को वरिष्ठों और अपने ही पार्टी के सीनियरों की नाराजगी का कोपभाजन बनना पड़ रहा है। अपने क्षेत्र में माल बटोरने वाले इस उपनिरीक्षक ने पहले भी नेताजी के कहने पर कई गलत काम किए, अब जिला मुख्यालय के पास आए तो भी उनकी एक कानफुकी गलती ने नेताजी का चहूं ओर विरोध बढ़ा दिया। खबर है कि नेताजी अब इस मामले से बचने की तरकीब ढूंढ रहे है।
भोलेनाथ से आखिर क्यों मांगा ताबीज
अपनी सादगी के लिए एक सुरक्षित सीट के बड़े नेता इन दिनों टिकट कटने से अपना दर्द सोशल मीडिया पर कह रहे है। उन्हें उम्मीद है कि कहीं न कहीं घोषित उम्मीदवार की टिकट काटकर उन्हें मिल जाए। शालीन और शांत स्वभाव के इस नेताजी ने पूर्व में कुछ पोस्ट करके सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा था, लेकिन एक देव स्थल पर पिछले एक सप्ताह पहले उन्होंने पूजा कर सोशल मीडिया पर एक ऐसा ताबीज मुझे भी दे दो भोलेनाथ, जिससे मैं चालाक हो जाऊं, बहुत नुकसान देती है, मुझे यह सादगी मेरी… कहकर फिर चर्चा बटोरी है।
आखिर इस वरिष्ठ नेता को कौनसा ताबीज लेने के लिए भोलेनाथ की शरण में जाना पड़ा। उन्होंने अपनी शालीनता का भी उल्लेख कर शीर्ष नेताओं को टिकट से वंचित रहने पर इशारों ही इशारों में अपनी बात कह दी है। वैसे सभी का इंतजार उनके अगले फैसले पर टीकी है।
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विपक्षी पार्टी के नेता की बड़े अफसर से गुटरगू
अब तक प्रदेश की राजनीति के अनुसार जिसकी सत्ता उसी के नेता हावी होने की बातें तो होते रहती है, लेकिन बैतूल में पिछले कुछ दिनों से उल्टी गंगा बह रही है। एक चुने हुए जनप्रतिनिधि की जिले के बड़े अफसर के साथ जुगलबंदी के चर्चे अब चौक चौराहों पर चर्चा का केन्द्र बन गए है। अब तक सत्तारूढ़ पार्टी के यह अफसर सारे काम करते है, लेकिन कुछ दिनों से इन्हें स्वाभाव में ऐसा परिवर्तन आया कि विपक्षी पार्टी के एक प्रमुख नेता को हाथों हाथ ले रहे है।
चर्चा चल रही है कि इस जनप्रतिनिधि के काम बिना जाए फोन पर ही हो जा रहे है, पर सत्तारूढ़ पार्टियों के कई महत्वपूर्ण काम आचार संहिता लगने के पहले ठेंगा दिया जा रहा है। यह बात सत्ता पक्ष के महत्वपूर्ण पदाधिकारियों को बता दी गई है, किंतु अफसर की भोपाल तक सेटिंग होने के कारण बाल भी बांका नहीं हो पाया है।




