Betul News: कांग्रेस अध्यक्ष की नियुक्ति पर पीसीसी चीफ के सामने बवाल
Betul News: Ruckus in front of PCC chief over the appointment of Congress president

हेमंत समर्थकों ने ओबीसी प्रतिनिधित्व पर उठाएं सवाल, नाराज कार्यकर्ताओं ने नहीं किया स्वागत, मोबाइल से वीडियो बना रहे कार्यकर्ताओं को भी रोका
Betul News: बैतूल। कांग्रेस संगठन में जिला अध्यक्ष की नियुक्ति को लेकर बैतूल में सियासी हलचल तेज हो गई है। हाल ही में कांग्रेस नेतृत्व द्वारा पूर्व विधायक निलय डागा को जिला कांग्रेस अध्यक्ष बनाए जाने की घोषणा के बाद से ही पार्टी के भीतर गुटबाजी खुलकर सामने आ गई है। पूर्व जिलाध्यक्ष हेमन्त वागद्रे के समर्थकों ने इस फैसले का जोरदार विरोध किया है और खुले मंच से सवाल उठाए हैं कि आखिर पार्टी द्वारा ओबीसी समाज को नजऱ अंदाज क्यों किया गया। आज छिंदवाड़ा प्रवास के लिए निकले पीसीसी चीफ जीतू पटवारी के सामने इसका जमकर विरोध किया गया। मामला की गंभीरता को देखते चर्चा के दौरान पटवारी ने सभी मोबाइल बंद करने को कहा, जो भी है लेकिन इस तरह की गुटबाजी आने वाले समय में जिले में कांग्रेस के लिए भारी नुकसान देह होने का संकेत दे रही है।
राहुल गांधी के संगठन सर्जन अभियान पर उठे सवाल
दरअसल लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संगठन सर्जन अभियान की शुरुआत करते हुए यह संदेश दिया था कि पार्टी में हर समाज और वर्ग का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित किया जाएगा। खासकर ओबीसी समाज को राजनीतिक रूप से आगे लाने की बात पर बार-बार जोर दिया गया, लेकिन बैतूल जिले में निलय डागा की नियुक्ति ने कांग्रेस की इसी रणनीति पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर दिया है। जिससे नसम जनता में निर्विवाद छवि के नेता हेमन्त वागद्रे को तवज्जो नहीं दी जा सकी। समर्थकों का यही कहना था कि जब पार्टी के नेता ओबीसी समाज की बात कर रहें हैं, तो हेमन्त को नजर अंदाज करने के पीछे आखिर राज क्या है ?
चुनावी समीकरणों पर पड़ेगा असर पडऩे की पूर्ण संभावना
राजनीतिक विशेषज्ञ माह्यनते हैं कि यह गुटबाजी कांग्रेस के लिए आने वाले समय में भारी नुकसानदेह साबित हो सकती है। एक ओर भाजपा पहले से ही मजबूत संगठन और रणनीति के बल पर क्षेत्र में पकड़ बना रही है, वहीं कांग्रेस के आंतरिक विवाद उसकी जमीनी ताकत को कमजोर कर सकते हैं। बैतूल की राजनीति में ओबीसी समाज की बड़ी भूमिका है। जिले की अधिकांश विधानसभा सीटों पर चुनावी समीकरण इसी वर्ग पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में ओबीसी समाज को दरकिनार कर किसी अन्य नेता को जिला अध्यक्ष बनाना कांग्रेस के लिए जोखिम भरा कदम माना जा रहा है। हेमन्त वागद्रे समर्थकों का कहना है कि यदि पार्टी ने उनकी उपेक्षा की तो कांग्रेस को आगामी चुनावों में करारी हार झेलनी पड़ सकती है।

फिर हरे हुए पुराने घाव, अभियान संकट में
जिस तरह एक बार फिर कांग्रेस की गुटबाजी सामने आई है, इससे साफ है कि पूर्व विधायक निलय डागा की नियुक्ति ने बैतूल कांग्रेस में पुराने घाव फिर हरे कर दिए हैं। राजनीति के जानकार कहते है कि कांग्रेस में गुटबाजी की यह तस्वीर बताती है कि राहुल गांधी का संगठन सर्जन अभियान जमीनी स्तर पर कमजोर पड़ता दिख रहा है। यदि पार्टी ने जल्द ही असंतोष शांत करने और कार्यकर्ताओं को एकजुट करने की पहल नहीं की तो इसका खामियाजा कांग्रेस को आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों में भुगतना पड़ सकता है।

मोबाईल बंद कराने के पीछे क्या था तर्क?
जानकारी के मुताबिक पूर्व जिला अध्यक्ष हेमन्त वागद्रे जो स्वयं ओबीसी समाज से आते हैं और वर्षों से कांग्रेस की जमीनी राजनीति से जुड़े रहे हैं, उनके समर्थकों को पार्टी के वरिष्ठ नेतृत्व का यह फैसला एक प्रकार से धोखा प्रतीत हो रहा है। इस नाराजगी का सबसे बड़ा प्रदर्शन तब देखने को मिला जब मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी छिंदवाड़ा प्रस्थान कर रहे थे। नेशनल हाईवे पर हेमन्त समर्थकों ने उनका घेराव किया और जमकर नारेबाजी की। स्थिति यह रही कि यहां हेमन्त समर्थकों ने पटवारी का स्वागत तक नहीं किया गया, न फूलमाला पहनाई और न ही गुलदस्ता भेंट किया गया।
कार्यकर्ताओं की नाराजगी को भापते हुए पीसीसी चीफ ने सभी कार्यकर्ताओं को वीडियो बनाने से रोक दिया, ताकि इसे वायरल ना किया जा सके। हालाकि उनकी यह बात भी कैमरे में केद हो गई। वैसे परंपरागत रूप से इस प्रकार के दौरों पर कांग्रेसजनों द्वारा बड़े स्तर पर नेताओं का स्वागत-सत्कार किया जाता रहा है। समर्थकों का यह स्पष्ट संकेत था कि कार्यकर्ता नए जिला अध्यक्ष कि नियुक्ति से बेहद असंतुष्ट हैं। ऐसे हालात में साफ है कि संगठन के फैसले से स्थानीय स्तर पर कांग्रेस में असंतोष की आग भडक़ रही है।




