Mother’s Day Special: मदर्स डे विशेष : बेटी का सपना न टूटे इसलिए इंजीनियर पति की अनुकम्पा नियुक्ति ठुकराई

बैतूल की सुनीता सोनी बनी प्रेरणा की मिसाल, बेटी को बनाया एमएस डॉक्टर
Mother’s Day Special: कोरोना काल की वह भयावह घड़ी आज भी सुनीता सोनी के मन में ताज़ा है, जब टीकमगढ़ में विद्युत कंपनी में पदस्थ उनके इंजीनियर पति महेश सोनी कोरोना संक्रमित हो गए थे। लंबे इलाज के बावजूद भोपाल में उनका निधन हो गया। उस समय परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, लेकिन सुनीता सोनी ने खुद को संभालते हुए अपनी इकलौती बेटी उर्विजा के सपनों को टूटने नहीं दिया।
सुनीता ने न केवल परिवार की जिम्मेदारियों को संभाला, बल्कि बेटी के डॉक्टर बनने के लक्ष्य को भी अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बनाया। इसी दृढ़ संकल्प के चलते उन्होंने पति की ओर से मिलने वाली अनुकम्पा नियुक्ति जटिल प्रक्रिया की वजह से ठुकरा दिया, ताकि पूरा ध्यान बेटी की उच्च शिक्षा पर केंद्रित रह सके।
आमला क्षेत्र के प्रतिष्ठित अधिवक्ता स्व. लखनलाल सोनी की पुत्री सुनीता सोनी का विवाह बिरुल बाजार निवासी शिक्षक स्व. रामदीन सोनी के पुत्र और विद्युत कंपनी में इंजीनियर रहे महेश सोनी से हुआ था। परिवार में बेटी उर्विजा के जन्म के बाद खुशियों का माहौल था। बचपन से ही उर्विजा का सपना डॉक्टर बनने का था, जिसे पूरा करने के लिए माता-पिता ने हर संभव सहयोग दिया।
2018 में उर्विजा ने कठिन परिश्रम के बाद एमबीबीएस की डिग्री हासिल की और डॉक्टर बनने का सपना पूरा किया। वर्ष 2019 में इंटर्नशिप पूरी की। इसके बाद उन्होंने एमएस की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया, लेकिन 2019-20 में कोरोना महामारी के कारण उनकी पढ़ाई और इंटर्नशिप प्रभावित हो गई।
दुखों का पहाड़ टूटा, फिर बेटी को पहुंचाया मुकाम पर
वर्ष 2021 में परिवार पर दुखों का सबसे बड़ा पहाड़ तब टूटा जब सुनीता के पति महेश सोनी का कोरोना संक्रमण के चलते निधन हो गया। इस कठिन समय में सुनीता टूट गईं, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने बेटी के भविष्य को प्राथमिकता देते हुए सरकारी अनुकम्पा नियुक्ति लेने से इंकार कर दिया। बेटी की आगे की पढ़ाई न रूके इसके लिए वर्ष 2022 में पीजी के लिए प्रवेश कराया और 2025 में पीजी की डिग्री पूरी की।
उर्विजा अपनी माता की मदद से फिलहाल विदिशा के अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय मेडिकल कॉलेज में सीनियर रेसीडंट पद पर कार्यरत है। तीन वर्षों के कठिन परिश्रम के बाद उर्विजा ने एमएस की डिग्री भी पूरी कर ली है। सुनीता सोनी की आंखें आज भी नम हो जाती हैं, लेकिन चेहरे पर गर्व भी झलकता है। उन्होंने बताया कि बेटी अब 6 सप्ताह की सोनोग्राफी फेलोशिप के लिए औरंगाबाद जाएगी, इसके बाद किसी बड़े अस्पताल में सेवाएं देकर वह अपने पिता के सपने को साकार करेगी।
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