Betul Samachar: डूब गया तवा खदान ई-9 सेक्शन, ई-8 को बचाना भी हुआ मुश्किल
Betul News: Tawa mine E-9 section drowned, saving E-8 also became difficult

अपनी लापरवाही छुपाने खदान में पानी भरने को अधिकारी बता रहे सामान्य
Betul Samachar: सारनी। भूमिगत कोयला खदान में पानी भरने से एक बार फिर वेकोलि पाथाखेड़ा क्षेत्र पूरे कोल इंडिया लिमिटेड में चर्चा में है। गौरतलब है कि मार्च 2025 में पाथाखेड़ा क्षेत्र की छतरपुर खदान के सीएम सेक्शन में रूफ फाल होने से माइनिंग सरदार, ओवरमेन और अंडर मैनेजर जैसे जिम्मेदार कर्मियों की मौत हो गई थी। इससे ऐसा प्रतीत होता है कि पाथाखेड़ा क्षेत्र की सबसे बड़ी दुर्घटना में शामिल इस घटना से कोल प्रबंधन ने कोई सीख नहीं ली। इसका प्रमाण तवा-1 खदान का एकमात्र कोयला उत्पादन वाला ई-9 सेक्शन पानी में डूबना है। खदान में तेजी से बढ़ रहे वाटर लेवल के चलते ई-8 सेक्शन का 65 और 64 लेवल भी लगभग डूब गया है। यहां मौजूद प्रॉपर्टी को भी ऊपर निकाला जा रहा है। कोयला खदान के जानकार सूत्र बता रहे हैं कि समय रहते पानी को नहीं निकाला गया तो तवा खदान और पाथाखेड़ा क्षेत्र के लिए यह चिंता का कारण बन जाएगा।
भूमिगत खदान में बढ़ रहे वाटर लेवल को गंभीरता से लेकर जांच करने डायरेक्टर जनरल ऑफ माइन सेफ्टी (डीजीएमएस ) पाथाखेड़ा आ सकते हैं। दरअसल डिप्लेरिंग के लिए डीजीएमएस की अनुमति लगती है। इसके लिए 4 बोर करने होते हैं, ताकि खदान से पानी बाहर निकाला जा सके। इसके बाद ही डिप्लेरिंग की जाती है। खदान में पानी भरने के पीछे गलत बोर करने की बात सामने आ रही है। ऐसी स्थिति में निरीक्षण करने डीजीएमएस का पाथाखेड़ा आना लगभग तय माना जा रहा है। वहीं खदान में भराए पानी को निकालने उक्त माइन में पूर्व में कार्यरत वरिष्ठ अधिकारियों की भी मदद मौजूदा प्रबंधन द्वारा ली जा रही है।

पाथाखेड़ा क्षेत्र में है तीन खदान
वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड पाथाखेड़ा क्षेत्र में तीन भूमिगत कोयला खदान है। इन खदानों में लगभग 2880 अधिकारी, कर्मचारी कार्यरत है। तवा खदान जहां पानी का लेवल बढ़ रहा है। उक्त खदान में 586 अधिकारी, कर्मचारी कार्यरत है। तीनों मौजूदा खदान में एलएचडी और सीएम मशीन की मदद से कोयला निकाला जाता है। 2008-9 से पहले पाथाखेड़ा क्षेत्र में 7 भूमिगत खदाने थी। बीते डेढ़ दशक में 4 खदाने बंद हो गई।
जंगल में खोज रहे क्रेक
जो अधिकारी एक सप्ताह पहले तक खदान में भराए पानी को सामान्य मान रहे थे। वहीं अधिकारी सर्वे, माइनिंग समेत अन्य टीमों को साथ लेकर जंगल में क्रेक्स खोज रहे हैं। सवाल यह है कि ई-9 सेक्शन में जिस वक्त पानी आ रहा था। उस समय उसे बाहर निकालने गंभीरता क्यों नहीं दिखाई गई और अब जब पूरी तरह सेक्शन पानी में डूब गया, तब सरफेस में तो क्रेक्स खोज लेंगे, लेकिन लोअर सिम से सेक्शन में आ रहे पानी का पता कब तक लगा पाएंगे। जबकि खदान सूत्र बता रहे हैं कि जिस तेजी से पानी बढ़ रहा है। उस तेजी से बाहर नहीं निकाल पा रहे। इसके चलते रूफ कमजोर होने का खतरा भी बढ़ रहा है।




