Betul Road : वैकल्पिक रास्ते के लिए खोदी सवा तीन करोड़ की व्हाइट टाइपिंग सड़क
वाहन इधर से उधर करने के लिए तलाशा विकल्प, सड़क की गुणवत्ता पर उठेंगे सवाल

बैतूल। शहर में करोड़ों की लागत से बनाई जा रही व्हाइट टॉपिंग सड़क पर एक बार फिर विकास विरोधी मानसिकता हावी होती नजर आ रही है। इस सड़क को बनाने के पीछे नागरिकों को लम्बे समय की सुविधा प्रदान करना ही एकमात्र मकसद था, लेकिन निर्माणाधीन अवधि में ही सवा तीन करोड़ की लागत से बनी नई नवेली सीमेंटेड सड़क को कुछ लोगों ने सिर्फ अपनी सुविधा के लिए जानबूझकर खोद डाला।
मामला कोतवाली से चौपाटी के बीच बने मुख्य मार्ग का है, जहां निर्माण पूरा होने के कुछ दिन बाद ही गांधी चौक के समीप सड़क का किनारा तोड़कर कर आरपार जाने का रास्ता बना दिया गया। अब यहीं से दोपहिया वाहनों का आवागमन हो रहा है। इससे सड़क और भी ज्यादा क्षतिग्रस्त होती जा रही है।
कुछ यही हाल लल्ली चौक से चर्च तक बनाई सड़क पर भी नजर आ रहे हैं। यहां भी सड़क पर बाइक दौड़ती दिख रही हैं। चौपाटी पर लगी दुकानों में आने वाले ग्राहकों ने नई नवेली सड़क को ही पार्किंग बना लिया है। जिससे सड़क क्षतिग्रस्त हो रही है,लेकिन कोई देखने वाला है और ना सुनने वाला
सड़क खोदी और सरपट दौड़ाई जा रही बाइक
बताया जा रहा है कि यह हरकत क्षेत्र के ही कुछ लोगों द्वारा की गई है, जिन्होंने अपने दोपहिया वाहनों को आरपार ले जाने के लिए सड़क को काटकर एक रास्ता बना लिया हैं। ऐसे में जो सड़क तकनीकी मानकों के तहत बनी थी, उसमें अब दरारें और क्षति होनी शुरू हो गई है।
ठेकेदार और पीडब्ल्यूडी के दावों की पोल खुल रही है। जिम्मेदार अधिकारी अब तक मौन हैं, कोई देखने वाला तक नहीं है। इससे यह साफ होता है कि इस हरकत पर कोई सख्त निगरानी नहीं रखी जा रही। जिस जगह से सड़क तोड़ी गई है, वहां से लगातार वाहनों के आने जाने से सड़क टूटने का दायरा भी बढ़ता जा रहा है।
स्थानीय लोगों ने बताया कि जहां खुदाई की गई है, वहां रात के समय बाइक तेज रफ्तार से दौड़ाई जा रही हैं, जिससे हादसों की आशंका भी बढ़ गई है। उल्लेखनीय है कि यह सड़क न सिर्फ शहर का मुख्य मार्ग है, बल्कि अस्पताल, स्कूल, और प्रमुख बाजारों को जोड़ने का काम करती है। ऐसे में इसकी क्षति आमजन की सुविधा पर सीधा असर डाल रही है।
विभाग की अनदेखी से करोड़ों का प्रोजेक्ट खतरे में
पीडब्ल्यूडी और ठेकेदार द्वारा द्वारा सड़क के रखरखाव और मजबूती को लेकर बड़े-बड़े दावे किए गए थे, लेकिन हकीकत यह है कि लोगों की मनमानी और प्रशासन की अनदेखी से यह करोड़ों की लागत का प्रोजेक्ट खतरे में पड़ता जा रहा है। यदि समय रहते कार्यवाही नहीं हुई, तो अन्य हिस्सों में भी ऐसी ही तोड़फोड़ की घटनाएं हो सकती हैं।अधिकारियों को चाहिए कि इस मामले में एफआईआर दर्ज कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करे, साथ ही सड़क की निगरानी के लिए सीसीटीवी कैमरे और सुरक्षा के स्थायी इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की तोड़फोड़ रोकी जा सके।




