खरी-खरी: सम्मान की आड़ में सौदेबाज़ी कब तक?

पिछले दिनों जिले के एक बड़े समूह द्वारा विभिन्न वर्गों के लोगों को सम्मानित करने का आयोजन किया गया। उद्देश्य तो सराहनीय था, समाज में उत्कृष्ट कार्य करने वालों को पहचान देना, किंतु सवाल यह उठता है कि क्या वास्तव में सम्मान पाने वाले सभी लोग इसके हकदार थे?

यह प्रश्न महज़ एक जिज्ञासा नहीं, बल्कि जनमानस के भीतर उठता हुआ असंतोष है, जो मेरी 2 सोशल मीडिया पोस्ट पर आई सैकड़ों प्रतिक्रियाओं से स्पष्ट झलकता है। लोगों का कहना है कि जिन व्यक्तियों को सम्मानित किया गया, उनमें से कई का अपने-अपने क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान तक नहीं है।

निस्संदेह, सम्मान करना बुरी बात नहीं। यह एक ऐसा माध्यम है जिससे प्रतिभाओं को सामने आने का अवसर मिलता है, लेकिन जब सम्मान निष्कपट भावना से न होकर स्वार्थ और लेनदेन का साधन बन जाए, तो वह अपने मूल उद्देश्य से भटक जाता है। शहर में हुए हालिया आयोजन ने इसी कड़वी सच्चाई को उजागर कर दिया। समाजसेवी, धर्मध्वज वाहक, यहां तक कि कुछ जनप्रतिनिधि तक इस आयोजन से जुड़े, परंतु जिस समूह ने यह कार्यक्रम किया, उसकी नीयत पर सवाल उठना लाजि़मी है। चर्चा है कि कई लोगों ने सम्मान पाने के लिए राशि अदा की या बोली लगाई। अगर ऐसा है, तो यह न सिर्फ पुरस्कार की गरिमा पर धब्बा है, बल्कि सच्चे कर्मशील लोगों का अपमान भी।

हम यह बात किसी जलेसी या प्रतिस्पर्धा के लिए उल्लेख नहीं कर रहे हैं, बल्कि सम्मान प्राप्त करने के बाद हमसे फोटो प्रकाशित करने की मनुहार करने के बाद लिखने को मजबूर हुए। पुरस्कार प्राप्त करने वालों ने अपनी आप बीती बताई की उनसे एक मुश्त राशि ली ही गई, लेकिन इसके एवज में फोटो प्रकाशित करने का कोई पैकेज नहीं था। निराश होकर पुरस्कृत होने वाले ने जब यह पीड़ा हमको बताई, तब सोशल मीडिया पर पुरस्कार को लेकर आम लोगो ंसे राय जानी इसके बाद यह खरी-खरी लिखने को मजबूर होना पड़ा।
यहां बताना आवश्यक है कि जिले में ऐसे अनगिनत लोग हैं जिन्होंने निस्वार्थ भाव से समाजसेवा, गौसेवा, मानवसेवा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपना जीवन समर्पित कर दिया। यदि इन्हीं लोगों को बिना किसी आर्थिक लेनदेन के मंच पर सम्मानित किया जाता, तो न केवल आयोजन की प्रतिष्ठा बढ़ती, बल्कि यह समूह भी जनमानस के हृदय में अपनी सच्ची जगह बना पाता।

अफसोस इस बात का है कि ‘शर्मवीर सम्मानÓ जैसा आयोजन अब सम्मान से अधिक बिकाऊ तमाशा बनकर रह गया। सोशल मीडिया पर जनता की प्रतिक्रियाएं इस तथ्य को और अधिक पुख्ता करती हैं।

आने वाले समय में हमारा प्रयास रहेगा कि ऐसे सच्चे कर्मयोगियों को सामने लाया जाए जो वास्तव में समाज और मानवता की सेवा में समर्पित हैं। ये वे लोग हैं जो सम्मान के लिए नहीं, कर्तव्य के लिए कार्य करते हैं और ऐसे ही लोग असली सम्मान के पात्र हैं।

जय हो, जय जय हो

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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