Betul Samachar: फर्जी कम्पनी से जुड़ी बैठक में दुबई पहुंचे थे वनकर्मी, निवेशकों को दिया गया झांसा

अधिकारियों के साथ साथ शासन को भी किया गया गुमराह
Betul Samachar: बैतूल। बिना विभागीय अनुमति के दुबई यात्रा करने वाले वन विभाग के दो कर्मचारियों,वनपाल घोघरकर और वन रक्षक इवने का मामला अब और गंभीर होता जा रहा है। पहले जहां इनकी विदेश यात्रा को लेकर सवाल उठे थे, वहीं अब सामने आ रहा है कि दोनों कर्मचारी एक संदिग्ध एवं कथित फर्जी लेन-देन करने वाली कम्पनी से जुड़े हुए थे। सूत्रों के अनुसार, यही कम्पनी वर्तमान में सुरक्षा एजेंसियों के रडार पर है और इसकी गतिविधियों की जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि उक्त कम्पनी की एक महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए ही दोनों कर्मचारी एक सप्ताह के लिए दुबई गए थे। हैरानी की बात यह है कि पूरे मामले को लेकर करीब सवा साल बीत जाने के बावजूद अब तक किसी प्रकार की ठोस विभागीय कार्रवाई नहीं की गई है, जिससे विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों का यह भी दावा है कि घोघरकर और इवने ने स्थानीय स्तर पर कई लोगों को इस कम्पनी में निवेश करने के लिए प्रेरित किया था। आकर्षक लाभ का लालच देकर लोगों से पैसा लगवाया गया, लेकिन जब कम्पनी की सच्चाई सामने आने लगी तो निवेशकों में हड़कंप मच गया। अब पीड़ितों को पैसा वापस लौटाने का आश्वासन दिया जा रहा है, हालांकि अभी तक किसी को वास्तविक रूप से राशि वापस मिली है या नहीं, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है।
विदेश जाने के लिए शासन से अनुमति लेना अनिवार्य
नियमों के अनुसार, किसी भी शासकीय कर्मचारी को विदेश यात्रा पर जाने से पहले अपने विभाग से अवकाश स्वीकृत कराने के साथ-साथ सक्षम प्राधिकारी के माध्यम से शासन स्तर से अनुमति लेना अनिवार्य होता है। वन विभाग में यह अनुमति वन मुख्यालय भोपाल से जारी की जाती है। लेकिन आरोप है कि दोनों कर्मचारियों ने नियमों को दरकिनार करते हुए गुपचुप तरीके से पासपोर्ट और वीजा बनवाया और बिना किसी औपचारिक स्वीकृति के विदेश यात्रा कर आए।
जानकारों के मुताबिक यह कृत्य गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है और यदि निष्पक्ष विभागीय जांच कराई जाए तो पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकती है। फिलहाल इस प्रकरण ने वन विभाग की कार्यशैली और निगरानी व्यवस्था पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब मिलना बाकी है।




