Congress District President: पीसीसी चीफ ने 45 वर्ष की उम्र के अध्यक्ष की नियुक्ति का दावा किया खारिज
सांझवीर की खबर की राजधानी में गूंज, नए दावेदारों के अरमानों पर फिरा पानी

Congress District President: बैतूल। कांग्रेस संगठन सृजन अभियान के तहत जिला अध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर उम्र सीमा का मुद्दा अब सियासी बहस का केंद्र बन चुका है। सांझवीर टाईम्स की खबर ने जैसे ही इस विषय की परत उजागर की, इसकी गूंज सीधे राजधानी भोपाल में सुनाई देने लगी। 35 से 45 वर्ष के उम्र के क्राइटेरिया पर उठे सवालों के बाद पीसीसी चीफ जीतू पटवारी को आनन-फानन में प्रेस कांफ्रेंस कर सफाई देनी पड़ी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कांग्रेस में जिला अध्यक्ष की नियुक्ति में उम्र कोई बाध्यता नहीं है। योग्यता और पार्टी के प्रति समर्पण ही चयन का मुख्य आधार होंगे।
ऐसे में जिला कांग्रेस के ऊर्जावान अध्यक्ष हेमंत वागद्रे की फिर ताजपोशी का रास्ता साफ होते दिखाई दे रहा है। वैसे सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर इस समय उम्र के आधार पर जिला अध्यक्ष को लेकर चर्चा में 80 प्रतिशत कांग्रेसी हेमंत वागद्रे को ही दूसरी बार अध्यक्ष देखना चाह रहे हैं।
कांग्रेस में उम्र के क्राइटेरिया को लेकर इस समय हलचल मची है। खास बात यह है कि सांझवीर टाईम्स द्वारा इस मुद्दे की खबर हाल ही में प्रमुखता से प्रकाशित की थी। इसकी कटिंग खुद पीसीसी चीफ को भेजी गई थी। इसके अगले ही दिन पटवारी को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस विवादित क्राइटेरिया को खारिज करना पड़ा, जो इस बात का संकेत है कि सांझवीर की ज़मीनी पत्रकारिता अब भी असरदार भूमिका निभा रही है।
इस बयान के बाद अब वर्तमान जिला कांग्रेस अध्यक्ष हेमंत वागद्रे को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। वागद्रे के समर्पण और नेतृत्व क्षमता को देखते माना जा रहा है कि उन्हें पार्टी में बरकरार रखा जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो जिले में कांग्रेस की कमान संभालने का सपना देख रहे कई नेताओं के अरमान अधूरे रह सकते हैं।

योग्यता और समर्पण ही होगा नेतृत्व का पैमाना
जिलाध्यक्षों की नियुक्ति को लेकर क्राइटेरिया की हवा जैसे ही फैली, वरिष्ठ कांग्रेसियों की पेशानी पर बल पड़ना स्वाभाविक माना जा रहा था। खबर प्रकाशित होने के तत्काल बाद पीसीसी चीफ ने प्रेस कांफ्रेंस कर इस मुद्दे को खारिज कर दिया है। उनका कहना है कि मीडिया से खबरें मिली हैं कि जिलाध्यक्ष के लिए उम्र की सीमा 45 वर्ष तय की गई है। ऐसा कोई क्राइटेरिया नहीं बनाया गया है। स्थिति साफ करते उन्होंने बताया कि पद के लिए योग्यता ही पैमाना है। पार्टी के प्रति समर्पण, अनुभव और विचारधारा ही इसकी अवधारणा है। उम्र को लेकर जो बातें सामने आई हैं उन्हें मैं खारिज करता हूं।
पीसीसी चीफ ने स्पष्ट किया कि पिछले पांच साल के दौरान जो भी नेता भाजपा से कांग्रेस में आए हैं, उन्हें पद नहीं दिया जाएगा। पीसीसी चीफ के इस बयान के बाद बैतूल जिले के कांग्रेसियों एक बड़ा भृम दूर तो हो गया, लेकिन अब जिला अध्यक्ष का पद हथियाने के लिए जो घमासान मचेगा वो देखने लायक होगा।
क्या निष्ठावान हेमन्त को मिलेगा अभयदान?
पीसीसी ची$फ के इस बयान से वर्तमान जिला अध्यक्ष हेमन्त वागद्रे को अभयदान मिलने की पूरी संभावना नजर आ रही है। जिनमें पार्टी के प्रति समर्पण के साथ प्रबल नेतृत्व क्षमता भी किसी से छिनी नहीं है। यदि ऐसा होता है तो जिले के कई नेताओं के जिले में कांग्रेस का नेतृत्व करने के अरमान अधूरे रह सकते हैं।
इसकी वजह यह भी सामने आ रही है कि हेमन्त के समर्थन में पार्टी का एक बड़ा धड़ा किसी भी कीमत पर उनका विरोध करने के मूड में कहीं से कहीं तक नजर नहीं आ रहा है, क्योंकि विधानसभा चुनाव के पूर्व जब उन्हें ग्रामीण अध्यक्ष की कमान सौंपी गई थी, तभी उन्होंने पार्टी के प्रति समर्पण और अनुभव का सिक्का कांग्रेस के प्रथम पंक्ति के नेताओं के समक्ष ठोंक दिया था।
हेमन्त की कार्यप्रणाली से प्रभावित होकर उन्हें लोकसभा चुनाव के ठीक पहले कांग्रेस संगठन ने जिले में फुल फ्लैश अध्यक्ष की कमान सौंप दी थी। जिले की कांग्रेसी राजनीति को करीब से देखने और समझने वाले राजनीतिक समीक्षक भी यह मान रहे हैं कि हेमन्त की नेतृत्व कार्यक्षमता और नेतृत्व राजनीति में सौ फीसदी सटीक बैठती है। वैसे तो जिला अध्यक्ष के पद के लिए जिले में अरुण गोठी, नवनीत मालवी, हेमन्त पगारिया, अनुराग मिश्रा, समीर खान, राहुल उइके जैसे नेता भी दावेदारों में गिने जा सकते हैं।
युवाओं की बात करें तो 45 की उम्र को छूने वाले जिले भर से दर्जनों भर नाम सामने आए हैं। सांझवीर की खबर के बाद संभावित दावेदारों ने अपनी भी दावेदारी जताई थी, लेकिन इनमें एक दो नाम छोड़ भी दिए जाएं तो जिला अध्यक्ष के पद के लिए हेमन्त वागद्रे ही सबसे मजबूत दावेदार नजर आ रहे हैं। जिनकी नेतृत्व क्षमता पर पार्टी की प्रथम पंक्ति के नेता आंखें बन्द कर विश्वास कर सकते हैं। कुल मिलाकर पीसीसी चीफ की सफाई के बाद अब जिले में कांग्रेसियों का भ्रम पूरी तरह साफ हो चुका है। बस अब पर्यवेक्षकों के आने का इंतजार किया जा रहा है।




