Betul News: पटाखा दुकान के लिए बैतूल में 600 रुपए की पर्ची, मुलताई में 10 हजार की अमानत राशि

मुलताई में नई व्यवस्था से राजस्व बढ़ाने की तैयारी, बैतूल में महज 100 रुपए बढ़ाकर अपनी पीठ थपथपा रही नगरपालिका; वसूली की धीमी रफ्तार के बीच शुल्क निर्धारण पर उठे सवाल

Betul News: बैतूल। दीपावली पर पटाखा दुकान लगाने के लिए जिले की दो नगर पालिकाओं में शुल्क निर्धारण की अलग-अलग व्यवस्थाएं सामने आई हैं। मुलताई नगर पालिका जहां पटाखा बाजार को व्यवस्थित करने के साथ राजस्व बढ़ाने की दिशा में नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रही है, वहीं जिला मुख्यालय बैतूल में पटाखा दुकान लगाने के लिए महज 600 रुपए की पर्ची काटी जा रही है। दोनों नगर पालिकाओं के शुल्क में जमीन-आसमान का अंतर होने से बैतूल नगरपालिका की राजस्व नीति और शुल्क निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

मुलताई नगर पालिका द्वारा इस वर्ष पटाखा बाजार के लिए नई व्यवस्था तैयार की गई है। इसके तहत पटाखा दुकान लगाने के लिए निर्धारित भूखंड लेने वाले व्यापारियों को आवेदन के साथ 10 हजार रुपए की अमानत राशि जमा करना अनिवार्य किया गया है। इसके अलावा दुकान के लिए 2250 रुपए किराया निर्धारित किया गया है। भूखंडों का आवंटन लॉटरी प्रक्रिया से किया जाएगा।

इस व्यवस्था के पीछे उद्देश्य पटाखा बाजार में दुकानों का व्यवस्थित आवंटन करने के साथ व्यापारियों की जवाबदेही तय करना और नगरपालिका के राजस्व में वृद्धि करना बताया जा रहा है। इसके विपरीत जिला मुख्यालय बैतूल में पटाखा दुकान लगाने के लिए नगरपालिका द्वारा केवल 600 रुपए की राशि वसूली जा रही है।

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि जब मुलताई जैसी नगर पालिका पटाखा बाजार से राजस्व प्राप्त करने के लिए अमानत राशि और किराया निर्धारित कर सकती है, तो जिला मुख्यालय बैतूल में इतनी कम राशि लेकर दुकान लगाने की अनुमति क्यों दी जा रही है? क्या बैतूल नगरपालिका ने बाजार की स्थिति, दुकानों की संख्या और संभावित कारोबार के हिसाब से शुल्क निर्धारण की समीक्षा की है?

वसूली की रफ्तार धीमी, फिर भी राजस्व बढ़ाने में दिलचस्पी नहीं!

बैतूल नगरपालिका की राजस्व वसूली की रफ्तार पहले ही अपेक्षाकृत धीमी बताई जा रही है। ऐसे में दीपावली जैसे बड़े कारोबारी अवसर पर पटाखा दुकानों से महज 600 रुपए शुल्क वसूलने की व्यवस्था चर्चा का विषय बन गई है। एक ओर नगरपालिका विभिन्न मदों में राजस्व बढ़ाने के लिए प्रयास करने की बात करती है, वहीं दूसरी ओर पटाखा बाजार जैसे अस्थायी व्यापारिक आयोजन में शुल्क निर्धारण को लेकर उदारता दिखाई जा रही है।

नगरपालिका के जिम्मेदारों का तर्क भी कम दिलचस्प नहीं है। उनका कहना है कि पिछले वर्ष पटाखा व्यवसायियों से 500 रुपए लिए गए थे और इस बार उसमें 100 रुपए की वृद्धि कर 600 रुपए कर दिए गए हैं। यानी महज 100 रुपए बढ़ाकर नगरपालिका अपनी उपलब्धि गिनाने में जुटी है।

सवाल यह है कि क्या केवल 100 रुपए की बढ़ोतरी को ही राजस्व सुधार माना जाए? जब मुलताई में 10 हजार रुपए अमानत राशि और 2250 रुपए किराया निर्धारित करने की तैयारी है, तब बैतूल में शुल्क निर्धारण के आधार और गणना को सार्वजनिक करना जरूरी हो जाता है।

न्यू बैतूल ग्राउंड में अलग से किराया भी देंगे व्यापारी

बताया जा रहा है कि बैतूल के न्यू बैतूल ग्राउंड में पटाखा दुकान लगाने वाले व्यापारियों को 600 रुपए की पर्ची के अलावा अलग से किराया भी देना होगा। ऐसे में नगरपालिका द्वारा वसूले जा रहे 600 रुपए किस मद में लिए जा रहे हैं और ग्राउंड का किराया किस आधार पर तय किया गया है, यह भी स्पष्ट होना चाहिए। यदि किराया अलग से लिया जा रहा है तो उसकी दर, वसूली की प्रक्रिया और उससे होने वाली आय का विवरण भी सामने आना चाहिए।

नगरपालिका के सामने यह अवसर है कि वह पटाखा बाजार के लिए एक पारदर्शी और व्यवस्थित शुल्क नीति तैयार करे। इसमें दुकानों का आकार, आवंटित स्थान, बाजार की अवधि, साफ-सफाई, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर होने वाले खर्च को ध्यान में रखकर शुल्क तय किया जा सकता है। इससे व्यापारियों को भी स्पष्ट जानकारी मिलेगी और नगरपालिका को भी निर्धारित राजस्व प्राप्त हो सकेगा।

राजस्व नीति की समीक्षा कब होगी?

मुलताई और बैतूल की व्यवस्थाओं में अंतर सामने आने के बाद अब सवाल नगरपालिका के जिम्मेदार अधिकारियों से है कि क्या बैतूल में पटाखा बाजार के शुल्क की कभी विस्तृत समीक्षा की गई? क्या पिछले वर्षों की वसूली और बाजार से होने वाली आय का आकलन किया गया? जिला मुख्यालय होने के बावजूद यहां शुल्क निर्धारण की नीति इतनी सीमित क्यों है? फिलहाल इन सवालों के जवाब का इंतजार है।

इनका कहना…

पटाखा व्यवसायी न्यू बैतूल ग्राउंड में दुकान लगाने के लिए अलग से किराया देंगे। नगरपालिका पिछले साल की तुलना में इस बार 100 रुपए अधिक राशि ले रही है। इससे ज्यादा मैं कुछ नहीं कह पाऊंगा।

ब्रजगोपाल परते, राजस्व निरीक्षक, नगरपालिका बैतूल।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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