Betul Samachar: खातेधारकों की प्राइवेसी खतरे में डाल रहा डाक विभाग, खुले पत्र में उजागर हो रही बैंकिंग जानकारी

पासबुक सत्यापन के नाम पर खाताधारकों को भेजे जा रहे ओपन लेटर

Betul Samachar: बैतूल। बैंक हो या डाकघर, खातेधारकों की निजी जानकारी की सुरक्षा बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। ग्राहकों के खाते से जुड़ी जानकारी गोपनीय रखने के लिए वित्तीय संस्थानों से सावधानी बरतने की अपेक्षा की जाती है, ताकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी और निजी जानकारी के दुरुपयोग की आशंका को कम किया जा सके।

लेकिन बैतूल में डाक विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने खातेधारकों की गोपनीयता और निजी जानकारी की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यहां पासबुक के सत्यापन के लिए खातेधारकों को भेजे जा रहे पत्रों में ही उनकी बैंकिंग संबंधी जानकारी सार्वजनिक होने की स्थिति बन रही है।

दरअसल, बैतूल गंज उप डाकघर की ओर से खातेधारकों को एक ओपन लेटर जारी किया जा रहा है। इस पत्र के माध्यम से उन्हें अपनी मूल पासबुक जांच के लिए कार्यालय में जमा कराने के निर्देश दिए गए हैं। परेशानी यह है कि पत्र को बंद लिफाफे में भेजने के बजाय खुले रूप में भेजा जा रहा है। ऐसे में पत्र पर दर्ज खातेधारक का नाम, पता, खाता नंबर और खाते में जमा राशि जैसी महत्वपूर्ण जानकारी दूसरे लोगों की नजर में आ सकती है।

पासबुक जांच की सूचना, लेकिन गोपनीयता का ध्यान नहीं

डाक विभाग की ओर से जारी पत्र में खातेधारकों को निर्देशित किया गया है कि वे अपनी मूल पासबुक सत्यापन के लिए बैतूल गंज उप डाकघर में संबंधित अधिकारी के कार्यालय में अनिवार्य रूप से तत्काल जमा कराएं, ताकि उनके द्वारा खोले गए खातों के इतिशेष यानी खाते में दर्ज शेष राशि के सत्यापन का काम पूरा किया जा सके।

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य बचत बैंक के हिसाब-किताब में हुई संभावित गलतियों का पता लगाना है। इस तरह खातेधारकों के खातों का सत्यापन करना विभागीय प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान उनकी निजी जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उतना ही जरूरी है।

खातेधारकों को सूचना देने के लिए जारी किए जा रहे पत्र में यदि उनकी व्यक्तिगत और वित्तीय जानकारी स्पष्ट रूप से दिखाई देती है, तो यह गोपनीयता के लिहाज से चिंता का विषय बन जाता है।

खुला पत्र किसी के भी हाथ लगने पर जानकारी उजागर होने का खतरा

ओपन लेटर में दर्ज जानकारी डाक वितरण के दौरान या पत्र किसी अन्य व्यक्ति के हाथ लगने पर सार्वजनिक हो सकती है। नाम, पता और खाता नंबर जैसी जानकारियों का अनावश्यक रूप से उजागर होना खाताधारकों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। हालांकि, केवल इन जानकारियों के सार्वजनिक होने से धोखाधड़ी होना तय नहीं है, लेकिन निजी वित्तीय जानकारी के अनुचित इस्तेमाल की आशंका को नजरअंदाज भी नहीं किया जा सकता।

खातेधारकों का कहना है कि जब डाक विभाग को पासबुक सत्यापन के लिए सूचना भेजनी ही है, तो उसे बंद लिफाफे में भेजने की व्यवस्था अपनाई जा सकती है। इससे पत्र संबंधित व्यक्ति तक सुरक्षित तरीके से पहुंचाया जा सकेगा और दूसरे लोगों की नजरों से उसकी निजी जानकारी को बचाने में मदद मिलेगी।

विभाग की जवाबदारी से जुड़े उल्लेख ने भी बढ़ाई चिंता

पत्र में यह भी उल्लेख किया गया है कि यदि खातेधारक पासबुक जमा नहीं कराते हैं, तो भविष्य में खाते के इतिशेष में किसी प्रकार की अनियमितता या अंतर पाए जाने पर विभाग की जवाबदारी नहीं होगी। इस निर्देश के चलते खातेधारकों से तत्काल पासबुक जमा कराने की अपेक्षा की गई है। हालांकि, पत्र भेजने की प्रक्रिया में गोपनीयता का ध्यान रखा जाना भी उतना ही आवश्यक है।

खातेधारकों को समय पर सूचना देना और खातों का सत्यापन करना विभाग की कार्यप्रणाली का हिस्सा है, लेकिन इस दौरान निजी जानकारी को सुरक्षित रखने के उपायों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। ऐसे में सवाल यह है कि जब सामान्य पत्राचार को भी बंद लिफाफे में भेजने की व्यवस्था अपनाई जा सकती है, तो खातेधारकों की वित्तीय जानकारी से जुड़े पत्र खुले रूप में क्यों भेजे जा रहे हैं?

गोपनीयता बनाए रखने के लिए व्यवस्था में बदलाव जरूरी

डाकघर में खाता खुलवाने वाले लोग अपनी बचत सुरक्षित रखने के भरोसे से विभाग की सेवाओं का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में उनकी निजी जानकारी की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी महत्वपूर्ण है। पासबुक सत्यापन के लिए भेजे जा रहे पत्रों में नाम, पता, खाता नंबर और जमा राशि जैसी जानकारी खुले रूप में दर्ज होने के मामले में विभाग को व्यवस्था की समीक्षा करनी चाहिए।

पत्रों को बंद लिफाफे में भेजने और व्यक्तिगत वित्तीय जानकारी को अनावश्यक रूप से उजागर होने से बचाने के उपाय किए जाने चाहिए, ताकि सत्यापन की प्रक्रिया भी पूरी हो और खातेधारकों की गोपनीयता भी बनी रहे।

इस संबंध में खातेधारकों की जानकारी सार्वजनिक किए जाने के संबंध में चर्चा करने के लिए डाक विभाग के एसडीआई नितेश ङ्क्षसह सिकरवार से उनके मोबाईल नंबर पर चर्चा करनी चाही, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया, इसलिए खबर में डाक विभाग के अधिकारियों का पक्ष नहीं रख पाए।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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