Free Ration Scam In Betul : मुफ्त अनाज योजना ने बढ़ाई गरीबों की आमदनी !
राशन दुकान खुलते ही सज जाता है अनाज का बाजार, 20 से 22 रुपए किलो में हाथों-हाथ बिक रहा मुफ्त का गेहूं, चावल

Free Ration Scam In Betul : बैतूल। गरीब परिवारों को खाद्य सुरक्षा देने के उद्देश्य से संचालित सार्वजनिक वितरण प्रणाली की मुफ्त अनाज योजना का एक अलग ही पहलू सामने आया है। योजना के तहत मिलने वाला अनाज कई हितग्राहियों के लिए भोजन का सहारा बनने के बजाय नकद आमदनी का जरिया बनता नजर आ रहा है। राशन दुकान से अनाज मिलते ही कुछ स्थानों पर व्यापारी दुकान के बाहर पहुंच जाते हैं और हितग्राहियों से गेहूं-चावल खरीदकर तत्काल नकद भुगतान कर देते हैं।
जानकारी के मुताबिक, शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक कई राशन दुकानों पर हर माह वितरण शुरू होते ही अनाज खरीदने वाले छोटे व्यापारी सक्रिय हो जाते हैं। हितग्राही जैसे ही राशन लेकर दुकान से बाहर निकलते हैं, व्यापारी उन्हें गेहूं के बदले करीब 20 से 22 रुपए किलो तक नकद राशि देने की पेशकश करते हैं। जरूरतमंद परिवारों के लिए यह राशि तत्काल उपलब्ध होने के कारण वे अनाज बेचने को तैयार हो जाते हैं।
पीडीएस व्यवस्था के तहत अलग-अलग श्रेणी के राशन कार्डधारियों को निर्धारित मात्रा में खाद्यान्न दिया जाता है। बीपीएल श्रेणी में प्रति सदस्य पांच किलो गेहूं और एक किलो चावल दिए जाने की व्यवस्था बताई गई है। वहीं एपीएल श्रेणी में प्रति राशन कार्ड 30 किलो गेहूं और पांच किलो चावल प्रतिमाह दिया जा रहा है। इसी अनाज को बेचकर कुछ परिवारों को हर माह करीब 600 से 1000 रुपए तक नकद राशि मिल रही है।
साफ-सफाई के बाद 25 से 30 रुपए किलो तक बिक्री
दूसरी ओर, अनाज खरीदने वाले व्यापारी भी इस पूरे सिलसिले में मुनाफा कमा रहे हैं। बताया जा रहा है कि खरीदे गए गेहूं की साफ-सफाई और छंटाई के बाद इसे बाजार में 25 से 30 रुपए किलो तक बेचा जाता है। इस तरह हितग्राही को तत्काल नकद राशि मिलती है, जबकि व्यापारी को भी खरीद और बिक्री के बीच का अंतर मुनाफे के रूप में प्राप्त होता है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी जारी है सिलसिला
यह स्थिति केवल शहरी अथवा नगरीय क्षेत्रों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों में भी राशन वितरण के दौरान अनाज खरीदने वाले व्यापारी सक्रिय दिखाई देते हैं। हालांकि, इस व्यवस्था से मुफ्त खाद्यान्न योजना के मूल उद्देश्य पर सवाल जरूर खड़े होते हैं। सरकार गरीब परिवारों को खाद्यान्न इसलिए उपलब्ध कराती है ताकि उनके घर का भोजन सुरक्षित रहे, लेकिन यदि यही अनाज बाजार में पहुंच रहा है तो योजना के वास्तविक लाभ और निगरानी व्यवस्था पर विचार की आवश्यकता है।
विभाग बोला- वितरण के बाद हितग्राही की मर्जी
खाद्य विभाग के अधिकारी के के टेकाम का कहना है कि विभाग की विभाग की जिम्मेदारी पात्र हितग्राही तक निर्धारित खाद्यान्न पहुंचाने और उसका वितरण सुनिश्चित करने की है। वितरण के बाद हितग्राही अनाज का उपयोग किस तरह करता है, यह उसके ऊपर निर्भर करता है। ऐसे में मुफ्त खाद्यान्न के बाजार में पहुंचने का यह सिलसिला विभाग के लिए भी एक चुनौती बनकर सामने आ रहा है।




