Betul Me Aviadh Katai : हजारों सागौन पेड़ों की कटाई, डेढ़ सैकड़ा ठूंठ पर जाकर खत्म
कैम्पा प्लांटेशन में कटाई की जांच पूरी, महज 153 ठूंठ मिले

बैतूल। शाहपुर रेंज की बागला और बोन्द्री बीट में कैम्पा प्रोजेक्ट के तहत सागौन प्लांटेशन में हुई कथित बड़े पैमाने की कटाई की जांच सीसीएफ उड़नदस्ते ने पूरी कर ली है। जांच के दौरान महज 153 ठूंठ मिलने की बात सामने आई है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या जंगल में हुई कटाई वास्तव में सिर्फ डेढ़ सैकड़ा पेड़ों तक सीमित थी? या फिर जांच की प्रक्रिया ही सवालों के घेरे में है।
सूत्रों के मुताबिक क्षेत्र में वन माफियाओं द्वारा बड़ी संख्या में सागौन के पेड़ों को नुकसान पहुंचाए जाने की चर्चा खुद विभाग में ही चल रही है, लेकिन आरोप है कि जांच में लापरवाही बरती गई बल्कि रेंजर और डिप्टी रेंजर तक को कार्यवाही की जद में आखिर क्यों नहीं लिया गया।
सूत्रों के मुताबिक जांच की कार्यप्रणाली को लेकर भी वन विभाग के भीतर सवाल उठ रहे हैं। बताया जा रहा है कि सीसीएफ उड़नदस्ते में प्रभारी सहित कुल चार कर्मचारियों ने जंगल में घूमकर ठूंठों की गिनती की। कई हेक्टेयर में फैले क्षेत्र में इतने कम कर्मचारियों के जरिए व्यापक स्तर पर जांच करना कितना प्रभावी रहा, यह चर्चा का विषय बना हुआ है। जानकारी के अनुसार महज चार से पांच दिनों में जांच पूरी कर प्रतिवेदन भी प्रस्तुत कर दिया।
मामले में वनरक्षक उपेंद्र वोरा को निलंबित कर दिया है, लेकिन रेंजर और डिप्टी रेंजर की जिम्मेदारी तय नहीं होने से विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठ रहे हैं। कर्मचारियों के बीच चर्चा है कि यदि क्षेत्र में बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई हुई है तो इसकी निगरानी और रोकथाम की जिम्मेदारी केवल वनरक्षक तक सीमित कैसे हो सकती है। वरिष्ठ स्तर पर जिम्मेदारी तय नहीं होने से जांच की निष्पक्षता को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
दस के बजाए मात्र चार कर्मचारियों के भरोसे सीसीएफ उड़न दस्ता
इधर सीसीएफ उड़न दस्ते में बल की कमी भी वन अपराधों की निगरानी के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। विभागीय व्यवस्था के अनुसार उड़न दस्ते में प्रभारी, दो डिप्टी रेंजर, दो वनपाल, चार वनरक्षक और एक वाहन चालक सहित करीब दस कर्मचारियों का स्टाफ होना चाहिए। इसके विपरीत वर्तमान में प्रभारी सहित महज चार कर्मचारी ही उपलब्ध बताए जा रहे हैं। ऐसे में बड़े वन क्षेत्र की निगरानी और गंभीर वन अपराधों की जांच चार कर्मचारियों के भरोसे किस तरह संभव है, यह बड़ा सवाल है।
जांच के आंकड़ों पर उठ रहे सवाल
153 ठूंठ मिलने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कैम्पा प्लांटेशन में वास्तव में इतनी ही कटाई हुई थी। यदि सूत्रों के दावे के मुताबिक नुकसान इससे कहीं अधिक है, तो विस्तृत और स्वतंत्र जांच की जरूरत महसूस की जा रही है। वन क्षेत्र में दोबारा भौतिक सत्यापन कराए जाने और रेंजर से लेकर मैदानी अमले तक की जिम्मेदारी तय किए जाने की मांग भी उठ सकती है। फिलहाल डेढ़ सैकड़ा ठूंठ और हजारों पेड़ों की कटाई के दावों के बीच जांच का निष्कर्ष कई सवाल अनुत्तरित छोड़ गया है।
इनका कहना…
कटाई की जांच पूरी हो चुकी है, उड़न दस्ते में 4 कर्मचारी हैं। अधिक कर्मचारियों को उड़नदस्ते में शामिल करने के लिए पत्राचार किया गया है।
आकांक्षा खातरकर, उड़नदस्ता प्रभारी वन वृत बैतूल




