Betul Hospital News: जिला अस्पताल में आउटसोर्स नियुक्तियों पर विधायक-कलेक्टर सख्त

सांझवीर की खबर के बाद कलेक्टर ने तलब की पूरी फाइल, एक ही कंपनी को दो जगह टेंडर देने पर उठे सवाल
Betul Hospital News: बैतूल। जिला अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर अब प्रशासनिक स्तर पर सख्ती शुरू हो गई है। आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी और एक ही कंपनी को अलग-अलग कार्यालयों में काम दिए जाने से जुड़े सवालों को लेकर कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने जिला अस्पताल से संबंधित पूरी फाइल तलब की है।
वहीं, बैतूल विधायक एवं प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने भी मामले को गंभीरता से लेते हुए नाराजगी जताई है। इससे आने वाले दिनों में जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है।
7 अगस्त की खबर के बाद हरकत में आया प्रशासन
जिला अस्पताल में करीब 130 से 140 आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति को लेकर सांझवीर टाइम्स ने 7 अगस्त को प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। खबर में 2024 के टेंडर, कर्मचारियों की नियुक्ति, ड्यूटी व्यवस्था और आउटसोर्स एजेंसी को लेकर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लिया है। बताया जा रहा है कि कलेक्टर ने सिविल सर्जन से नियुक्ति प्रक्रिया से संबंधित टेंडर, अनुबंध, कर्मचारियों की सूची और अन्य दस्तावेजों की पूरी फाइल मंगाई है।
एक कंपनी को दो जगह काम मिलने पर सवाल
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह सामने आया है कि सीएमएचओ कार्यालय और जिला अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारियों की व्यवस्था के लिए एक ही कंपनी को काम कैसे मिला? नियमों और टेंडर प्रक्रिया को लेकर अब इसी बिंदु की जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है। आरोप है कि दोनों स्थानों की प्रक्रिया में एक ही कंपनी को जिम्मेदारी दिए जाने से प्रतिस्पर्धी टेंडर प्रक्रिया और नियमों के पालन को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।
पुराने टेंडर पर कर्मचारियों को रखने का भी मुद्दा
जानकारी के अनुसार आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए जिला अस्पताल में टेंडर प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि नए सिरे से प्रक्रिया पूरी करने के बजाय पुराने टेंडर के आधार पर कर्मचारियों को बनाए रखने या नियुक्त करने की व्यवस्था की गई। ऐसे में प्रशासनिक जांच में यह देखा जाएगा कि संबंधित एजेंसी को किस आधार पर काम दिया गया और कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए कौन-कौन से नियम लागू किए गए।
140 कर्मचारियों की जरूरत और ड्यूटी पर भी उठे सवाल
जिला अस्पताल में बड़ी संख्या में आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति के बावजूद उनकी वास्तविक आवश्यकता, पदवार संख्या और ड्यूटी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरोप लगाए गए हैं कि कुछ कर्मचारियों से निर्धारित कार्य के बजाय अन्य काम लिए जा रहे हैं, जबकि कुछ कर्मचारियों की ड्यूटी को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब फाइल जांच में कर्मचारियों की स्वीकृत संख्या, उपस्थिति, वेतन भुगतान और वास्तविक कार्यस्थल का मिलान किए जाने की उम्मीद है।
जांच में सामने आएगा किस स्तर पर हुई गड़बड़ी
प्रशासनिक जांच में मुख्य रूप से यह देखा जाएगा कि टेंडर किस आधार पर जारी हुआ, कितनी कंपनियों ने इसमें भाग लिया, चयन की प्रक्रिया क्या रही, अनुबंध की शर्तें क्या थीं और उन्हीं शर्तों के आधार पर कर्मचारियों की नियुक्ति की गई या नहीं। इसके अलावा सीएमएचओ कार्यालय और जिला अस्पताल में एक ही एजेंसी को काम देने की प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आ सकती है।
मामले में कलेक्टर द्वारा फाइल तलब किए जाने और विधायक की नाराजगी के बाद जिला अस्पताल के अधिकारियों में भी हलचल बढ़ गई है। यदि जांच में टेंडर प्रक्रिया, नियुक्तियों या भुगतान में नियमों की अनदेखी सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई हो सकती है।
हालांकि, अंतिम स्थिति प्रशासनिक जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। अब निगाहें जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। फाइल सामने आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति किस प्रक्रिया के तहत हुई और एक ही कंपनी को दो अलग-अलग संस्थानों में काम देने के पीछे नियमों का कितना पालन किया गया।
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