Betul Samachar: रजिस्टार ऑफिस का 1 और खेल उजागर: 20 दिन में नामांतरण के बाद अब बंटवारे की तैयारी, राजस्व रिकॉर्ड पर भी उठे सवाल

बल्लारपुरा जमीन मामले की दूसरी कड़ी, तहसीलदार न्यायालय में चल रहे प्रकरण ने बढ़ाई परिवार की चिंता, नोटिस और पटवारी प्रतिवेदन की जांच की मांग
Betul Samachar: बैतूल। बैतूल। भीमपुर तहसील के ग्राम बल्लारपुरा में आदिवासी परिवार की पुश्तैनी जमीन की रजिस्ट्री और नामांतरण को लेकर उठे सवाल अब तहसीलदार न्यायालय में चल रही बंटवारा कार्यवाही तक पहुंच गए हैं। 27 जनवरी 2026 को 0.669 हेक्टेयर भूमि की रजिस्ट्री और इसके महज 20 दिन बाद 16 फरवरी को हुए नामांतरण के बाद अब संबंधित भूमि के बंटवारे की कार्रवाई को लेकर शिकायतकर्ता परिवार ने कलेक्टर से पूरे रिकॉर्ड की जांच कराने की मांग की है।
शिकायतकर्ता रोशन सोनी के मुताबिक तहसीलदार न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 0174/अ-27 वर्ष 2025-26 के तहत बंटवारे की कार्रवाई चल रही है। परिवार का कहना है कि जब मूल भूमि के स्वामित्व और रजिस्ट्री की वैधानिकता पर ही सवाल उठ रहे हैं, तब बंटवारे की कार्रवाई से पहले विवादित दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड की जांच होना जरूरी है। उन्होंने मांग की है कि बंटवारा प्रकरण में भूमि की मूल स्थिति, पूर्व खातेदार, वारिसों के नाम, रजिस्ट्री दस्तावेज, नामांतरण आदेश और संबंधित पटवारी प्रतिवेदन को एक साथ रखकर जांच की जाए।
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‘विपिन बिहारी के नाम को लेकर भी सवाल
शिकायत में राजस्व रिकॉर्ड से संबंधित एक और गंभीर आपत्ति उठाई गई है। परिवार का आरोप है कि तहसीलदार न्यायालय की कार्रवाई में ‘लक्ष्मी नारायण विरुद्ध विपिन बिहारी एवं अन्यÓ के नाम से प्रकरण सामने आया, जबकि शिकायतकर्ता परिवार का कहना है कि विवादित भूमि के वास्तविक वारिसों और उनके अधिकारों की समुचित जांच की जानी चाहिए थी। इसी बिंदु पर परिवार ने संबंधित पटवारी प्रतिवेदन और रिकॉर्ड की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि रिकॉर्ड में किसी ऐसे व्यक्ति का नाम आया है जिसका विवादित भूमि से संबंध स्पष्ट नहीं है, तो उसके आधार और स्रोत की जांच जरूरी है।
नोटिस दिए गए या नहीं, जांच का विषय
पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि नामांतरण और उसके बाद की राजस्व कार्यवाही में मूल वारिसों को किस प्रकार सूचना दी गई। परिवार का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त रूप से पक्ष में लिए बिना कार्रवाई की गई। हालांकि इस संबंध में वास्तविक स्थिति संबंधित न्यायालयीन रिकॉर्ड, नोटिस तामिली और आदेश-पत्रों की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों की जांच जरूरी
शिकायतकर्ता परिवार ने भूमि को अधिसूचित क्षेत्र में बताते हुए मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 165 से जुड़े प्रावधानों की जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि भूमि वास्तव में अधिसूचित क्षेत्र में आती है तो रजिस्ट्री से पहले आवश्यक अनुमति और वैधानिक प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं, यह जांच का मुख्य विषय होना चाहिए।
परिवार ने कलेक्टर से मांग की है कि जांच पूरी होने तक विवादित भूमि पर यथास्थिति रखी जाए। साथ ही रजिस्ट्री, नामांतरण, पटवारी प्रतिवेदन और बंटवारा प्रकरण की पूरी फाइल की जांच कर यदि किसी स्तर पर नियमों का उल्लंघन मिलता है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए। अब गेंद जिला प्रशासन के पाले में है। जांच में सामने आने वाले दस्तावेज ही यह तय करेंगे कि रजिस्ट्री और नामांतरण की प्रक्रिया नियमों के अनुरूप हुई या फिर रिकॉर्ड और वैधानिक प्रावधानों की अनदेखी की गई।
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