Prashasnik Kona: प्रशासनिक कोना: नेगेटिव खबर से कौनसे साहब खा रहे खौफ?? किस अधिकारी की गाली सुनकर कर्मचारियों के कान पक गए??? थानेदार के इस अनोखे प्रेम के क्या निकल रहे मायने???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम प्रशासनिक कोना में……

निगेटिव के डर से घबराएं साहब
राजस्व विभाग के एक स्मार्ट और ऊंचे कद के अधिकारी को निगेटिव खबरों का डर बहुत सता रहा है। चर्चा है कि जब भी उन्हें मीडिया वाले किसी मामले को लेकर पूछताछ करते हैं तो उनकी बीपी हाई हो जाती है, वे संबंधित मीडिया से करीबी रखने वालों को फोन घनघना कर एप्रोज लगाते हैं कि खबर निगेटिव नहीं छपे, उसे पाजीटिव बना दें। हालांकि साहब यह नहीं समझ पा रहे हैं कि मीडिया निगेटिव को पाजीटिव कैसे परोसे?
इसके बावजूद तरह-तरह के तर्क देकर निगेटिव खबरों से तौबा करने का तथाकथित प्रयास कर रहे हैं। चूंकि शासन के एक आदेश के बाद वे अपने दफ्तर में कम समय के लिए बैठ रहे हैं, ऊपर से उन पर भार साधक अधिकारी का भी जिम्मा है। यहां भी व्यवस्था बेपटरी होने के बाद प्रभारी मंत्री उनकी भी क्लास ले चुके हैं। साहब वर्क लोड बताकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं, लेकिन अपने दायित्वों का पालन करने के लिए उतने सक्रिय नहीं देखे जा रहे हैं, इसलिए निगेटिव खबरों के नाम से घबराएं हुए हैं। बताते चले कि यह साहब फ्रैंच कट दाड़ी रखने के लिए जाने जाते हैं।
इनकी गाली से कर्मचारी भयभीत
वैसे तो अधिकारी अपने सही आचरण के कारण वरिष्ठ अधिकारियों के पास अंक बढ़ाने का प्रयास करते हैं, लेकिन जिला मुख्यालय पर एक अधिकारी ऐसे हैं जो गालियों के कारण चर्चा में है। इस अधिकारी की खासियत है कि दोपहर 2 बजे के बाद अपने दफ्तर में आमद देते हैं और इसके बाद शुरू होता है, कर्मचारियों को गालियां देने का सिलसिला। कब, कौन अधिकारी इनकी गाली के प्रवचन के शिकार हो जाए, यह कह पाना मुश्किल है, लेकिन इतना जरूर है कि साहब की गालियां सुनकर कर्मचारियों के कान पक गए हैं। छोटी-छोटी बातों में हड़काना तो आम बात है। इस दौरान उनके हर 3-4 शब्द में बेहूदा भाषा की गाली मुंह से निकलने पर कर्मचारी परेशान हो गए हैं।
कर्मचारियों को डर है कि यदि इनके खिलाफ कुछ बोला तो वे सीधे निलंबित और अन्य कार्रवाई की चेतावनी देते हैं। इसी वजह बात आगे नहीं बढ़ पाती। चर्चा है कि इन अधिकारी की करतूत को बड़े साहब तक भी जानकारी दे दी गई है। यह अधिकारी पानी से जुड़े एक विभाग के है और पड़ोसी जिले से निलंबित होते ही यहां के अधिकारी के तबादले के बाद आमद देने आए है।
थानेदार का यह कैसा प्रेम?
एक प्रभारी टीआई इन दिनों सटोरियों से काफी निकटता रखने के लिए सुर्खियों में बने हुए हैं। उनके बारे में चर्चा है कि वरिष्ठ अधिकारियों को अपने क्षेत्र में सट्टे की जीरा टारलेंस प्रणाली चल रही है। साहब भी थानेदार के दी गई जानकारी पर यकीन कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि साहब के थाने से लेकर 500 मीटर की दूरी पर ही शहर के नामी सटोरिए रोज पट्टी लिख रहे हैं। इनके नाम भी साहब के अलावा पूरा थाना स्टाफ जानता है। हालांकि एक-दो जुआरियों को पकड़कर साहब पीठ थपथपाने की कोशिश में पिछले दिनों विवाद में पड़ गए।
चर्चा है कि एक प्रमुख अखबार के स्थानीय कर्ता-धर्ता को सटोरियों का एजेंट पकड़वाने की खबर के लिए 2 हजार रुपए देना पड़ गया। इसके बाद वह खबर सार्वजनिक हुई तो कटिंग काटकर बड़े साहब तक पहुंचाने के प्रयास किए गए। इसमें थानेदार को कोई सफलता हाथ नहीं लगी। यह वही थानेदार है, जिनके जिम्मे पहले छोटा थाना था, अब उन्हें पास के ही एक प्रमुख थाने में मजबूरी में कमान सौंपी गई है।




