Betul Samachar: अलग नाम के बावजूद रजिस्ट्री कैसे? सवाल पर उप पंजीयक ने फोन काटा, कलेक्टर ने तलब की फाइल

सांझवीर टाईम्स की खबर के बाद रजिस्ट्री कार्यालय में हड़कंप; आधार में ‘अजय’, खसरे में ‘अज्जू’ नाम दर्ज होने के मामले में कलेक्टर ने दोबारा जांच कराने की बात कही
Betul Samachar: बैतूल। रजिस्ट्री में दस्तावेजों के सत्यापन को लेकर उठे सवाल अब जिला प्रशासन तक पहुंच गए हैं। सांझवीर टाईम्स के गतांक में आधार कार्ड में अजय (परिवर्तित) और खसरे में अज्जू नाम दर्ज होने के बावजूद रजिस्ट्री किए जाने का मामला सामने आने के बाद कलेक्टर डॉ. सौरभ संजय सोनवणे ने संबंधित प्रकरण की फाइल तलब की है। फाइल तलब होने के बाद रजिस्ट्री कार्यालय में भी हलचल बढ़ गई है।
मामला दस्तावेज क्रमांक 100611017 और रजिस्ट्री क्रमांक MP 46 IGR 16852026 से जुड़ा है। दस्तावेज पर 22 मई 2026 की तारीख दर्ज है। शिकायत में सवाल उठाया गया है कि जब पहचान और राजस्व रिकॉर्ड में नाम अलग-अलग दर्ज हैं तो पंजीयन के दौरान इस अंतर का सत्यापन किस तरह किया गया?
उप पंजीयक बोले- आधार-पैन में जो नाम, उसी से रजिस्ट्री
मामले में उप पंजीयक राहुल बागड़े से जानकारी ली गई। उन्होंने कहा कि आधार और पैन कार्ड पर जो नाम दर्ज रहता है, उसी के अनुसार रजिस्ट्री की जाती है। लेकिन जब उनसे पूछा गया कि खसरे में नाम अलग होने पर उसका मिलान और सत्यापन कैसे किया गया, तो उन्होंने कहा कि जो जानकारी लेना है, कार्यालय आकर पूछिए। इसके बाद फोन काट दिया। अब सवाल यही है कि यदि राजस्व रिकॉर्ड में नाम अलग दर्ज है तो केवल आधार-पैन के नाम के आधार पर पंजीयन किया जा सकता है या इसके लिए अन्य दस्तावेजों से पहचान का मिलान जरूरी है? इसका जवाब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
खबर के बाद कलेक्टर ने तलब की फाइल
मामला सामने आने के बाद कलेक्टर ने संबंधित रजिस्ट्री की फाइल रजिस्ट्रार कार्यालय से तलब की है। बताया गया कि खबर में संबंधित व्यक्ति का नाम परिवर्तित होने के कारण अधिकारियों की ओर से मामले को लेकर अलग जानकारी दी गई थी। इसके बाद जब कलेक्टर को संबंधित दस्तावेज क्रमांक और आधार व खसरे में दर्ज अलग-अलग नाम की जानकारी दी गई तो उन्होंने मामले की फाइल दोबारा बुलाकर जांच कराने की बात कही। अब जांच में यह देखा जाना है कि रजिस्ट्री के समय पक्षकार की पहचान के लिए कौन-कौन से दस्तावेज लिए गए थे, नाम में अंतर का कोई स्पष्टीकरण या प्रमाण रिकॉर्ड में है या नहीं और पंजीयन अधिकारी ने दस्तावेजों का सत्यापन किस आधार पर किया।
एक मामले से पुराने रिकॉर्ड भी जांच के घेरे में
इस मामले ने रजिस्ट्री कार्यालय की दस्तावेज जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जानकारों के अनुसार यदि नामों में अंतर वाले पुराने पंजीयन दस्तावेजों की भी जांच की जाए तो प्रक्रिया की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है। हालांकि पुराने मामलों में भी इसी तरह की अनियमितता हुई है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि संबंधित रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया और दस्तावेजों का निष्पक्ष परीक्षण कराया जाए।
कलेक्टर की जांच से खुलेगा राज
मामला जिला मूल्यांकन समिति के अध्यक्ष और कलेक्टर तक पहुंच चुका है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि अलग-अलग नाम वाले दस्तावेजों के बावजूद पंजीयन किस आधार पर हुआ और दस्तावेजों की जांच के दौरान यह अंतर अधिकारियों की नजर से कैसे निकल गया? कलेक्टर द्वारा फाइल तलब किए जाने के बाद अब जांच रिपोर्ट का इंतजार है। यदि पंजीयन प्रक्रिया नियमों के अनुसार हुई है तो स्थिति साफ हो जाएगी, लेकिन दस्तावेज सत्यापन में लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदारी तय होने की संभावना भी रहेगी।
हमारे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने के लिए कृपया इस लिंक पर क्लिक करें
👇https://chat.whatsapp.com/KWRuTRhIWoXDiwhdwiCm29?mode=gi_t
बैतूल जिले की ताजा खबरें (Hindi News Madhyapradesh) अब हिंदी में पढ़ें| Trending और Viral खबरों के लिए जुड़े रहे snewstimes.com से| आज की ताजा खबरों (Latest Hindi News) के लिए सर्च करें snewstimes.com




