Betul News: 60-70 सर्विस प्रोवाइड रजिस्ट्री के मैदान में लगा रहे चौके , छक्के

अधिकारी ऑनलाइन सेवा का विकल्प गिनाकर पल्ला झाड़ने की फिराक में, खरीदार-विक्रेताओं का दावा- बिना अतिरिक्त रकम दिए नहीं होता काम
Betul News: बैतूल। कलेक्ट्रेट से महज 100 कदम की दूरी पर स्थित जिला रजिस्ट्री कार्यालय सवालों के घेरे में है। रजिस्ट्री प्रक्रिया में अनियमितता और कथित कमीशनखोरी के आरोपों के बीच सर्विस प्रोवाइडरों की भूमिका सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बन गई है। स्थानीय स्तर पर करीब 60 से 70 सर्विस प्रोवाइडरों को दस्तावेज तैयार करने का अधिकार दिया गया है। अधिकारियों के अनुसार प्रतिदिन लगभग इतनी ही रजिस्ट्रियां भी होती हैं। ऐसे में यदि लगाए जा रहे आरोप सही साबित होते हैं तो प्रतिदिन हजारों नहीं, बल्कि लाखों रुपये के कथित अवैध लेन-देन की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
पर्दे के पीछे खेले जा रहे खेल को अधिकारी भले ही नकार रहे हैं, लेकिन भूमि की खरीद फरोख्त करने वालो का भी दावा है कि, बिना लेन देन किए रजिस्ट्री होना कहीं से कहीं तक सम्भव नहीं है। अब सवाल यह खड़ा हो रहा है कि लाखों के कमीशन के इस खेल में रजिस्ट्री कार्यालय के अधिकारि अपने किए पर पर्दा डाल रहे या फिर क्रेता और विक्रेताओं के दावे झूठे हैं। इस मामले में जब जिला पंजीयक दिनेश कौसले से वस्तुस्थिति जानना की कोशिश तो उन्होंने आरोपों को निराधार बताते बताया। उन्होंने कहा कि यदि किसी सर्विस प्रोवाइडर के खिलाफ शिकायत मिलती है तो उसे तत्काल हटा दिया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि शासन ने ऑनलाइन रजिस्ट्री की सुविधा उपलब्ध करा रखी है और इच्छुक नागरिक स्वयं भी इस सेवा का उपयोग कर सकते हैं। इधर आम नागरिको का कहना है कि रजिस्ट्री की तकनीकी और कानूनी प्रक्रिया इतनी जटिल है कि अधिकांश नागरिकों के लिए बिना विशेषज्ञ की मदद के इसे पूरा करना आसान नहीं है। इसी मजबूरी का जमकर फायदा उठाया जा रहा है।
ऑफ द रिकॉर्ड बोले खरीदार-विक्रेता, देना ही पड़ता है रकम
सांझवीर ने इस मामले में कई खरीदारों, विक्रेताओं और प्रॉपर्टी एजेंटों से बातचीत की। नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर उन्होंने दावा किया कि स्टाम्प ड्यूटी और अन्य सरकारी शुल्क के अलावा 5 से 7 औऱ 8 हजार तक की अतिरिक्त नकद राशि ली जाती है। उनका कहना है कि बिना किसी व्यवधान के रजिस्ट्री पूरी हो जाए, इसी सोच के चलते लोग यह राशि देने को मजबूर हो जाते हैं। कुछ एजेंटों ने यह भी दावा किया कि यह व्यवस्था वर्षों से चली आ रही है और लोग काम निकल जाने के बाद शिकायत करने से बचते हैं।
आम नागरिको की मजबूरी बनी कमाई का जरिया
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि ऑनलाइन सुविधा होने के बावजूद आम व्यक्ति के लिए दस्तावेज तैयार करना, प्रक्रिया समझना और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी करना आसान नहीं है। इसी मजबूरी के कारण अधिकांश लोग सर्विस प्रोवाइडरों पर निर्भर हो जाते हैं। ऐसे में आरोप है कि व्यवस्था की खामियों का लाभ उठाकर अतिरिक्त वसूली की जा रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार उठ रहे सवालों ने रजिस्ट्री व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर बहस जरूर खड़ी कर दी है।
इनका कहना….
सर्विस प्रोवाइडर यदि अलग से राशि ले रहे हैं। इसकी शिकायत हो तो कार्यवाही की जाएगी। जनता चाहे तो स्वयं ऑन लाइन सेवा का उपयोग कर सकती है।
दिनेश कौसले, पंजीयक रजिस्ट्री कार्यालय , बैतूल
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