Politics: राजनीतिक हलचल: किस पार्टी की नासमझ राजनीति की हो रही चर्चा?? संगठन में बदलाव को लेकर क्यों मच रहा बवाल??? नीट पर कौन गम्भीर, कौनसी पार्टी मौन???? विस्तार से पढ़िए हमारे चर्चित कॉलम राजनीतिक हलचल में…..

 समझ से परे इनकी राजनीति…

विपक्ष की एक प्रमुख पार्टी की राजनीति इन दिनों खुद उसके नेताओं की समझ से भी परे नजर आ रही है। हाल ही में आपसी खींचतान का मामला सार्वजनिक होकर चर्चा में रहा, लेकिन उससे कोई सीख मिलती दिखाई नहीं दे रही। ताजा मामला एक विज्ञप्ति का है। पार्टी के कुछ नेताओं से सत्तापक्ष के एक बड़े नेता के खिलाफ विज्ञप्ति जारी करवा दी।

मजेदार बात यह रही कि विज्ञप्ति तैयार कराने वाले यह भी नहीं देख पाए कि संबंधित नेता स्थानीय नहीं, बल्कि प्रादेशिक स्तर के हैं। बस फिर क्या था, विज्ञप्ति बाहर आते ही राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया। अब लोग चुटकी लेते हुए कह रहे हैं कि विपक्ष विरोधियों को घेरने से ज्यादा खुद ही अपने लिए मौके तैयार कर रहा है। आखिर यह रणनीति है या जल्दबाजी, यह तो वही जानें, लेकिन जग हंसाई जरूर दूसरी बार हो गई।

संगठन में बदलाव या सियासी संदेश?

एक प्रमुख राजनीतिक दल में छात्र संगठन के नए अध्यक्ष की घोषणा क्या हुई, संगठन से ज्यादा चर्चा उसके पीछे छिपे संदेशों की होने लगी। राजनीतिक गलियारों में सबसे ज्यादा हैरानी इस बात को लेकर है कि निवर्तमान अध्यक्ष बमुश्किल एक साल का कार्यकाल ही पूरा कर पाए और अचानक उनकी विदाई हो गई। दिलचस्प बात यह है कि पूर्व अध्यक्ष को पार्टी के एक बड़े शक्ति केंद्र का करीबी माना जाता रहा है।

ऐसे में उनकी रवानगी को सिर्फ संगठनात्मक बदलाव मानने वाले कम ही दिखाई दे रहे हैं। इधर नए अध्यक्ष के नाम की घोषणा हुई नहीं कि सोशल मीडिया पर नया मोर्चा खुल गया। विरोधी खेमे ने पुराने फोटो और पोस्ट खंगालकर दावा करना शुरू कर दिया कि नए अध्यक्ष का अतीत कभी सत्ताधारी दल की छात्र राजनीति से जुड़ा रहा है। जवाब में नए अध्यक्ष और उनके समर्थक इस दावे को सिरे से खारिज कर रहे हैं।

बस फिर क्या था, संगठन की मजबूती पर कम और फेसबुक-व्हाट्सएप की बहसें ज्यादा होने लगीं। अब हालात यह हैं कि अध्यक्ष कौन बना, इससे ज्यादा चर्चा इस बात की हो रही है कि कौन किस खेमे में है और कौन किसके इशारे पर पोस्ट लिख रहा है। कुल मिलाकर छात्र राजनीति का मामला इन दिनों संगठन से निकलकर सोशल मीडिया की अदालत में पहुंच चुका है, जहां फैसले भी रोज हो रहे हैं और अपीलें भी।

नीट पर कौन गंभीर, कौन मौन?

नीट परीक्षा और कथित पेपर लीक का मुद्दा देशभर में गर्म है। दिल्ली से उठी चिंगारी अब जिलों तक पहुंच चुकी है और राजनीतिक दल भी इसमें अपने-अपने तरीके से सक्रियता दिखा रहे हैं। दिलचस्प बात यह है कि जिले में प्रमुख विपक्षी पार्टी एक बार ज्ञापन सौंपकर मानो अपने कर्तव्य की इतिश्री कर चुकी है।

वहीं दूसरी ओर जयस और कुछ छोटी राजनीतिक-सामाजिक पार्टियां इस मुद्दे को लेकर मैदान में डटी हुई हैं। कोई धरना दे रहा है तो कोई भूख हड़ताल पर बैठ गया है। अब राजनीतिक गलियारों में चर्चा यह है कि जिस मुद्दे पर बड़े दलों को आक्रामक होना चाहिए था, वहां छोटी पार्टियां बाजी मारती नजर आ रही हैं। लोग चुटकी ले रहे हैं कि लगता है इस बार मुद्दा बड़ा है, लेकिन आंदोलन छोटे खिलाड़ी चला रहे हैं।

Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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