Betul Samachar: अति उत्साह में ‘‘अमर’’ हुई कांग्रेस! एक पोस्ट ने बढ़ा दी सियासी हलचल

क्या संगठनात्मक ऊर्जा से ज्यादा, शब्दों की राजनीति गर्मा रही है ?

Betul Samachar: (सत्येंद्र सिंह परिहार) बैतूल। जिले की कांग्रेस में सृजन प्रशिक्षण अभियान खत्म होते-होते संगठनात्मक ऊर्जा से ज्यादा शब्दों की राजनीति चर्चा का विषय बन गई। इस कार्यक्रम के बाद उपजा घटनाक्रम अभी ठंडा भी नही हो पाया है, तो दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर शहर कांग्रेस अध्यक्ष आमला अजय सिंह सोलंकी की एक फेसबुक पोस्ट ने ऐसा रंग जमाया कि विरोधियों को तंज कसने और अपने ही नेताओं को माथापच्ची करने का मौका मिल गया।

पोस्ट में लिखा गया कि ‘‘जिले में जब कांग्रेस अमर होने जा रही है…’’ बस फिर क्या था, राजनीतिक गलियारों में सवाल उठने लगे कि आखिर कांग्रेस ‘‘मजबूत’’ हो रही है, ‘‘पुनर्जीवित’’ हो रही है या सीधे ‘‘अमरत्व’’ की ओर प्रस्थान कर रही है? पोस्ट पर कई कांग्रेस नेताओं ने बिना शब्दों का अर्थ टटोले समर्थन में प्रतिक्रियाएं भी दे डालीं। मानो ‘‘लाइक’’ की राजनीति में भाषा का व्याकरण छुट्टी पर चला गया हो।

दिलचस्प मोड़ पर पहुंची कांग्रेस की राजनीति

दिलचस्प मोड़ तब आया जब कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता ऋषि दीक्षित ने एक सीधा-सा सवाल दाग दिया- ‘‘अमर मतलब’’ यह छोटा-सा सवाल पूरे घटनाक्रम का सबसे बड़ा राजनीतिक व्यंग्य बन गया। बाकी समर्थक जहां पोस्ट की प्रशंसा में व्यस्त रहे, वहीं इस सवाल का जवाब देने की जहमत किसी ने नहीं उठाई।एक तरह से उनका सही सवाल भी नजरअंदाज कर दिया गया।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि उत्साह अच्छी बात है, लेकिन जब उत्साह शब्दों पर भारी पड़ जाए तो संदेश कम और मजाक ज्यादा बन जाता है और यहां वही हुआ भी है। राजनीति में शब्द केवल भावनाएं नहीं, बल्कि आपकी राजनीतिक समझ और परिपक्वता, और अनुभव का भी परिचय देते हैं। ऐसे में ‘‘कांग्रेस अमर होने जा रही है’’ जैसी पंक्ति ने विपक्ष को बैठे-बिठाए मुद्दा थमा दिया बल्कि एक मजाक का विषय भी बन गया।

अमर शब्द के निकाले जा रहे कई मायने

वैसे भारतीय राजनीति में ‘‘अमर रहे’’ का नारा आमतौर पर शहीदों या दिवंगत महान व्यक्तित्वों की स्मृति में लगाया जाता है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर इस पोस्ट को लेकर तरह-तरह की व्याख्याएं होने लगीं। कुछ लोगों ने इसे भाषाई चूक बताया तो कुछ ने इसे राजनीतिक अनुभवहीनता का प्रमाण माना। सियासत में अक्सर कहा जाता है कि नेता की पहचान उसके भाषण और शब्दों से होती है।

बैतूल में इस बार भाषण नहीं, बल्कि फेसबुक पोस्ट ने बता दिया कि सोशल मीडिया पर एक गलत शब्द कभी-कभी पूरे राजनीतिक विचार विमर्श का केंद्र बन जाता है। फिलहाल कांग्रेस यह स्पष्ट करे या न करे, लेकिन इतना तय है कि ‘‘अमरत्व’’ वाले इस शब्द ने संगठन को मजबूती से ज्यादा चर्चा जरूर दिला दी। आखिर राजनीति में कभी-कभी विपक्ष से ज्यादा नुकसान शब्दकोश कर देता है।

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Ankit Suryawanshi

मैं www.snewstimes.com का एडिटर हूं। मैं 2021 से लगातार ऑनलाइन न्यूज पोर्टल पर काम कर रहा हूं। मुझे कई बड़ी वेबसाइट पर कंटेंट लिखकर गूगल पर रैंक कराए हैं। मैने 2021 में सबसे पहले khabarwani.com, फिर betulupdate.com, sanjhveer.com, taptidarshan.com, betulvarta.com, yatharthyoddha.com पर काम करने का अनुभव प्राप्त हैं।इसके अलावा मैं 2012 से पत्रकारिता/मीडिया से जुड़ा हुआ हूं। प्रदेश टुडे के बाद लोकमत समाचार में लगभग 6 साल सेवाएं दीं। इसके साथ ही बैतूल जिले के खबरवानी, प्रादेशिक जनमत के लिए काम किया।

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